पीपीसीबी मुद्दों और उद्योगों की परेशानियों को लेकर सीआईसीयू ने सरकार से मांगा तत्काल समाधान
लुधियाना (विशाल):-चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल अंडरटेकिंग्स (सीआईसीयू) का एक प्रतिनिधिमंडल, अध्यक्ष एस. उपकार सिंह आहूजा की अगुवाई में, पंजाब के कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा से मिला और राज्य के उद्योग जगत से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान एपेक्स चैंबर के कन्वीनर राहुल आहूजा भी प्रतिनिधिमंडल के साथ मौजूद रहे।बैठक के दौरान सीआईसीयू प्रतिनिधिमंडल ने उद्योगपतियों के सामने आ रही बढ़ती परिचालन लागत, जटिल अनुपालन प्रक्रियाएं, बुनियादी ढांचे की समस्याएं, बिजली दरों में वृद्धि और नीतिगत अनिश्चितताओं जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इन समस्याओं का असर पंजाब के उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर पड़ रहा है।
एस. उपकार सिंह आहूजा और राहुल आहूजा ने विशेष रूप से पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) से जुड़े चल रहे विवादों को जल्द हल करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि उद्योगों को प्रक्रियात्मक देरी और अनुपालन संबंधी जटिलताओं के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने उद्योग हितैषी और व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो उद्योग जगत आंदोलन और 5 जून को प्रस्तावित पंजाब बंद के लिए मजबूर हो सकता है।सीआईसीयू प्रतिनिधिमंडल ने उद्योग एवं वाणिज्य विभाग, पंजाब को एक विस्तृत ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें एमएसएमई और बड़े उद्योगों से जुड़े कई मुद्दों पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई।
प्रतिनिधिमंडल ने इंडस्ट्रियल एंड बिजनेस डेवलपमेंट पॉलिसी (IBDP) 2017 के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (IDF) में दी गई छूट को बहाल करने की मांग की। सीआईसीयू ने कहा कि उद्योगों ने सरकार की नीतिगत घोषणाओं के आधार पर निवेश किया था और यदि प्रोत्साहनों को वापस लिया गया तो इससे पंजाब में निवेशकों का भरोसा कमजोर होगा।इसके अलावा अग्रिम बिजली बिल भुगतान पर ब्याज दर को प्रस्तावित 7.5 प्रतिशत से बढ़ाकर कम से कम 10 प्रतिशत करने की मांग भी रखी गई, ताकि उद्योगों को एडवांस पेमेंट स्कीम अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिल सके।
सीआईसीयू ने पंजाब राइट टू बिजनेस एक्ट के तहत विभिन्न विभागों से मंजूरियां प्राप्त करने में हो रही देरी का मुद्दा भी उठाया। संगठन ने समय सीमा बढ़ाने, नाममात्र लेट फीस और ‘डीम्ड अप्रूवल’ व्यवस्था लागू करने की मांग की, ताकि उद्योगों को आसानी से मंजूरियां मिल सकें।
प्रतिनिधिमंडल ने इन्वेस्ट पंजाब से जुड़े CRO रिपोर्ट पोर्टल के सही तरीके से काम न करने का मुद्दा भी मंत्री के समक्ष रखा। उन्होंने बताया कि तकनीकी खामियों के कारण विभिन्न मंजूरियों में देरी हो रही है और उद्योगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
इसके अलावा सीआईसीयू ने औद्योगिक बिजली दरों में कमी, श्रम कानूनों को सरल बनाने, औद्योगिक फोकल प्वाइंट्स में खराब इंफ्रास्ट्रक्चर, कुशल श्रमिकों की कमी और MSMEs के बकाया भुगतानों में देरी जैसे मुद्दों पर भी चिंता जताई।
एस. उपकार सिंह आहूजा ने कहा कि पंजाब का उद्योग राज्य में रोजगार, निर्यात और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पंजाब सरकार उद्योगों का विश्वास मजबूत करने और कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने के लिए सकारात्मक और समयबद्ध फैसले लेगी।
कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि उद्योग जगत द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और पंजाब के औद्योगिक विकास एवं आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए उचित कदम उठाए जाएंगे।