फिल्लौर, 29 सितंबर 2026 : दीवाली और त्योहारी सीजन से ठीक पहले भारतीय शेयर बाजार में जारी गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले कई कारोबारी सत्रों से बाजार में बिकवाली का दबाव देखने को मिल रहा है। सोमवार, 28 सितंबर को सेंसेक्स में करीब 1,124 अंकों की बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह 72,771 के आसपास बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी करीब 360 अंक टूटकर 22,800 के नीचे आ गया। इस गिरावट के बाद बाजार में निवेश करने वाले छोटे और मध्यम निवेशकों के बीच बेचैनी का माहौल है।
मंगलवार, 29 सितंबर को भी बाजार में कमजोरी बनी रही। कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। दिन के अंत में सेंसेक्स लगभग 72,529 के स्तर पर और निफ्टी करीब 22,716 पर रहा। बाजार के प्रमुख सूचकांकों में सितंबर के दौरान भी उल्लेखनीय गिरावट आई है। रॉयटर्स के मुताबिक सितंबर में अब तक निफ्टी करीब 5.7 प्रतिशत नीचे है, जबकि पिछले सात सप्ताह में बेंचमार्क इंडेक्स लगभग 6 प्रतिशत तक फिसल चुका है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बढ़ाई चिंता
बाजार में गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारण बताए जा रहे हैं। इनमें विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की बिकवाली प्रमुख कारणों में शामिल है। सितंबर में विदेशी निवेशकों की भारतीय शेयरों से निकासी जारी रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सितंबर में अब तक FII करीब ₹18,531 करोड़ की शुद्ध बिकवाली कर चुके हैं। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने इसी अवधि में लगभग ₹52,617 करोड़ का निवेश किया है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली के पीछे अमेरिका में बॉन्ड यील्ड का बढ़ना भी एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5.27 प्रतिशत के आसपास पहुंच गई, जिससे वैश्विक निवेशकों के लिए अमेरिकी परिसंपत्तियां अपेक्षाकृत आकर्षक हुई हैं। इसका असर उभरते बाजारों, जिसमें भारत भी शामिल है, पर पड़ा है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई मुश्किल
शेयर बाजार पर दबाव बढ़ाने वाला एक अन्य बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड करीब 105-107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल महंगा होने से आयात बिल, महंगाई और कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।
सोमवार की तेज गिरावट में बाजार पूंजीकरण में लगभग ₹8 लाख करोड़ तक की कमी की खबर सामने आई। इससे निवेशकों में डर और बढ़ा। बैंकिंग, आईटी, ऑटो, एफएमसीजी और अन्य कई क्षेत्रों के शेयरों में भी दबाव देखने को मिला।
दीवाली से पहले निवेशकों की नजर सरकार पर
त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ ही शेयर बाजार में आम निवेशकों को सकारात्मक माहौल की उम्मीद रहती है। दीवाली के आसपास बाजार में विशेष कारोबारी गतिविधियां देखने को मिलती हैं और बड़ी संख्या में खुदरा निवेशक भी निवेश संबंधी फैसले लेते हैं। ऐसे समय में लगातार गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
इसी बीच एडवोकेट चेतन चौधरी ने सरकार से शेयर बाजार और निवेशकों के हित में कदम उठाने की मांग की है। चौधरी के अनुसार बाजार में निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए सरकार को टैक्स व्यवस्था की समीक्षा करने तथा निवेशकों पर पड़ने वाले कर संबंधी बोझ को कम करने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को बाजार की मौजूदा स्थिति को गंभीरता से लेते हुए ऐसे कदमों पर विचार करना चाहिए, जिससे घरेलू और विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत हो तथा शेयर बाजार को स्थिरता मिल सके।
उनका कहना है कि दीवाली जैसे बड़े त्योहारी पर्व से पहले बाजार में सकारात्मक माहौल रहना आम निवेशकों के मनोबल के लिए भी महत्वपूर्ण है। टैक्स में राहत या टैक्स व्यवस्था को अधिक निवेशक-अनुकूल बनाने से निवेशकों के बीच भरोसा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा गिरावट को केवल टैक्स से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, पश्चिम एशिया की स्थिति, रुपये में कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसे कई वैश्विक कारक इस समय भारतीय बाजार को प्रभावित कर रहे हैं।
छोटे निवेशकों पर सबसे ज्यादा असर
लगातार गिरते बाजार का सबसे सीधा असर छोटे निवेशकों के पोर्टफोलियो पर पड़ रहा है। जिन लोगों ने हाल के महीनों में ऊंचे स्तरों पर शेयर या इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश किया था, वे अब अपने निवेश का मूल्य कम होता देख रहे हैं। कई निवेशकों के लिए दीवाली से पहले बाजार की यह गिरावट चिंता का विषय बन गई है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में उतार-चढ़ाव शेयर निवेश का हिस्सा है और किसी भी गिरावट के दौरान घबराकर निर्णय लेने के बजाय निवेशकों को अपनी निवेश अवधि, जोखिम क्षमता और संबंधित कंपनियों के बुनियादी प्रदर्शन को ध्यान में रखना चाहिए।
फिलहाल बाजार की नजर आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बॉन्ड यील्ड, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और पश्चिम एशिया से जुड़ी परिस्थितियों पर बनी रहेगी। इन मोर्चों पर सुधार आने पर बाजार के माहौल में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
दीवाली से पहले बाजार में आई यह गिरावट निवेशकों के लिए चिंता का विषय जरूर बनी हुई है, लेकिन बाजार की अगली दिशा कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारकों पर निर्भर करेगी। ऐसे में सरकार की ओर से टैक्स और निवेश संबंधी नीतियों पर किसी संभावित कदम को लेकर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है।