कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केवल ढिल्लो को प्रदेश अध्यक्ष बनाने का विरोध किया
May30,2026
| Rajender Singh Jadon | Chandigarh
राजेंद्र सिंह जादौन
चंडीगढ़, 30मई। भाजपा के पंजाब में पार्टी प्रदेश अध्यक्ष बदलने के फैसले का विरोध सामने आया है। पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जट्टसिख नेता केवल ढिल्लों को पंजाब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनाने का विरोध किया है। कैप्टन ने इस फैसले पर नाराजगी भी जताई है। मीडिया को दिए इंटरव्यू में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राजनीतिक क्षमता के मामले में ढिल्लो पंजाब भाजपा का नेतृत्व करने के लिए सही विकल्प नहीं हैं।
कैप्टन ने कहा कि केवल ढिल्लो को अध्यक्ष बनाने के लिए उन्हें पूछा तक नहीं गया। ढिल्लो मेरे पुराने मित्र हैं, लेकिन दोस्ती होना अपनी जगह है और राजनीतिक क्षमता अपनी जगह है। उन्होंने कहा कि सुनील जाखड़ और अश्वनी शर्मा को हटाने की जरूरत नहीं थी। दोनों अच्छे ढंग से काम कर रहे थे। कैप्टन ने कहा कि भाजपा में फैसला ऊपर से आता है, जबकि कांग्रेस में राय ली जाती थी।उधर भाजपा के नए प्रधान केवल सिंह ढिल्लों ने अकाली दल से गठजोड़ की चर्चा को सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी।
कैप्टन ने कहा कि जब वे मुख्यमंत्री थे, तब ढिल्लों सक्रिय जरूर थे, लेकिन जमीन पर उनका प्रदर्शन अपेक्षा अनुरूप नहीं रहा । उन्होंने कहा कि मुझे दरकिनार किए जाने पर झटका लगा है। कांग्रेस में मेरी राय ली जाती थी। कैप्टन ने कहा कि यह फैसला अभी 2 दिन पहले हुआ है, आने वाले दिनों में इसके परिणाम दिखेंगे, लेकिन लंबे समय से राजनीति में जुड़े लोग निश्चित रूप से इससे प्रभावित और आहत हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सुनील जाखड़ और अश्वनी शर्मा जैसे पुराने और मजबूत स्तंभों को पद से क्यों हटाया गया। कांग्रेस और भाजपा की कार्यसंस्कृति की तुलना करते हुए कैप्टन ने कहा कि मैं कांग्रेस में तीन बार अध्यक्ष रहा और वहां हमेशा मुझसे सलाह ली जाती थी। लेकिन भाजपा में पूरी तरह अलग संस्कृति है। यहां बस फैसला ऊपर से आता है, किसी से पूछा नहीं जाता। भाजपा द्वारा आगामी चुनावों के मद्देनजर किए गए जातिगत कार्ड (जट्ट सिख चेहरे की नियुक्ति) पर टिप्पणी करते हुए कैप्टन ने कहा, "अंत में वोटिंग पैटर्न मायने रखता है। दलितों की भूमिका पंजाब में बहुत महत्वपूर्ण है। लेकिन पार्टी को जाति या समुदाय के आधार पर संकीर्ण सोच रखने के बजाय यह सोचना चाहिए कि पंजाब की भलाई के लिए क्या सही है। कैप्टन ने एक बार फिर दोहराया कि वे पंजाब की स्थिरता और सुरक्षा के लिए भाजपा और शिरोमणि अकाली दल ( के बीच गठबंधन के पक्ष में हैं। उन्होंने हाल ही में नगर निकाय चुनावों में भाजपा के खराब प्रदर्शन का हवाला देते हुए कहा कि बिना जमीनी बुनियाद मजबूत किए पार्टी अकेले चुनाव नहीं जीत सकती।
कैप्टन ने कहा कि अब कांग्रेस में जाने का कोई सवाल ही नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी जयइंदर कौर बहुत मेहनत कर रही है। वो भाजपा में रहेगी और काम करेगी। वो खुद भी कांग्रेस में नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आपस में बंटी हुई है। कांग्रेस के पास सरकार बनाने का कोई मौका नहीं है।
सत्ताधारी आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि 'आप' सरकार चलाना नहीं जानती। दिल्ली से अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया फाइलें साइन करते हैं और पंजाब के विधायकों की कोई भूमिका नहीं है।
पंजाब कांग्रेस में जारी उठापटक और जयइंदर कौर की घर वापसी की अफवाहों को खारिज करते हुए कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि जयइंदर कौर के कांग्रेस में वापस जाने की बातें महज अफवाह हैं। उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए भावुक अंदाज में कहा, "मैंने कांग्रेस को नहीं छोड़ा था, बल्कि कांग्रेस ने मुझे छोड़ा था।60 साल तक वह पार्टी मेरे घर जैसी थी, इसलिए उसे छोड़ने का अफसोस तो हमेशा रहेगा, लेकिन राजनीति में बदलाव होते रहते हैं।" कांग्रेस के भविष्य पर टिप्पणी करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि फिलहाल पंजाब में कांग्रेस का कोई भविष्य नजर नहीं आ रहा क्योंकि पार्टी के भीतर भारी भ्रम है, वह खुद को अंदरूनी तौर पर बांट रही है और वहां टिकटों के दावेदारों की लंबी कतार है।
पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में यहां सिख चेहरे की अगुआई जरूरी थी। पंजाब में सिख भावना बहुत रहती हैं। ऐसे में सिख चेहरे को प्रधान की कुर्सी सौंपने से भाजपा को उम्मीद है कि सिख उनके प्रति आकर्षित होंगे।पंजाब में भाजपा के प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ और कार्यकारी प्रधान अश्वनी शर्मा थे। दोनों ही बड़े पदों पर हिंदू चेहरे थे। ऐसे में भाजपा नहीं चाहती थी कि पंजाब में चुनाव के दौरान भी उन पर सिर्फ हिंदुओं की पार्टी का ठप्पा लगा रहे। सिखों में ये मैसेज जाए कि भाजपा सिख चेहरों को आगे नहीं लाना चाहती। प्रधान सुनील जाखड़ 2024 में ही पद से इस्तीफा दे चुके थे। उस दौरान भाजपा 13लोकसभा सीट में से एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। इसके बाद जाखड़ काफी समय तक सक्रिय राजनीति से भी दूर रहे। मगर, कुछ समय से वह एग्रेसिव ढंग से पार्टी के लिए काम कर रहे थे। फिर भी जातीय समीकरण साधने की चुनावी मजबूरी के चलते भाजपा को उन्हें हटाना पड़ा।
Captain-Amarinder-Singh-Raised-Question-Over-Kewal-Singh-Appointment-As-Punjab-Bjp-President-