‘राज़ की बात’ और ‘महामानव’ के प्रकाशन के साथ हिंदी में प्रकाशित पुस्तकों की संख्या दस हुई
लुधियाना, 7 सितंबर 2026: शहर निवासी पत्रकार एवं लेखक मनोज धीमान ने अपनी साहित्यिक यात्रा में दो और हिंदी फिक्शन पुस्तकों का इजाफा किया है। उनकी नई पुस्तकें ‘राज की बात’ लघुकथा संग्रह और ‘महामानव’ उपन्यास हैं। इन दोनों पुस्तकों के प्रकाशन के साथ धीमान की हिंदी में प्रकाशित पुस्तकों की संख्या दस हो गई है।
गुरु नानक देव विश्वविद्यालय अमृतसर के हिंदी विभागाध्यक्ष एवं भाषा संकाय के डीन प्रो. (डॉ.) सुनील ने दोनों पुस्तकों की भूमिका लिखी है।
‘राज की बात’ में राजनीति भ्रष्टाचार मानवीय संबंधों तथा समकालीन सामाजिक मुद्दों सहित विभिन्न विषयों पर केंद्रित हिंदी लघुकथाएं शामिल हैं। वहीं ‘महामानव’ तकनीक आधारित उपन्यास है जो ह्यूमनॉइड की अवधारणा पर केंद्रित है। यह मानव जीवन और तकनीक के बदलते संबंधों की पड़ताल करने वाली धीमान की दूसरी साहित्यिक कृति है। इससे पहले उनका तकनीक आधारित उपन्यास ‘धरती पर लौटे आभासी दुनिया के अवतार’ वर्ष 2025 में प्रकाशित हुआ था।
दोनों पुस्तकों का प्रकाशन न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन नई दिल्ली द्वारा किया गया है। धीमान ने दोनों पुस्तकों को अपने दिवंगत पिता एच.आर. धीमान की स्मृति को समर्पित किया है जो पत्रकार थे और जिन्होंने उनके लेखन के प्रति शुरुआती रुचि को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अपनी नई पुस्तकों के बारे में मनोज धीमान ने कहा “मेरे लिए लेखन अवलोकन चिंतन और खोज की निरंतर यात्रा है। अपनी कहानियों के माध्यम से मैं समकालीन समाज और मानवीय संबंधों को समझने का प्रयास करता हूं जबकि मेरे उपन्यास मुझे मनुष्य और तकनीक के बीच बदलते संबंधों को तलाशने का अवसर देते हैं। मैं विशेष रूप से खुश हूं कि ‘राज की बात’ और ‘महामानव’ ने मुझे अपनी रचनात्मक यात्रा के दो अलग-अलग आयाम प्रस्तुत करने का अवसर दिया है।”
धीमान की साहित्यिक यात्रा वर्ष 2007 में प्रकाशित लघुकथा संग्रह ‘लेट नाइट पार्टी’ से शुरू हुई। इस पुस्तक का विमोचन लुधियाना में पूर्व सीबीआई निदेशक दिवंगत जोगिंदर सिंह ने किया था और बाद में इसका अंग्रेजी अनुवाद भी प्रकाशित हुआ। उनकी अन्य प्रकाशित पुस्तकों में वर्ष 2009 में प्रकाशित कविता संग्रह ‘बारिश की बूंदें’ वर्ष 2012 में प्रकाशित उपन्यास ‘शून्य की ओर’ वर्ष 2021 में प्रकाशित लघुकथा संग्रह ‘यह मकान बिकाऊ है’ वर्ष 2022 में प्रकाशित लघुकथा संग्रह ‘खोल कर देखो’ वर्ष 2024 में प्रकाशित लघुकथा संग्रह ‘जागते रहो’ वर्ष 2024 में प्रकाशित उपन्यास ‘बिरजू नाई की दुकान’ तथा वर्ष 2025 में प्रकाशित तकनीक आधारित उपन्यास ‘धरती पर लौटे आभासी दुनिया के अवतार’ शामिल हैं।
गुरु नानक देव विश्वविद्यालय अमृतसर ने मनोज धीमान को 1 जुलाई 2024 से 30 जून 2026 तक हिंदी विषय में बोर्ड ऑफ स्टडीज (पीजी) में शामिल किया था।
वर्ष 2026 में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय में धीमान के लघुकथा संग्रह ‘जागते रहो’ पर लघु शोध-प्रबंध के माध्यम से एक विश्लेषणात्मक अध्ययन भी किया गया।
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Gautam Jalandhari (Editor)