साढ़े तीन करोड़ की प्रापर्टी का मालिकाना 6.71लाख में हस्तांतरित किया
राजेंद्र सिंह जादौन
चंडीगढ़, 10सितम्बर। रिटायरमेंट से 5 दिन पहले भ्रष्टाचार मामले में फंसे हरियाणा के आई ए एस अफसर डी. सुरेश पर दर्ज एफ आई आर सामने आई है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की जांच में सामने आया कि गुरुग्राम के सेक्टर-23 स्थित हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की करीब 3.5 करोड़ रुपए बाजार कीमत वाली प्रॉपर्टी का मालिकाना हक महज 6.71 लाख रुपए में दे दिया गया। जिस प्लॉट की कन्वेयंस डीड की गई, वह डिफॉल्ट प्रॉपर्टी थी।
मामले के वक्त डी. सुरेश हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के मुख्य प्रशासक थे। करीब 7 साल चली जांच के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने उन्हें, तत्कालीन संपदा अधिकारी मुकेश कुमार समेत कुल 9 लोगों को आरोपी बनाया है। डी. सुरेश 31 अगस्त को रिटायर हुए हैं। हालांकि, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने डी. सुरेश को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने कहा है कि जांच के दौरान अगर उनकी कस्टडी की जरूरत पड़ती है तो उन्हें कम से कम 7 दिन पहले नोटिस देना होगा। मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर 2026 को होगी।
मामला
सेक्टर 23-23ए के 500.64 वर्ग गज के प्लॉट नंबर 4377 का है। हरियाणा शहरि विकास प्राधिकरण ने 1988 में इसे एसके खोसला की फर्म को 6.74 लाख रुपए में आवंटित किया था। सिर्फ 10फीसदी राशि जमा होने के बाद बकाया नहीं चुकाया गया। नोटिस के बावजूद भुगतान न होने पर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने 8 अप्रैल 2002 को आवंटन रद्द कर प्लॉट वापस ले लिया।इसके बावजूद 2003 में एसके खोसला ने जब्त प्लॉट की जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी अभय सहारण के नाम कर दी। राम निवास राठी इसमें गवाह थे। बाद में प्रॉपर्टी सतवीर सिंह मलिक को ट्रांसफर कर दी गई।
जांच में सामने आया कि खोसला का दूसरा प्लॉट नंबर 4358 अलग मामला था। उसकी पूरी रकम जमा हो चुकी थी, लेकिन रिकॉर्ड की गड़बड़ी से वह भी रद्द हुआ था। कंज्यूमर फोरम ने बाद में उसे बहाल करने का आदेश दिया।आरोप है कि अधिकारियों ने दोनों मामलों को एक जैसा दिखाया, जबकि प्लॉट नंबर 4377 डिफॉल्ट के कारण रद्द हुआ था। क्लर्क हनुमान सिंह और सहायक कृष्ण कुमार ने गलत नोट तैयार किया, जिसे संपदा अधिकारी मुकेश कुमार ने मंजूर किया। इसके आधार पर 1 मार्च 2019 को तत्कालीन हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के मुख्य प्रशासक डी. सुरेश कुमार ने प्लॉट 4377 की जब्ती निरस्त कर दी।
वर्ष 2019 में प्लॉट की कलेक्टर रेट पर कीमत करीब 1.75 करोड़ और बाजार कीमत करीब 3.5 करोड़ रुपए थी। इसके बावजूद इसकी कन्वेयंस डीड सिर्फ 6.71 लाख रुपए में की गई। इससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचने का आरोप है।मामला रिटायर्ड पुलिस अधिकारी सतेंद्र कुमार की विजिलेंस जांच में सामने आया। करीब 7 साल की जांच के बाद कार्रवाई की सिफारिश की गई।
हरियाणा के मुख्य सचिव से फरवरी 2026 में मुकदमा चलाने की मंजूरी मिलने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने 26 अगस्त 2026 को एफ आई आर दर्ज की। मामले की जांच उप अधीक्षक स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है। जांच अधिकारी के मुताबिक, साक्ष्यों के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी। जांच में अन्य अधिकारियों और बिचौलियों की भूमिका भी सामने आने पर कार्रवाई हो सकती है।
डी. सुरेश हरियाणा कैडर के 1995 बैच के आईएएस अधिकारी हैं, जिन्हें लोक प्रशासन में तीन दशकों से अधिक का अनुभव है। 12 अगस्त, 1966 को आंध्र प्रदेश में जन्मे, उन्होंने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (एमबीए) में मास्टर डिग्री प्राप्त की है।अपने पूरे करियर में, उन्होंने शहरी विकास से लेकर शिक्षा तक के जटिल विभागों का प्रबंधन किया है। आखिरी पोस्टिंग हरियाणा मत्स्य विभाग में प्रधान सचिव के रूप में रही। 31 अगस्त 2026 को रिटायर हुए।