24 घंटे में बदले दो आदेशों को लेकर उठे सवाल, ‘एसडीएम मुर्दाबाद’ के लगाए नारे
श्री दुर्गा माता मंदिर के सामने स्थित सरकारी कॉलेज (लड़कियां) के ग्राउंड में लगने वाले बहुचर्चित दशहरा मेले में झूले-चंडोल की नीलामी (ओपन बिड) को लेकर चल रहा विवाद गुरुवार को उस समय बड़े हंगामे में बदल गया, जब बोली प्रक्रिया में शामिल होने पहुंचे दर्जनों ठेकेदारों ने उन्हें प्रक्रिया से बाहर किए जाने का आरोप लगाया। ठेकेदारों ने एसडीएम पश्चिमी कार्यालय के मुख्य गेट के बाहर धरना देकर जमकर नारेबाजी की और पूरी बोली प्रक्रिया में धांधली के गंभीर आरोप लगाए।ठेकेदारों का आरोप था कि एसडीएम कार्यालय की ओर से जानबूझकर उनके 30 लाख रुपये के सिक्योरिटी ड्राफ्ट और बोली से संबंधित फाइलें स्वीकार नहीं की गईं। इतना ही नहीं, उन्हें कार्यालय के अंदर दाखिल होने से भी रोका गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि अंदर केवल एक विशेष रसूखदार ठेकेदार और उसके चुनिंदा लोगों को बैठाकर बोली की औपचारिकता पूरी करवाने का प्रयास किया जा रहा था।
इस कथित पक्षपातपूर्ण रवैये से नाराज ठेकेदारों ने एसडीएम कार्यालय के बाहर धरना शुरू कर दिया। इस दौरान ‘एसडीएम मुर्दाबाद’ और ‘प्रशासनिक धांधली बंद करो’ के नारे लगाए गए। हंगामे के चलते कार्यालय परिसर में काफी देर तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
स्थिति बिगड़ती देख एसडीएम पश्चिमी कुलदीप बावा ने प्रदर्शनकारी ठेकेदारों को अपने कमरे में बातचीत के लिए बुलाया। उन्होंने मामले का समाधान निकालने की बात कहते हुए ठेकेदारों से लिखित शिकायत देने को कहा।
ठेकेदारों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से जारी आदेशों में महज 24 घंटे के भीतर बदलाव किया गया। उनका सवाल है कि जब 1 सितंबर के आदेश में सिक्योरिटी ड्राफ्ट जमा करवाने की अंतिम समय सीमा 10 सितंबर सुबह 10 बजे तक बताई गई थी, तो अगले ही दिन इसे घटाकर 8 सितंबर किस आधार पर कर दिया गया?
अब ठेकेदारों के विरोध के बाद निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या इस विवादित नीलामी प्रक्रिया की जांच कर इसे रद्द कर दोबारा पारदर्शी तरीके से बोली करवाई जाती है या मौजूदा प्रक्रिया को ही आगे बढ़ाया जाता है। ठेकेदारों ने प्रशासन से पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और सभी बोलीदाताओं को समान अवसर देने की मांग की है।