₹81.54 करोड़ के डीप क्लीनिंग टेंडर पर घमासान, कांग्रेस पार्षदों का मेयर हाउस के बाहर धरना
Oct7,2026
| Jagrati Lahar Bureau | Ludhiana
₹81.54 करोड़ के डीप क्लीनिंग टेंडर पर घमासान, कांग्रेस पार्षदों का मेयर हाउस के बाहर धरना
एफएंडसीसी में खारिज प्रस्ताव को दोबारा मंजूरी दिलाने के प्रयास का आरोप; तकनीकी राय और बजट प्रावधान पर भी उठे सवाल
लुधियाना। लुधियाना नगर निगम में डीप क्लीनिंग, मैकेनिकल स्वीपिंग और रोड वॉशिंग से जुड़े ₹81.54 करोड़ के टेंडर (मत्ता नंबर-11) को लेकर विवाद गहरा गया है। टेंडर को लेकर कांग्रेस के पार्षदों ने बुधवार को मेयर के सरकारी आवास के बाहर धरना दिया। पार्षदों ने आरोप लगाया कि नगर निगम पर इतना बड़ा वित्तीय बोझ डालने की तैयारी की जा रही है, जबकि इस राशि के लिए मौजूदा बजट में पर्याप्त प्रावधान नहीं है।
मामले को लेकर एफएंडसीसी के एक सदस्य ने नगर निगम कमिश्नर को लिखित शिकायत देकर टेंडर पर गंभीर वित्तीय और तकनीकी सवाल उठाए हैं। पत्र में मत्ता नंबर-11 को तत्काल रद्द करने की मांग की गई है।
6 अक्टूबर को खारिज हुआ था प्रस्ताव
एफएंडसीसी की 6 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक में वित्तीय और तकनीकी आपत्तियों के चलते डीप क्लीनिंग एवं रोड वॉशिंग से संबंधित मत्ता नंबर-11 को खारिज किए जाने का दावा किया गया है। आरोप है कि इसके बाद रात करीब 9:15 बजे सप्लीमेंट्री एजेंडा जारी किया गया और अगले दिन 7 अक्टूबर को दोपहर 2:30 बजे मेयर हाउस में बैठक बुलाकर इसी प्रस्ताव को दोबारा मंजूरी दिलाने का प्रयास किया गया।
कांग्रेस पार्षदों का कहना है कि खारिज किए जा चुके प्रस्ताव को दोबारा एजेंडे में लाने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं।
₹81.54 करोड़ के खर्च पर वित्तीय सवाल
एफएंडसीसी सदस्य की आपत्तियों के मुताबिक, प्रस्तावित परियोजना से नगर निगम पर करीब ₹81.54 करोड़ का वित्तीय भार पड़ेगा। सवाल यह उठाया गया है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष के बजट में इतनी बड़ी राशि के लिए क्या पर्याप्त और स्पष्ट प्रावधान मौजूद है।
पार्षदों ने मांग की है कि इतने बड़े खर्च से पहले इसकी वित्तीय व्यवहार्यता, मौजूदा संसाधनों और नगर निगम की प्राथमिकताओं की विस्तृत समीक्षा की जाए।
थापर यूनिवर्सिटी की तकनीकी राय भी बनी मुद्दा
टेंडर से जुड़ा एक अहम मुद्दा थापर यूनिवर्सिटी से ली गई तकनीकी राय को लेकर सामने आया है। आरोप है कि यूनिवर्सिटी ने सड़कों को बार-बार पानी से धोने से सड़क की सतह को संभावित नुकसान पहुंचने की चेतावनी दी थी।
एफएंडसीसी सदस्य का आरोप है कि इस तकनीकी राय को प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लेते समय पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।
पुरानी मशीनों का हिसाब किए बिना नए टेंडर पर सवाल
विवाद का एक अन्य पहलू नगर निगम के पास पहले से उपलब्ध मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनों से जुड़ा है। आरोप है कि नई व्यवस्था पर करोड़ों रुपये खर्च करने से पहले मौजूदा मशीनों की क्षमता, उनकी स्थिति, रखरखाव लागत और प्रति किलोमीटर सफाई के खर्च का विस्तृत आकलन नहीं किया गया।
पार्षदों ने सवाल उठाया कि जब निगम के पास पहले से मशीनरी और मौजूदा व्यवस्था मौजूद है, तो नई परियोजना पर इतना बड़ा खर्च करने की जरूरत और आर्थिक औचित्य क्या है।
697 किलोमीटर सड़कों की सफाई पर 81 करोड़ से ज्यादा खर्च?
प्रस्ताव के मुताबिक करीब 697 किलोमीटर सड़कों की सफाई और रोड वॉशिंग पर भारी रकम खर्च की जानी है। दूसरी ओर, शहर में 24×7 वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट के चलते कई स्थानों पर सड़कें खुदी और क्षतिग्रस्त हैं।
कांग्रेस पार्षदों का कहना है कि ऐसे समय में सड़क मरम्मत जैसी जरूरतों को प्राथमिकता दिए जाने की जरूरत है। उनका सवाल है कि पहले से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के बजाय रोड वॉशिंग पर इतना बड़ा खर्च करना कितना उचित है।
टेंडर रद्द करने की मांग
पूरे मामले में कांग्रेस पार्षदों ने टेंडर की प्रक्रिया, वित्तीय प्रावधान, तकनीकी राय और नगर निगम की मौजूदा मशीनरी की उपयोगिता की दोबारा समीक्षा की मांग की है। एफएंडसीसी सदस्य ने भी कमिश्नर को पत्र देकर मत्ता नंबर-11 को रद्द करने और पूरे प्रस्ताव की पुनः जांच की मांग की है।
अब विवाद का केंद्र यह है कि ₹81.54 करोड़ की इस परियोजना को आगे बढ़ाया जाता है या उठाई गई वित्तीय एवं तकनीकी आपत्तियों के बाद प्रस्ताव पर पुनर्विचार किया जाता है।
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