राजेंद्र सिंह जादौन
चंडीगढ़,28 जुलाई। मुख्यमंत्री नायब सैनी की अध्यक्षता में मंगलवारकोयहां हरियाणा प्रगतिशील एमएसएमई एवं निर्यात संवर्धन नीति–2026 को मंजूरी दी गई। यह नीति सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए राज्य का अब तक का सर्वाधिक महत्वाकांक्षी नीतिगत ढांचा है। इस नीति के का लक्ष्य अगले पाँच वर्षों में विनिर्माण क्षेत्र में ₹55,000 करोड़ से अधिक के निवेश को आकर्षित करने, पाँच लाख से अधिक नए रोजगार सृजित करने तथा हरियाणा के निर्यात को दोगुना करना निर्धारित किया गया है। इसके माध्यम से हरियाणा को विनिर्माण, उद्यमिता एवं वैश्विक व्यापार के लिए भारत के सर्वाधिक प्रतिस्पर्धी राज्यों में स्थापित करने का उद्देश्य है। राज्य सरकार के संकल्प पत्र में किए गए वादों को धरातल पर उतारने, राज्य बजट 2026–27 में की गई प्रमुख घोषणाओं को क्रियान्वित करने, हरियाणा विज़न–2047 के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने तथा भारत सरकार के रेज़िंग एंड एक्सेलेरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस कार्यक्रम के साथ समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है यह व्यापक ढांचा एमएसएमई को उनकी स्थापना से लेकर विस्तार तक प्रत्येक चरण में समग्र सहयोग प्रदान करेगायह नीति हरियाणा के सभी क्षेत्रों के उद्यमों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से तैयार की गई है तथा पारंपरिक एवं उच्च-विकास क्षमता वाले प्रमुख क्षेत्रों के लिए लक्षित सहायता प्रदान करती है। इनमें ऑटोमोबाइल एवं ऑटो कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रिक वाहन, एयरोस्पेस एवं रक्षा, सामान्य इंजीनियरिंग, धातु उत्पाद एवं इस्पात निर्माण, विद्युत उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं वैज्ञानिक उपकरण, औषधि एवं चिकित्सा उपकरण, रबर एवं प्लास्टिक (खिलौने एवं खेल सामग्री सहित), फुटवियर एवं चमड़ा उत्पाद, नवीकरणीय ऊर्जा, परिपत्र अर्थव्यवस्था एवं हरित उद्योग, वस्त्र एवं परिधान, तथा कृषि आधारित, खाद्य प्रसंस्करण एवं संबद्ध उद्योग शामिल हैं। हरियाणा की सुदृढ़ कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था तथा राज्य के आर्थिक विकास में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार ने एमएसएमई नीति के पूरक के रूप में हरियाणा कृषि-व्यवसाय एवं खाद्य प्रसंस्करण नीति–2026 भी अधिसूचित की है।
एमएसएमई के समक्ष प्रारंभिक पूंजी निवेश की बाधा को दूर करने के उद्देश्य से, इस नीति के अंतर्गत नवप्रारंभ हरियाणा उद्यम विकास मिशन के माध्यम से हरियाणा आत्मनिर्भर टेक्सटाइल नीति के तहत सफलतापूर्वक लागू पूंजी निवेश सब्सिडी मॉडल का विस्तार किया गया है। पहली बार, राज्य में चिन्हित प्राथमिकता प्राप्त (थ्रस्ट) क्षेत्रों के एमएसएमई एवं निर्यातकों को राज्यव्यापी समर्पित कार्यक्रम के अंतर्गत पूंजी निवेश सब्सिडी का लाभ प्रदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, नीति में वित्तीय प्रोत्साहनों का एक व्यापक पैकेज भी शामिल किया गया है, जिसमें ब्याज अनुदान, स्टाम्प शुल्क की प्रतिपूर्ति, रोजगार सृजन हेतु प्रोत्साहन, बीमा सहायता तथा परीक्षण, स्वचालन (ऑटोमेशन), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस–एआई) एवं अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन शामिल हैं।