*पहली बार एनएचआरसी ने तीर्थ यात्रियों वाली सुपर डीलक्स बसों की चेकिंग की है: अरविंद केजरीवाल*
*क्या एनएचआरसी ने पहले कभी किसी अन्य राज्य की रोडवेज बसों की चेकिंग की है? अरविंद केजरीवाल*
*एनएचआरसी का नाम 'मानवाधिकार आयोग' से बदलकर 'भाजपा अधिकार आयोग' रख देना चाहिए: मनीष सिसोदिया*
*चंडीगढ़, 24 अक्टूबर*
पंजाब सरकार की 'मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा' योजना के तहत बुजुर्ग तीर्थ यात्रियों को ले जाने वाली सुपर डीलक्स बसों की राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) द्वारा चेकिंग किए जाने के बाद, आम आदमी पार्टी (आप) ने नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। 'आप' के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि यह कोशिश भगवंत मान सरकार द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के लिए चलाई जा रही योजना को रोकने के लिए की गई है। उन्होंने सवाल किया कि एनएचआरसी ने पहली बार तीर्थ बसों की चेकिंग क्यों की और क्या इसने पहले कभी किसी अन्य राज्य की रोडवेज बसों की इस तरह की चेकिंग की है?
'आप' के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 'एक्स' (X) पर लिखा, "देश की सबसे बड़ी मानवाधिकार संस्था, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने अपने इतिहास में पहली बार बसों की चेकिंग की है। कौन सी बसें? वे सुपर डीलक्स बसें जो पंजाब के लोगों को 'तीर्थ यात्रा' पर ले जा रही हैं।"
उन्होंने आगे लिखा, "इन्हें इसमें क्या कमियां मिलीं? ऐसे सवाल उठाए गए कि ड्राइवर और सवारियों के बीच बंटवारा (पार्टीशन) क्यों है। क्या एनएचआरसी ने उत्तर प्रदेश रोडवेज की बसों की चेकिंग की? नहीं। क्या एनएचआरसी ने किसी अन्य राज्य के रोडवेज द्वारा चलाई जा रही बसों की चेकिंग की? नहीं। इसने सिर्फ पंजाब से श्रद्धालुओं को ले जाने वाली सुपर डीलक्स बसों की ही चेकिंग की।"
'आप' सुप्रीमो ने पूछा, "प्रधानमंत्री मोदी जी, आप बुजुर्गों को तीर्थ यात्रा पर जाने से रोकने के लिए इतने उतावले क्यों हैं? आप बुजुर्गों की बददुआएं क्यों लेना चाहते हैं? आपको बहुत बड़ा पाप लगेगा। सभी पंजाबी आपको बददुआएं देंगे।"
इस बीच, 'आप' के वरिष्ठ नेता और पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने भी तीर्थ यात्रा के लिए इस्तेमाल की जा रही सुपर डीलक्स बसों की एनएचआरसी द्वारा की गई चेकिंग की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, "तिरंगा फहराने के लिए 'जेन-ज़ी' (युवाओं) को जेलों में डाल दिया गया, लेकिन मानवाधिकार आयोग चुप बैठा रहा। छात्रों पर पैलेट गन चलाई गईं, फिर भी आयोग की चुप्पी बरकरार रही।"
उन्होंने आगे कहा, "जब कॉलेज परिसरों में महिलाओं के साथ उत्पीड़न हुआ, तो आयोग कहीं नजर नहीं आया। गैर-कानूनी हिरासत के मामलों में भी आयोग को मानवाधिकारों की कोई परवाह नहीं दिखी। लेकिन जब यह खबर आई कि पंजाब की एक बस में एयर कंडीशनर काम नहीं कर रहा था, तो आयोग लालटेन लेकर निकल पड़ा कि कौन सी बस ठंडी हवा नहीं दे रही है।"
मनीष सिसोदिया ने कहा, "जब किसी को गोली मारी जाती है तो चुप्पी रहती है, लेकिन जब किसी को गर्मी लगती है तो जांच शुरू हो जाती है। आप आयोग का नाम 'मानवाधिकार आयोग' से बदलकर 'भाजपा अधिकार आयोग' ही कर दें।"
पंजाब में 'मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना' के तहत भगवंत मान सरकार राज्य के बुजुर्ग निवासियों के लिए श्री अमृतसर साहिब, श्री आनंदपुर साहिब, श्री कीरतपुर साहिब, माता नैना देवी मंदिर, हरिद्वार-ऋषिकेश, मथुरा-वृंदावन, सालासर बालाजी धाम और श्री खाटू श्याम जी की यात्रा की सुविधा दे रही है।
यह पूरी तीर्थ यात्रा बिल्कुल मुफ्त है। सरकार बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए सभी जरूरी इंतजाम करती है और पूरा खर्च खुद उठाती है। 14 अक्टूबर तक भगवंत मान सरकार लगभग 7 लाख बुजुर्गों को तीर्थ यात्रा करवा चुकी है। इनमें से 5.5 लाख श्रद्धालु अमृतसर, वाघा बॉर्डर, रामतीर्थ और श्री दुर्ग्याणा मंदिर के दर्शन कर चुके हैं। इसके अलावा 1 लाख श्रद्धालु श्री आनंदपुर साहिब गए, जबकि 15,000 श्रद्धालु मथुरा, 15,000 खाटू श्याम और 15,000 हरिद्वार-ऋषिकेश की यात्रा कर चुके हैं।
'आप' ने एनएचआरसी पर निशाना साधते हुए पूछा, "राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग कब से रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (आरटीओ) बन गया? भारत की प्रमुख मानवाधिकार संस्था को बसों के दरवाजों की जांच करने और बुजुर्ग श्रद्धालुओं को उनकी यात्रा करने से रोकने के लिए हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना, भाजपा की बदले की राजनीति का एक शर्मनाक रूप है। भाजपा की यह बौखलाहट बेहद शर्मनाक है।"