केंद्र सरकार ने कादियां–ब्यास रेल लाइन परियोजना को दी नई मंजूरी, माझा क्षेत्र के विकास को मिलेगी नई रफ्तार
Jun19,2026
| Tari | Qadian
1,400 करोड़ रुपये की लागत से बनेगी 39.68 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन, तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य
कादियां, 19 जून (सलाम तारी): पंजाब के मझा क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए केंद्र सरकार ने लंबे समय से लंबित कादियां–ब्यास नई रेल लाइन परियोजना को पुनः शुरू करने की घोषणा की है। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान शुरू की गई यह महत्वाकांक्षी परियोजना लगभग एक सदी बाद फिर से गति पकड़ने जा रही है। परियोजना को पूरा होने में कम से कम तीन वर्ष लगने की संभावना है।
नई दिल्ली स्थित रेल भवन में गुरुवार को मीडिया को संबोधित करते हुए केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने बताया कि 39.68 किलोमीटर लंबी इस नई रेल लाइन का निर्माण लगभग 1,400 करोड़ रुपये की लागत से उत्तरी रेलवे द्वारा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना मझा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था, धार्मिक पर्यटन और समग्र विकास को नई दिशा प्रदान करेगी।
मंत्री ने बताया कि प्रस्तावित रेल लाइन गुरदासपुर जिले के कादियां को ब्यास से जोड़ेगी तथा ढपई, घुमाण, बुटाला और सठियाला सहित कई महत्वपूर्ण कस्बों और गांवों से होकर गुजरेगी। इस परियोजना से मझा क्षेत्र के अनेक हिस्से पहली बार रेलवे नेटवर्क से जुड़ेंगे, जिससे लोगों की आवाजाही और क्षेत्रीय संपर्क में उल्लेखनीय सुधार होगा।
परियोजना के अंतर्गत आधुनिक रेलवे अवसंरचना विकसित की जाएगी, जिसमें घुमाण और बुटाला में दो क्रॉसिंग स्टेशन, 11 बड़े पुल, 121 छोटे पुल, 54 रोड अंडर ब्रिज (RUB), अत्याधुनिक सिग्नलिंग एवं दूरसंचार प्रणाली सहित अन्य आधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी।
रवनीत सिंह बिट्टू ने बताया कि कादियां–ब्यास रेल लिंक को पहली बार वर्ष 1928-29 में तत्कालीन नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे द्वारा स्वीकृति दी गई थी। वर्ष 1930 के दशक की शुरुआत में निर्माण कार्य में उल्लेखनीय प्रगति हुई थी, लेकिन बदलती प्राथमिकताओं के कारण परियोजना को रोक दिया गया। बाद में इसे वर्ष 2010-11 में सामाजिक रूप से आवश्यक रेल संपर्क कार्यक्रम के तहत रेलवे के अनुपूरक बजट में शामिल किया गया, लेकिन प्रक्रियागत देरी के कारण कार्य आगे नहीं बढ़ सका। अब संशोधित 1,400 करोड़ रुपये की लागत के साथ परियोजना को आधिकारिक रूप से पुनः मंजूरी दे दी गई है।
उन्होंने कहा कि यह रेल लाइन केवल यात्री सुविधा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अमृतसर–पठानकोट रेल खंड के लिए एक वैकल्पिक रेल कॉरिडोर के रूप में भी रणनीतिक महत्व रखेगी। आपातकालीन परिस्थितियों में यह उत्तरी भारत के रेलवे संचालन को और अधिक मजबूत बनाएगी।
मंत्री ने कहा कि इस रेल परियोजना से किसानों को अपनी कृषि उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी, व्यापार एवं छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, निर्माण और संचालन के दौरान रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे तथा मझा क्षेत्र में निवेश और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
इस रेल लाइन के शुरू होने से कई प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थलों तक पहुंच भी आसान हो जाएगी। इनमें अहमदिया मुस्लिम समुदाय का जन्मस्थान कादियां, डेरा बाबा जैमल सिंह (ब्यास), श्री दरबार साहिब (स्वर्ण मंदिर), अमृतसर, डेरा बाबा नानक, गुरुद्वारा अचल साहिब, गुरुद्वारा भगत नामदेव जी (घुमाण), गुरुद्वारा पातशाही पांचवीं, बुर्ज साहिब, पंडोरी धाम, राम शरणम मंदिर तथा शिरडी साईं मंदिर, गुरदासपुर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल शामिल हैं। बेहतर रेल संपर्क से देश और विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को काफी सुविधा मिलने की उम्मीद है।
इस बीच, भाजपा के प्रवक्ता यादविंदर सिंह बुट्टर ने परियोजना को मंजूरी मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में उन्होंने केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को कादियां–ब्यास रेल लाइन को पुनः शुरू करने की मांग को लेकर एक ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस परियोजना के शुरू होने से माझा क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी और लंबे समय से चली आ रही लोगों की मांग पूरी होगी।
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