राजेंद्र सिंह जादौन
चंडीगढ़ 24 अक्टूबर । हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि लोकतंत्र में हर राजनीतिक दल को अपनी बात रखने का अधिकार है और सरकार इसका सम्मान करती है। लेकिन नवंबर 1984 में दिल्ली में हुई सिख विरोधी हिंसा को याद करते समय संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि 1984 की हिंसा केवल इतिहास की एक तारीख नहीं, बल्कि देश की स्मृति में दर्ज ऐसा दर्द है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस दिन सिख समाज अपने शहीदों को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि देता है, उस दिन कांग्रेस द्वारा मंच सजाकर नारे लगाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि 1984 की हिंसा को लेकर सरकार की भावना राजनीतिक नहीं, बल्कि संवेदना और कर्तव्य से जुड़ी है।
नायब सैनी ने कहा कि 1984 की हिंसा के दौरान हरियाणा में भी कई परिवारों को गहरा नुकसान उठाना पड़ा था। प्रदेश में इस हिंसा के कारण 121 लोगों की जान गई थी। उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार इन 121 पीड़ित परिवारों के सदस्यों को सरकारी नौकरी देगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंसा से प्रभावित परिवारों के प्रति सरकार की जिम्मेदारी है और उन्हें न्याय दिलाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर कांग्रेस को घेरते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कोई नई प्रक्रिया नहीं है। उनके अनुसार, पहले भी कई बार एसआईआर हुआ है और इनमें से ज्यादातर प्रक्रिया कांग्रेस के शासनकाल में पूरी की गई थीं।उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस के शासनकाल में यही प्रक्रिया मतदाता सूची में सुधार का काम करती थी, तो आज इसे वोट चोरी कैसे कहा जा सकता है? उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह दोहरा रवैया स्वीकार नहीं किया जा सकता।
नायब सैनी ने कहा कि निष्पक्ष चुनाव के लिए मतदाता सूची का साफ और सही होना जरूरी है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जिनके शासनकाल में बूथ लूटने की घटनाएं होती थीं, वे आज लोकतंत्र की रक्षा करने की बात कर रहे हैं।मुख्यमंत्री ने सरदार त्रिलोचन सिंह के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल विपक्ष की ओर से लगाया गया आरोप नहीं है, बल्कि कांग्रेस के अपने ही खेमे से सामने आई गवाही है। उन्होंने कहा कि 1984 की हिंसा के मामले में कांग्रेस को अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।