बिहार फाउंडेशन के पंजाब एवं चंडीगढ़ चैप्टर ने बिहार सरकार द्वारा राज्य के बाहर और विदेशों में कार्यरत असंगठित क्षेत्र के प्रवासी मजदूरों के लिए संचालित "बिहार राज्य प्रवासी मजदूर दुर्घटना अनुदान योजना" में किए गए जनोन्मुखी बदलावों की सराहना करते हुए इसे श्रमिक कल्याण की दिशा में एक मील का पत्थर बताया है।
बिहार फाउंडेशन के पंजाब एवं चंडीगढ़ चैप्टर के चेयरमैन डॉ. रूपेश कुमार सिंह ने इस पहल के लिए बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उद्योग मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल और राज्य सरकार के उद्योग सचिव कुंदन कुमार को धन्यवाद देते हुए योजना के प्रावधानों का स्वागत किया और कहा कि बिहार सरकार की ये योजना अन्य राज्यों और विदेशों में कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे बिहार के लाखों श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा कवच प्रदान करती है। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बिहार फाउंडेशन के चेयरमैन भी हैं।
बिहार सरकार की इस कल्याणकारी योजना के अंतर्गत राज्य के वे मूल निवासी मजदूर पात्र हैं, जिनकी आयु 18 से 65 वर्ष के बीच है और जो अन्य राज्यों या विदेशों में असंगठित क्षेत्र में कार्यरत हैं । योजना के तहत दुर्घटना में मृत्यु होने पर आश्रितों को 4,00,000 रुपये की सहायता राशि दी जाती है । वहीं, दो आँख या दो अंग खोने जैसी पूर्ण स्थायी अपंगता की स्थिति में 1,00,000 रुपये और एक आँख या एक अंग के क्षय जैसी स्थायी आंशिक अपंगता की स्थिति में 50,000 रुपये के अनुदान का प्रावधान है।
यदि राज्य के बाहर किसी प्रवासी श्रमिक की दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है, तो उनके पार्थिव शरीर को पैतृक आवास तक पहुँचाने का संपूर्ण व्यय भी बिहार सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। इस योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक श्रमिक या उनके आश्रित
https://serviceonline.bihar.gov.in/ पोर्टल के माध्यम से पूरी तरह ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, जिसका निष्पादन आवेदन की तिथि से 44 दिनों के भीतर करने का लक्ष्य रखा गया है।
बिहार फाउंडेशन के पंजाब एवं चंडीगढ़ चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. रूपेश कुमार सिंह ने कहा, "बिहार सरकार का यह कदम अत्यंत सराहनीय और मानवीय है। पंजाब और चंडीगढ़ जैसे क्षेत्रों में बिहार के बड़ी संख्या में भाई-बहन निर्माण, कृषि और अन्य असंगठित क्षेत्रों में योगदान दे रहे हैं। कार्य के दौरान होने वाली अनहोनी की स्थिति में यह योजना न केवल आर्थिक संबल प्रदान करती है, बल्कि यह अहसास भी दिलाती है कि राज्य सरकार अपने नागरिकों के साथ हर परिस्थिति में खड़ी है।"
उन्होंने कहा, "विशेष रूप से, पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक घर पहुँचाने का खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाना एक अत्यंत संवेदनशील निर्णय है। हम पंजाब और चंडीगढ़ में रहने वाले सभी बिहारी प्रवासी श्रमिकों से अपील करते हैं कि वे इस योजना के बारे में जागरूक बनें और आवश्यकता पड़ने पर ऑनलाइन माध्यम का लाभ उठाएं। बिहार फाउंडेशन श्रमिकों की सहायता के लिए सदैव तत्पर है।"