जो राष्ट्र अपने इतिहास को नहीं जानता और उस पर गर्व नहीं करता, उसका भविष्य सुनहरा नहीं हो सकता : गजेंद्र सिंह शेखावत
Aug14,2026
| Jagrati Lahar Bureau | Chandigarh
विभाजन की विभीषिका में 2 करोड़ भारतीय हुए विस्थापित, 20 लाख मारे गए, 5 लाख भारत की बेटियों का हुआ बलात्कार : चुग
विभाजन के समय पाकिस्तान और बांग्लादेश के क्षेत्र में 24 फीसदी थे हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध, आज मात्र 2 फीसदी, किसी के पास कोई जवाब है : चुग
नेहरू-लियाकत समझौते ने भारत को बांधा और पाकिस्तान को हर जवाबदेही से मुक्त कर दिया, अब नेहरू के वंशजों की जवाबदेही हो तय : चुग
अब माँ भारती का विभाजन किसी कीमत पर नहीं होने दिया जाएगा, यही करोड़ों परिवारों के बलिदान के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि : चुग
चंडीगढ़/अमृतसर, 14 अगस्त 2026
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री एवं राज्यसभा सांसद तरुण चुग ने आज गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर के गोल्डन जुबली ऑडिटोरियम में आयोजित 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के विशेष स्मरण कार्यक्रम में अपने विचार रखे। कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि राज्यसभा सांसद डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी एवं राज्यसभा सांसद डॉ. अशोक कुमार मित्तल भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि जो राष्ट्र अपने इतिहास को नहीं जानता, उसे नहीं समझता और उस पर गर्व नहीं करता, उसका भविष्य कभी सुनहरा नहीं हो सकता, और इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस अध्याय को राष्ट्रीय स्मृति में स्थापित किया जिसे कुछ लोगों ने मिट्टी डालकर दफन कर देने का प्रयास किया, ताकि उनकी सच्चाई आज की पीढ़ी के सामने न आ सके। उन्होंने कहा कि 1940 के लाहौर प्रस्ताव से लेकर 16 अगस्त 1946 के डायरेक्ट एक्शन डे तक की घटनाओं ने देश को सांप्रदायिक हिंसा की आग में झोंक दिया, और जिन्होंने अपने लिए सत्ता के सुनहरे सपने देखे थे उन्हें सत्ता मिल गई, जबकि जिन्होंने आजादी के सपने देखे थे उन्हें खून की होली, विस्थापन और अपने परिवारजनों को खोने का दर्द झेलना पड़ा। उन्होंने कहा कि उस अंधकार के समय में जब लाखों लोग ट्रेनों से आकर शरणार्थी शिविरों में जीवन तलाश रहे थे, तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने सेवा का भाव लेकर समाज को संभालने का काम किया, और यह भारत के सामाजिक संस्कारों की सबसे बड़ी पहचान है। उन्होंने कहा कि यह सरदार पटेल का दृढ़ संकल्प था जिसने रियासतों को एक कर भारत का स्वरूप गढ़ा, और आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद जम्मू-कश्मीर पूरी तरह राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़ चुका है। उन्होंने कहा कि आज का भारत विरासत और विकास दोनों को साथ लेकर चल रहा है, और उपस्थित सभी लोगों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को विभाजन के इतिहास का सही ज्ञान अवश्य दें, क्योंकि इतिहास का सही बोध ही आने वाली पीढ़ी को 2047 के सुरक्षित, समृद्ध और विकसित भारत के निर्माण की दिशा देगा।
अपने संबोधन में तरुण चुग ने कहा कि विभाजन की स्मृति का सबसे बड़ा संकल्प यही है कि अब माँ भारती का विभाजन दोबारा नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अगस्त को 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' घोषित कर उन करोड़ों परिवारों की पीड़ा को राष्ट्रीय स्मृति में स्थान दिया, जिन्हें दशकों तक जानबूझकर भुला दिया गया था।
चुग ने कहा कि विभाजन की विभीषिका में लगभग 2 करोड़ भारतीय विस्थापित हुए, करीब 20 लाख लोग मारे गए और 5 लाख से अधिक भारत की बेटियों को बलात्कार और अपमान का शिकार बनाया गया, लेकिन इस पैमाने की त्रासदी को दशकों तक इतिहास की किताबों में एक पंक्ति में समेट दिया गया। उन्होंने कहा कि टू-नेशन थ्योरी ने विभाजन की वैचारिक नींव रखी, लेकिन केवल जिन्ना और मुस्लिम लीग को जिम्मेदार बताकर तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व की भूमिका से बचा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि पंडित नेहरू उस समय कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व में थे और सत्ता हस्तांतरण की पूरी प्रक्रिया में निर्णायक भूमिका में थे, इसलिए यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या तत्काल सत्ता प्राप्त करने की राजनीतिक प्राथमिकताओं ने कांग्रेस नेतृत्व को विभाजन स्वीकार करने की दिशा में प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि इतिहास से केवल यह पूछना पर्याप्त नहीं है कि विभाजन किसने मांगा, बल्कि यह भी पूछना जरूरी है कि विभाजन को स्वीकार करने के राजनीतिक निर्णय किसने और क्यों लिए।
चुग ने कहा कि विभाजन के समय आज के पाकिस्तान और बांग्लादेश के क्षेत्र में हिंदू, जैन, सिख और बौद्ध समाज की आबादी लगभग 24 फीसदी थी, जो आज घटकर मात्र 2 फीसदी रह गई है, और यह आंकड़ा अपने आप में बताता है कि सीमा पार अल्पसंख्यकों के साथ क्या हुआ। उन्होंने कहा कि यह गिरावट किसी प्राकृतिक कारण से नहीं, बल्कि लगातार होते धर्मांतरण, अपहरण, हत्याओं, संपत्ति की लूट और व्यवस्थित उत्पीड़न से हुई है। उन्होंने कहा कि पंजाब की यह धरती विभाजन की सबसे गहरी चोट सहने वाली धरती है, जहां रावलपिंडी से लेकर लाहौर तक हुई हिंसा ने लाखों हिंदू और सिख परिवारों को अपनी ही जन्मभूमि से उजाड़ दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जो हिंदू और सिख सरहद पार अपनी ही जन्मभूमि में रह गए, उनके लगातार होते विस्थापन और उन पर होते अत्याचारों के प्रश्न को दशकों तक भारत की विदेश नीति में पर्याप्त प्राथमिकता क्यों नहीं मिली।
चुग ने कहा कि विभाजन के बाद नेहरू-लियाकत समझौता हुआ, जिसका घोषित उद्देश्य दोनों देशों में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था, लेकिन जमीनी सच्चाई यह रही कि लियाकत ने पाकिस्तान में हिंदू और सिख अल्पसंख्यकों को समाप्त कर दिया और भारत ने अपने हिस्से की हर शर्त निभाई। उन्होंने कहा कि इस समझौते ने भारत को बाध्य किया, लेकिन पाकिस्तान को किसी भी जवाबदेही से मुक्त कर दिया, इसलिए आज नेहरू के वंशजों की जवाबदेही तय होनी चाहिए कि उस ऐतिहासिक भूल की कीमत करोड़ों हिंदुओं और सिखों को क्यों चुकानी पड़ी। उन्होंने कहा कि जो लोग अपनी जमीन, घर और संपत्ति गंवाकर भारत आए, उन्हें "शरणार्थी" कहकर उनकी पीड़ा को स्थायी पहचान नहीं बनाया जाना चाहिए था, क्योंकि वे भारत के नागरिक थे जिन्होंने सब कुछ खोकर भारत को चुना था, और उनके पुनर्वास को केवल राहत का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पुनर्निर्माण का दायित्व माना जाना चाहिए था।
अपने संबोधन के अंत में तरुण चुग ने कहा कि विभाजन की स्मृति का उद्देश्य कड़वाहट फैलाना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाना है कि सामाजिक विभाजन और संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ किसी राष्ट्र को कितनी बड़ी कीमत चुकाने पर मजबूर कर सकते हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे विभाजन के इतिहास को केवल तारीखों के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता की सीख के रूप में पढ़ें और हर उस साजिश को पहचानें जो आज भी भाषा, जाति और मजहब के नाम पर देश को बांटने की कोशिश करती है। उन्होंने कहा कि आज पूरा देश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और 2047 के विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, और अब माँ भारती का विभाजन किसी कीमत पर नहीं होने दिया जाएगा — यही उन करोड़ों परिवारों के बलिदान के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
-partitionhorrorsremembranceday-partitionhorrors-gajendrasinghshekhawat-tarunchugh-partition1947-amritsar-bharatvibhajan-neveragainpartition