पंजाब और राजस्थान में एक साल के भीतर लाखों एकड़ घटा कपास का रकबाः रंधावा
Aug24,2026
| Jagrati Lahar Bureau | Chandigarh
'सफेद सोना' (कपास) उगाने वाला किसान खून के आंसू रोने को मजबूर, न बीमा और न सुरक्षित बाजार
केंद्र सरकार जवाब दे, आखिर किसान हितैषी नीतियों का लाभ क्यों नहीं पहुंच रहा किसानों तक
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, सांसद और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने केंद्र की मोदी सरकार पर किसानों के साथ दोहरी नाइंसाफी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ पिछले दो वर्षों में 73 लाख (29.6%) किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना छोड़ दी, वहीं दूसरी तरफ उत्तर भारत की पहचान रही कपास की खेती एक साल में 23 प्रतिशत तक सिमट गई। उन्होंने कहा कि ये दोनों आंकड़े बताते हैं कि केंद्र की कृषि नीतियां किसानों का भरोसा जीतने में पूरी तरह विफल रही हैं।
उन्होंने कहा कि जब लाखों किसान बीमा योजना छोड़ रहे हैं और 'सफेद सोना' उगाने वाले किसान खेती छोड़ने को मजबूर हैं, तब केंद्र सरकार को जवाब देना होगा कि आखिर उसकी किसान हितैषी नीतियों का लाभ किसानों तक क्यों नहीं पहुंच रहा।
रंधावा ने कहा कि फसल बीमा योजना की सबसे बड़ी कमी यह है कि नुकसान किसान के व्यक्तिगत खेत में होता है, लेकिन मुआवजा पूरे इलाके की औसत उपज के आधार पर तय किया जाता है। अगर किसी किसान की फसल ओलावृष्टि, बाढ़ या कीटों के हमले से पूरी तरह बर्बाद हो जाए और सैटेलाइट सर्वे में पूरे क्षेत्र का औसत नुकसान कम दर्ज हो, तो उस किसान को उसके वास्तविक नुकसान के अनुरूप मुआवजा नहीं मिलता। यही कारण है कि लाखों किसानों का इस योजना से विश्वास उठ चुका है।
उन्होंने कहा कि किसानों की शिकायतें केवल कम क्लेम तक सीमित नहीं हैं। कई मामलों में समय पर सर्वे नहीं हुआ, दोबारा सर्वे नहीं किया गया और मुआवजे की लंबी प्रक्रिया ने किसानों को निराश कर दिया। प्रीमियम समय पर वसूला जाता है, लेकिन राहत के समय किसान को कागजी प्रक्रियाओं में उलझा दिया जाता है। ऐसे उलझाया जाता है कि वह मुआवजे की आस ही छोड़ देते हैं।
रंधावा ने कहा कि इससे भी अधिक चिंताजनक स्थिति कपास की खेती की है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में एक साल के भीतर करीब 6.77 लाख एकड़ कपास का रकबा घट गया और सबसे बड़ा झटका पंजाब को लगा। कभी 'सफेद सोना' कहलाने वाली कपास आज किसानों के लिए घाटे और अनिश्चितता की फसल बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि लगातार कीटों के हमले, बढ़ती लागत, घटती पैदावार और बाज़ार की अस्थिरता ने किसानों को कपास छोड़ने पर मजबूर कर दिया है।
रंधावा ने केंद्र सरकार से मांग की कि फसल बीमा योजना में औसत उपज की व्यवस्था खत्म कर खेत स्तर पर वास्तविक नुकसान का आकलन किया जाए, 100 प्रतिशत नुकसान पर पूरा मुआवजा दिया जाए, कपास उत्पादकों के लिए प्रभावी सरकारी खरीद और मजबूत बाज़ार व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा किसानों की आय और फसल सुरक्षा के लिए ठोस नीति लागू की जाए।
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