डॉ. कोटनिस एक्यूपंक्चर चैरिटेबल अस्पताल, सलेम टाबरी, लुधियाना द्वारा लगाया गया कैंप
सरदार जसवंत सिंह छापा, प्रधान, सरबत दा भला चैरिटेबल ट्रस्ट, लुधियाना तथा जत्थेदार जगरूप सिंह गुज्जरवाल भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
डॉ. कोटनिस एक्यूपंक्चर चैरिटेबल अस्पताल, सलेम टाबरी, लुधियाना द्वारा गुरुद्वारा मंजी साहिब पातशाही नौवीं, गुज्जरवाल में लगाया गया 2 दिवसीय निःशुल्क एक्यूपंक्चर कैंप सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस कैंप का उद्घाटन श्री जगदीश गर्चा (पूर्व कैबिनेट मंत्री) द्वारा किया गया था। इस मौके पर सरदार जसवंत सिंह छापा, प्रधान, सरबत दा भला चैरिटेबल ट्रस्ट, लुधियाना तथा जत्थेदार जगरूप सिंह गुज्जरवाल भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। कैंप के दौरान बड़ी संख्या में मरीजों ने भाग लिया और कुल 78 मरीजों का सफलतापूर्वक उपचार किया गया। कैंप के दौरान बिना दवाई, बिना सर्जरी और बिना दर्द वाली प्रमाणित एक्यूपंक्चर पद्धति के माध्यम से कमर दर्द, सर्वाइकल, स्पॉन्डिलाइटिस, डिस्क प्रोलैप्स, जोड़ों और घुटनों का दर्द, नसों की कमजोरी, न्यूरोपैथी, माइग्रेन, अनिद्रा, मानसिक तनाव, लकवा, अधरंग, पुराना जुकाम, एलर्जी, शुगर से संबंधित समस्याएं, आंखों की कमजोरी, स्पोर्ट्स इंजरी तथा नशा मुक्ति संबंधी बीमारियों के लिए उपचार और निःशुल्क परामर्श प्रदान किया गया तथा मरीजों की विस्तृत जांच कर उन्हें उचित मार्गदर्शन दिया गया। मरीजों ने उपचार के प्रति संतोष व्यक्त किया और कई मरीजों को तुरंत राहत भी महसूस हुई। इस मौके पर अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. इंदरजीत सिंह ने बताया कि उनकी संस्था पिछले 50 वर्षों से एक्यूपंक्चर के माध्यम से कई लाइलाज बीमारियों का उपचार कर मानवता की सेवा कर रही है और यह एक ऐसी चिकित्सा पद्धति है जिसका शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता तथा यह पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावशाली है। अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा मरीजों की विस्तृत जांच कर उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपचार दिया गया और साथ ही स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता भी प्रदान की गई। अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि इस प्रकार के निःशुल्क कैंप भविष्य में भी आयोजित किए जाते रहेंगे ताकि अधिक से अधिक लोग इस प्राकृतिक और प्रभावी उपचार पद्धति का लाभ उठा सकें। इस मौके पर डॉ. बलजिंदर सिंह ढिल्लों और डॉ. रघवीर सिंह ने कैंप में अपनी निःशुल्क सेवाएं प्रदान कीं। इस मौके पर मनीषा, गगन भाटिया, तरसेम लाल, तानिया सहल, मीनू आदि ने भी विशेष रूप से इस कैंप को सफल बनाने में अपना योगदान दिया।