आई ए एस रामकुमार सिंह पंचकूला नगर निगम की बैंक जमाओ के घोटाला मामले में तीज दिन के रिमांड पर
Jun19,2026
| Rajender Singh Jadon | Chandigarh
राजेंद्र सिंह जादौन
चंडीगढ़,19जून। हरियाणा सरकार के आठ और चंडीगढ़ प्रशासन के दो विभागों से जुड़े 657करोड़ के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाला मामले में हरियाणा के करीब दस आई ए एस सीबीआई जांच के दायरे में है।इनमें से एक आई ए एस रामकुमार सिंह को सीबीआई ने गुरुवार को गिरफ्तार किया। पंचकूला की अदालत ने शुक्रवार को रामकुमार सिंह को तीन दिन की रिमांड पर सीबीआई को सौंपा हैं।रामकुमार सिंह पंचकूला नगर निगम के आयुक्त रहे है। नगर निगम की करीब 152करोड़ की राशि का घोटाला आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के जरिए किया गया।
हरियाणा सरकार ने इस घोटाला मामले में रामकुमार सिंह के अलावा आई ए एस डी के बेहरा, पंकज अग्रवाल,प्रदीप कुमार और मोहम्मद शाइन समेत सात आई ए एस के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति दी है। चंडीगढ़ के सेक्टर 32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की शाखा में नगर निगम पंचकूला के खाते से सरकारी धन की हेराफेरी से जुड़ा हुआ है। इनमें मोहम्मद शाइन के खिलाफ स्टेट विजिलेंस ने अंबाला के मनरेगा घोटाला मामले में कार्रवाई की सिफारिश की थी।सीबीआई जांच में सामने आया है कि नगर निगम पंचकूला का बैंक खाता हरियाणा सरकार के वित्त विभाग के प्रचलित दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए खोला गया था।
जांच एजेंसी के अनुसार, खाते के आवेदन फॉर्म में जानबूझकर ऐसी जानकारियां दर्ज की गईं, जिनसे बाद में किए जाने वाले फर्जी वित्तीय लेन-देन को छिपाया जा सके।जांच के दौरान यह भी पता चला कि तत्कालीन आयुक्त आर.के. सिंह ने आई डी एफ सी फर्स्ट बैंक के आरोपी अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर फिक्स्ड डिपॉजिट बनाने के नाम पर कई हस्ताक्षरित चेक बिचौलियों के माध्यम से बैंक अधिकारियों को सौंपे थे। इन चेकों के जरिए नगर निगम के खाते से धनराशि निकाल ली गई, लेकिन कोई भी फिक्स्ड डिपॉजिट नहीं बनाया गया। निकाली गई राशि को बैंक अधिकारियों द्वारा नियंत्रित शेल कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया गया।सीबीआई के अनुसार, इस पूरे घोटाले को नगर निगम पंचकूला के तत्कालीन आयुक्त और वरिष्ठ लेखाकार की जानकारी और सक्रिय भागीदारी से अंजाम दिया गया।
वरिष्ठ लेखाकार को पहले ही इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच में आर.के. सिंह की सक्रिय भूमिका सामने आने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। सीबीआई ने चंडीगढ़ और करनाल स्थित उनके आवासों पर तलाशी भी ली, जहां से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं।गौरतलब है कि हरियाणा सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने यह जांच राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से अपने हाथ में ली थी।पंचकूला नगर निगम में लगभग 79.46 करोड़ रुपये के गबन का मामला सामने आया था, जो चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित आई डी एफ सी फर्स्ट बैंक शाखा में हुए एक बड़े घोटाले का हिस्सा बताया जा रहा है।जांच के अनुसार, हरियाणा सरकार के आठ विभागों के करीब 504 करोड़ रुपये फर्जी अथवा अस्तित्वहीन फिक्स्ड डिपॉजिट और डेबिट नोट्स के माध्यम से निकालकर शेल कंपनियों में भेजे गए।इस मामले में अब तक सीबीआई 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिनमें आई डी एफ सी फर्स्ट बैंक और ए यू फाइनेंस बैंक के छह अधिकारी, हरियाणा सरकार के तीन लोक सेवक, दो कंपनियां और छह निजी व्यक्ति शामिल हैं।
सीबीआई ने चंडीगढ़ प्रशासन से जुड़े दो अन्य मामलों, चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड,नगर निगम चंडीगढ़ तथा की जांच भी अपने हाथ में ली है। इन दोनों मामलों में भी चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। क्रेस्ट मामले में एक वरिष्ठ भारतीय वन सेवा के अधिकारी की गिरफ्तारी भी हो चुकी है।सीबीआई ने कहा है कि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग में शामिल सभी दोषियों को न्याय के कटघरे तक पहुंचाने और गबन की गई राशि की पूरी कड़ी का पता लगाने के लिए जांच जारी रहेगी।
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