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जिले के गांव छाजला के 33 वर्षीय मुक्केबाज गुरप्रीत सिंह ने इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित ('इसका ) अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग व किक बॉक्सिंग चैंपियनशिप' में दोहरे रजत पदक (सिल्वर मेडल) जीतकर इलाके का नाम रोशन किया है। 26 जून से 29 जून तक चली इस प्रतियोगिता में गुरप्रीत ने बॉक्सिंग और किक बॉक्सिंग दोनों स्पर्धाओं में यह सफलता हासिल की। गांव लौटने पर ग्राम पंचायत और स्थानीय निवासियों द्वारा उनका भव्य स्वागत किया गया।
गुरप्रीत सिंह की यह उपलब्धि बेहद संघर्षपूर्ण रही है। 17 वर्ष की आयु से बॉक्सिंग कर रहे गुरप्रीत को पूर्व में नेशनल स्तर पर कथित भेदभाव के कारण खेल छोड़ना पड़ा था, जिसके बाद वे डिप्रेशन और नशे की गिरफ्त में आ गए थे। पिछले वर्ष दिवाली के बाद उनकी माता अमरजीत कौर के निधन ने उन्हें गहरा झटका दिया। अपनी दिवंगत माता के सपने को पूरा करने के लिए गुरप्रीत ने नशे का पूर्ण रूप से त्याग किया और 9 महीने की कड़ी मेहनत के बाद इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर वापसी की।
इंडोनेशिया रवाना होने से ठीक पहले गुरप्रीत गंभीर रूप से अस्वस्थ थे और उनका सीआरपी लेवल काफी बढ़ा हुआ था। डॉक्टरों द्वारा खेलने से मना किए जाने के बावजूद उन्होंने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए सिंगापुर और मलेशिया के खिलाड़ियों को पराजित कर फाइनल में जगह बनाई।
गांव की सरपंच कर्मजीत कौर के पति जगतार सिंह और गणमान्य व्यक्तियों ने गुरप्रीत की इस कामयाबी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने न केवल गांव बल्कि पूरे जिले का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने युवाओं से गुरप्रीत के जीवन से प्रेरणा लेने और नशे से दूर रहकर खेल क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया।