पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस में बढ़ती अंदरूनी खींचतान को शांत करने के लिए हाईकमान ने डैमेज कंट्रोल तेज कर दिया है। पार्टी के पंजाब प्रभारी और छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल चंडीगढ़ पहुंचे थे और करीब सात दिनों तक नेताओं से अलग-अलग बैठकें करते रहे हैं।
*चन्नी गुट से मुलाकात के बाद क्या बोले बघेल?*
बघेल ने सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक नेताओं से मुलाकात की। बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, _"मैं सभी के पक्षों को हाईकमान तक पहुंचाऊंगा"_। पंजाब कांग्रेस में "ऑल इज वेल" है और अनुशासन सबसे ऊपर है, इस बात पर भी उन्होंने जोर दिया।
बघेल ने साफ किया कि चुनाव राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नेताओं को अपने मुद्दे पार्टी फोरम पर ही रखने चाहिए।
बैठक के बाद बघेल रिपोर्ट लेकर वापस दिल्ली रवाना हो गए हैं। राहुल गांधी के विदेश से लौटने से पहले यह विस्तृत रिपोर्ट पार्टी अध्यक्ष खड़गे और राहुल गांधी को सौंपी जाएगी।
*सुखजिंदर रंधावा का दो टूक बयान*
इस बीच गुरदासपुर से सांसद और पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने सख्त लहजा अपनाया। उन्होंने कहा, _"हमें कम्प्रोमाइज़ नेता नहीं चाहिए"_। रंधावा ने इशारों में कहा कि पार्टी को ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो मजबूती से चुनाव लड़े, न कि समझौता करने वाला हो।
*बैठक में और क्या हुआ?*
1. *2027 का रोडमैप*: बघेल ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी की बैठक में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, आपसी समन्वय बढ़ाने और चुनावी रणनीति पर चर्चा की। घोषणापत्र समिति और चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष भी मौजूद रहे।
2. *चन्नी की नाराजगी*: सूत्रों के मुताबिक चुनाव समिति के गठन के बाद चन्नी और उनके समर्थक नाराज थे। चन्नी ने पहले कहा था कि पार्टी में दलितों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा। इसी को लेकर बघेल ने उनसे सीधे बात की।
3. *नेतृत्व बदलाव पर जोर *: चर्चा थी कि मीटिंग में प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग को बदलने पर जोर रहा है। हालाँकि बघेल ने कहा था कि फिलहाल संगठन में कोई बदलाव नहीं होगा।
*हाईकमान का फोकस: एकजुटता और अनुशासन*
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी नेताओं को हिदायत दी कि सार्वजनिक बयानबाजी से दूर रहें और ग्रुपिज्म बर्दाश्त नहीं होगा। पार्टी का जोर अब संगठन को एकजुट करके 2027 में सत्ता में वापसी पर है।
बघेल ने X पर पोस्ट करके कहा कि पंजाब प्रभारी के नाते उनका मकसद सभी कमेटियों के साथ मिलकर एक्शन प्लान बनाना और कांग्रेस का संदेश हर गांव-शहर तक पहुंचाना है।
*निष्कर्ष*: चन्नी गुट से बातचीत के बाद भूपेश बघेल ने "सब ठीक है" का संदेश देने की कोशिश की, लेकिन रंधावा जैसे वरिष्ठ नेताओं के बयान से साफ है कि अंदरूनी मतभेद अभी खत्म नहीं हुए हैं। अब सबकी नजरें बघेल की हाईकमान को सौंपी जाने वाली रिपोर्ट व निर्णय पर टिकी हैं।