भगवंत मान कैबिनेट ने शपथ रोकने की मांग को लेकर प्रस्ताव पारित किया था
भगवंत मान सरकार को नियुक्ति के लिए राय न लेने पर है आपत्ति
मुख्यमंत्री भगवंत मान शपथ ग्रहण समारोह में शामिक नहीं हुए
राजेंद्र सिंह जादौन
चंडीगढ़ 7 सितम्बर । पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस नियुक्त किए गए जस्टिस अश्विनी मिश्रा ने सोमवार को विवाद के बीच पद की शपथ ले ली।पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने जस्टिस मिश्रा को शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण की रस्म की पूर्व संध्या रविवार शाम पंजाब की भगवंत मान कैबिनेट ने अर्जेंट बैठक में प्रस्ताव पारित कर जस्टिस मिश्रा की शपथ रोकने की मांग की थी।भगवंत मान सरकार की आपत्ति थी कि चीफ जस्टिस की नियुक्ति के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसकी राय नहीं ली गई।यह संघीय ढांचे के भावना के विपरीत है। इस आपत्ति के चलते पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हुए।
इससे पहले पंजाब और हरियाणा हाइकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस रहे जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को हाल में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर पूर्ण कालिक चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया था।जस्टिस मिश्रा की इस नियुक्ति पर भगवंत मान सरकार ने उसकी राय न लेने का आरोप लगाते हुए कहा था कि नियुक्ति प्रक्रिया को दरकिनार किया गया है।
सोमवार को चीफ जस्टिस मिश्रा को पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने शपथ दिलाई। समारोह में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मौजूद रहे, जबकि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान शामिल नहीं हुए।जस्टिस मिश्रा को चीफ जस्टिस नियुक्त करने की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 6 अगस्त को की थी। इसके करीब एक महीने बाद उनकी नियुक्ति हुई। नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर पंजाब सरकार और केंद्र के बीच विवाद भी सामने आया था। पंजाब सरकार की ओर से कहा गया था कि राज्य के विचार लिए बिना नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
चीफ जस्टिस के रूप में जस्टिस मिश्रा के सामने न्यायिक मामलों के जल्द निपटारे के साथ-साथ जनहित और पर्यावरण से जुड़े मामलों पर भी विशेष ध्यान देने की चुनौती रहेगी। हाईकोर्ट में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहते हुए वह अवैध खनन, पर्यावरण संरक्षण, सेवा कानून और संवैधानिक मामलों की सुनवाई कर चुके हैं।
जस्टिस मिश्रा का जन्म 16 नवंबर 1968 को हुआ। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज से अर्थशास्त्र में बीए ऑनर्स और कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की। वर्ष 1993 में वकालत शुरू करने के बाद उन्होंने मुख्य रूप से दीवानी, संवैधानिक और सेवा मामलों में पैरवी की। वर्ष 2014 में वह इलाहाबाद हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश बने और 2016 में स्थायी न्यायाधीश नियुक्त हुए। जुलाई 2025 में उनका तबादला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट कर दिया गया।