सीईसी की चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल लोकतंत्र के लिए गंभीर चेतावनी
Sep23,2026
| Jagrati Lahar Bureau | Chandigarh
नेता विपक्ष राहुल गांधी पहले ही मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर जता चुके हैं चिंता
चुनाव आयोग को कार्यपालिका के प्रभाव से पूरी तरह मुक्त रखना संविधान की मूल भावना
चंडीगढ़, 23 सितंबर:
पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं सांसद गुरदासपुर सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े हालिया घटनाक्रम और सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग की विश्वसनीयता सर्वोच्च होनी चाहिए और उस पर किसी भी तरह का संदेह देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए चिंताजनक है। मुख्य चुनाव आयुक्त नैतिक अधिकार खो चुके हैं और उनके चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल लोकतंत्र के लिए गंभीर चेतावनी बन गई है। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को तुरंत हटाया जाना चाहिए। ताकि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा हो सके।
सुखजिंदर रंधावा ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने काफी पहले मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर जो चिंताएं उठाई थीं, आज उन मुद्दों पर राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर बहस हो रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए चुनाव आयोग को पूरी तरह निष्पक्ष, स्वतंत्र और जनता के विश्वास के अनुरूप कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की संस्थागत गरिमा की रक्षा करना सभी संवैधानिक संस्थाओं और राजनीतिक दलों की साझा जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष के 73 सांसदों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ लाया गया महाभियोग प्रस्ताव अभी लंबित है। उन्होंने कहा कि इस बीच चुनाव आयोग के भीतर सामने आए मतभेदों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है तथा इन घटनाओं ने आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर व्यापक चर्चा छेड़ दी है।
रंधावा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर हुई सुनवाई भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति दत्ता द्वारा उठाए गए सवाल इस बात की ओर संकेत करते हैं कि चुनाव आयोग की वास्तविक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर विचार आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस मामले की सुनवाई अब बड़ी पीठ करेगी और देश की निगाहें उस फैसले पर टिकी हैं।
रंधावा ने कहा कि मार्च 2023 में अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नियुक्ति समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने का निर्देश दिया था, लेकिन बाद में बनाए गए कानून के जरिए इस व्यवस्था में बदलाव किया गया। उन्होंने कहा कि इसी बदलाव को लेकर आज संवैधानिक बहस फिर केंद्र में है।
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