एमएसएमई क्षेत्र को बड़ी राहत, विकास संशोधन विधेयक 2026 संसद से पारित
Aug10,2026
| Jagrati Lahar Bureau | Ludhiana
विलंबित भुगतान के मामलों के त्वरित निपटारे, डिजिटल पंजीकरण और कारोबार सुगमता को मिलेगा बढ़ावा
लुधियाना, 10 अगस्त 2026। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को और मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार को महत्वपूर्ण सफलता मिली है।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 संसद के दोनों सदनों से पारित हो गया है। राज्यसभा ने इसे 3 अगस्त और लोकसभा ने 7 अगस्त 2026 को मंजूरी दी। यह विधेयक 2006 के एमएसएमई विकास अधिनियम में व्यापक बदलाव का मार्ग प्रशस्त करता है। (
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नए संशोधनों का उद्देश्य बदलते कारोबारी माहौल, डिजिटल तकनीक और आधुनिक व्यावसायिक जरूरतों के अनुरूप एमएसएमई क्षेत्र के कानूनी एवं नीतिगत ढांचे को मजबूत करना है। इसके साथ ही उद्यमों के औपचारिकीकरण, कारोबार करने में सुगमता, समयबद्ध भुगतान और विश्वास आधारित नियामकीय व्यवस्था को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।
उद्यम पंजीकरण को मिलेगा वैधानिक आधार
संशोधन के तहत एमएसएमई के वर्गीकरण के लिए निवेश और कारोबार (टर्नओवर) के दोहरे मानदंड को अधिनियम में शामिल किया गया है। वहीं,
उद्यम पंजीकरण पोर्टल को स्थायी, डिजिटल, निशुल्क और स्वैच्छिक पंजीकरण मंच के रूप में वैधानिक आधार देने का प्रावधान किया गया है। इससे छोटे कारोबारों के औपचारिकीकरण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। (
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विलंबित भुगतान के मामलों में तेजी
एमएसएमई क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक विलंबित भुगतान की समस्या से निपटने के लिए ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR) व्यवस्था को मजबूत किया गया है। संशोधित प्रावधानों के तहत विवादों के शीघ्र और कम लागत में समाधान पर जोर दिया गया है।
विवाद समाधान के लिए समय-सीमा भी निर्धारित की गई है। पहली उपस्थिति की निर्धारित तारीख से 90 दिनों के भीतर मध्यस्थता पूरी करने का प्रावधान है। यदि मध्यस्थता सफल नहीं होती है, तो मामले को 30 दिनों के भीतर मध्यस्थता (Arbitration) के लिए भेजा जाएगा और दलीलें पूरी होने के बाद 90 दिनों के भीतर निर्णय देने का लक्ष्य रखा गया है।
एमएसएमई बकाया वसूली की व्यवस्था मजबूत
संशोधन के तहत सुविधा परिषद, मध्यस्थता सेवा प्रदाता या अन्य वैकल्पिक विवाद समाधान संस्थाओं के माध्यम से हुए समझौते अथवा मध्यस्थता निर्णय के आधार पर एमएसएमई के बकाये की वसूली को अधिक प्रभावी बनाने का प्रावधान किया गया है। निर्धारित परिस्थितियों में बकाया राशि को भू-राजस्व के बकाये के रूप में वसूल करने की व्यवस्था की जाएगी।
TReDS से भुगतान में तेजी
केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSEs) द्वारा एमएसएमई से खरीदी गई वस्तुओं और सेवाओं से संबंधित चालानों के निपटान के लिए Trade Receivables Discounting System (TReDS) के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया गया है। इससे एमएसएमई को कार्यशील पूंजी और नकदी प्रवाह की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, TReDS के माध्यम से चालान डिस्काउंटिंग का कारोबार वित्त वर्ष 2022-23 में करीब 40 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 3.47 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
एक से अधिक MSEFC बनाने का रास्ता साफ
संशोधन के तहत राज्यों को एक से अधिक सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषद (MSEFC) स्थापित करने में सुविधा मिलेगी। इसका उद्देश्य एमएसएमई से जुड़े भुगतान विवादों का स्थानीय स्तर पर तेजी से निपटारा सुनिश्चित करना है।
छोटे कारोबारों के लिए नियमन होगा सरल
विधेयक में कुछ प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने तथा दोषसिद्धि आधारित दंड की जगह क्रमिक नागरिक दंड की व्यवस्था का प्रावधान किया गया है। गलत जानकारी देने जैसे मामलों में पहली बार चेतावनी तथा बाद के मामलों में दंड की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य अनुपालन को बढ़ावा देते हुए कारोबारियों के लिए अधिक सरल और विश्वास आधारित नियामकीय वातावरण तैयार करना है।
एमएसएमई के औपचारिकीकरण और विस्तार को मिलेगा बल
केंद्र सरकार के अनुसार, ये सुधार
विकसित भारत @2047 के लक्ष्य के अनुरूप एमएसएमई क्षेत्र के विकास, औपचारिकीकरण और विस्तार के लिए मजबूत आधार तैयार करेंगे। एमएसएमई क्षेत्र देश में रोजगार, उत्पादन, सेवाओं और आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण आधार है। (
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एमएसएमई विकास एवं सुविधा कार्यालय, लुधियाना, पंजाब और चंडीगढ़ में उद्योगों, उद्यमियों तथा औद्योगिक संगठनों के बीच इन सुधारों को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए कार्य करेगा।
एमएसएमई विकास एवं सुविधा कार्यालय, लुधियाना के संयुक्त निदेशक एवं कार्यालय प्रमुख पंकज कुमार झा, IEDS ने कहा कि संशोधन एमएसएमई के संस्थागत ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ विलंबित भुगतान विवादों के त्वरित समाधान, बेहतर तरलता और सरल नियामकीय व्यवस्था में सहायक होंगे।
वहीं, सहायक निदेशक दीपक चेची, IEDS ने कहा कि नए सुधार एमएसएमई के औपचारिकीकरण, विस्तार और कारोबार करने में सुगमता को बढ़ावा देंगे। विलंबित भुगतान से संबंधित मजबूत व्यवस्था से छोटे उद्यमों में व्यापारिक लेन-देन को लेकर विश्वास और सुरक्षा की भावना भी बढ़ेगी।
एमएसएमई विकास एवं सुविधा कार्यालय, लुधियाना ने उद्यमियों और सभी संबंधित हितधारकों से अपील की है कि वे संशोधित प्रावधानों की जानकारी प्राप्त करें और एमएसएमई क्षेत्र के विकास के लिए उपलब्ध डिजिटल एवं संस्थागत व्यवस्थाओं का अधिकतम लाभ उठाएं।
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