राजेंद्र सिंह जादौन
चंडीगढ़, 4अक्टूबर । हरियाणा में धान खरीद में आ रही अड़चनों और गन्ने के भाव को लेकर प्रदेश का किसान एक बार फिर सड़कों पर उतर आया है। यमुनानगर जिले के औरंगाबाद गांव में रविवार को आयोजित भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) की किसान महापंचायत में किसानों का गुस्सा चरम पर दिखा। महापंचायत में भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत खुद ट्रैक्टर चलाकर पहुंचे और मंच से सरकार की कृषि नीतियों की तीखी आलोचना की। महापंचायत के मंच से प्रदेशाध्यक्ष रतन मान के सीधे अल्टीमेटम के बाद भड़के किसानों ने पंचकूला-सहारनपुर नेशनल हाईवे पर धरना देकर यातायात पूरी तरह ठप कर दिया।
महापंचायत को संबोधित करते हुए राकेश टिकैत ने केंद्र व राज्य सरकार को पुराने आंदोलनों की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि सरकारी लापरवाही के चलते मंडियों में धान की खरीद सुचारू रूप से नहीं हो पा रही है और किसान को नमी व बारदाने के नाम पर परेशान किया जा रहा है। टिकैत ने हुंकार भरते हुए कहा, “यह वही किसान है जिसने अपनी मांगों के लिए 13 महीने तक दिल्ली की सरहदों को घेर कर रखा था।
अगर हरियाणा के किसानों की समस्याओं का तुरंत समाधान नहीं हुआ और स्थानीय कमेटी ने फैसला लिया, तो हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बॉर्डर को फिर से सील करने से पीछे नहीं हटा जाएगा।” उन्होंने अफसोस जताया कि सरकार की गलत नीतियों के कारण आज का युवा खेती-किसानी से विमुख हो रहा है।भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष रतन मान ने भी सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी दावों के बावजूद मंडियों में धान की खरीद के लिए बारदाना ही उपलब्ध नहीं है, जिससे खुले आसमान के नीचे पड़ी फसल खराब होने की कगार पर है। इसके साथ ही पेराई सत्र सिर पर होने के बाद भी गन्ने का लाभकारी मूल्य घोषित न करने से किसानों में गहरा रोष है। मान ने स्पष्ट किया कि जब तक वरिष्ठ अधिकारी हाईवे पर आकर उनकी मांगों का ज्ञापन स्वीकार नहीं करते और ठोस आश्वासन नहीं देते, तब तक सड़क से धरना नहीं हटेगा।
महापंचायत के तुरंत बाद हजारों की संख्या में किसान झंडे और ट्रैक्टर लेकर पंचकूला-सहारनपुर मार्ग की ओर बढ़ गए। सड़क के बीचों-बीच दरी बिछाकर बैठे किसानों के कारण हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया, जबकि प्रशासन के आला अफसर स्थिति को संभालने और किसानों को मनाने के प्रयास में जुट गए।