भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन
कांग्रेस विधायकों के साथ धक्का-मुक्की व बदसलूकी की शिकायत व कार्रवाई की मांग
मुद्दों को लेकर दूसरे दिन भी किया मार्च
राजेंद्र सिंह जादौन
चंडीगढ़,31अगस्त । हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र की दूसरी बैठक के दौरान भी कांग्रेस ने अपने विधायकों के साथ पहले दिन हुई धक्का मुक्की का मुद्दा उठाया। साथ ही प्रदेश के मुद्दों को लेकर दूसरे दिन भी मार्च किया। धक्का मुक्की के मामले में राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की।बाद में प्रदेश के मुद्दों को लेकर विधानसभा तक मार्च किया।
नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। इसमें 27 अगस्त को विधानसभा सत्र के पहले दिन कांग्रेस विधायकों के साथ हुए दुर्व्यवहार, धक्का मुक्की, उनके विधानसभा प्रांगण में प्रवेश में अवरोध पैदा कर उनके लोकतांत्रिक अधिकारों के उल्लंघन के संबंध में निष्पक्ष जांच कर उचित कारवाई की मांग की गई। शान्तिपूर्ण प्रदर्शन करते हुए विधायकों के साथ पुलिस कर्मियों द्वारा धक्का-मुक्की और बदसलूकी की गई, इसकी वीडियो और तस्वीरें भी राज्यपाल को दिखाई गईं। राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में कहा गया है कि कांग्रेस के विधायकों द्वारा जनहित के महत्वपूर्ण मुद्दों जैसे बेरोजगारी, महंगाई, कानून व्यवस्था, हरियाणा कौशल रोजगार निगम, सफाई कर्मचारियों की हड़ताल, मंदिरों में चंदा चोरी, पेपर लीक व भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का जातिसूचक क्रिया-कलापों के जरिए अपमान आदि मुद्दों पर विधानसभा मार्च किया गया था। यह लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण ढंग से अपना विरोध दर्ज करवाने का कार्यक्रम पहले से निर्धारित था। इस क्रम में सभी कांग्रेस विधायक हाथों में प्ले कार्ड लेकर शांतिपूर्ण तरीके से नारे लगाते हुए विधानसभा भवन पहुंचे थे। सभी विधायक निर्धारित सुरक्षा परीक्षणों में गुजरने के पश्चात हरियाणा विधानसभा परिसर में प्रवेश द्वार तक बिना किसी अवरोध या अप्रिय घटना के पहुंचे थे। इस प्रवेश द्वार पर हरियाणा पुलिस की भारी संख्या में मौजूदगी आश्चर्यजनक व अभूतपूर्व थी। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि हरियाणा लोकतांत्रिक राज्य नहीं है। विधानसभा की स्वायत्तता और गरिमा का पुलिस द्वारा खुलेआम मर्दन और दमन पीड़ादायक भी था और चिंताजनक भी। वहां पुलिस व विधानसभा के सुरक्षा कर्मियों का व्यवहार असामान्य रूप से असम्मानजनक, अनुचित एवं आक्रामक था। सबको बलपूर्वक रोका गया और विधायकों के साथ धक्का-मुक्की की गई।
पुलिस बल का प्रयोग प्रदेश में बढ़ते हुए अपराधों को रोकने की बजाय जनप्रतिनिधियों की आवाज दबाने के लिए किया गया जो गंभीर चिंता का विषय है। पूरी तरह से नियमानुसार किए जा रहे प्रदर्शन को हरियाणा पुलिस लगाकर बलपूर्वक रोका गया। हमने विधानसभा में यह जानना चाहा कि यह सब किसके आदेशों पर और किस नियम के अंतर्गत किया गया परंतु ना तो अध्यक्ष महोदय और ना ही सदन के नेता ने कोई संतोषजनक जानकारी दी और ना ही इसकी जिम्मेवारी ली। हम पुलिस बल के सहारे सदन चलाने की नई परिपाटी का पुरजोर विरोध करते है, क्योंकि यह लोकतंत्र का मज़ाक है।तस्वीरों से उस समय की परिस्थितियों व सुरक्षा कर्मियों के आचरण का वस्तुनिष्ठ आकलन किया जा सकता है। कांग्रेस पार्टी के विधायकों का प्रदर्शन पूर्णतः शांतिपूर्ण व लोकतांत्रिक था और विधानसभा के किसी नियम परंपरा या मर्यादा का उल्लंघन नहीं था। पहले भी विधानसभा के भवन में प्रवेश द्वार से पहले शांतिपूर्ण प्रदर्शन जिनमे नारे व प्लेकार्ड शामिल हैं, होते आए। संसद में भी इस प्रकार का प्रदर्शन सदन के मुख्य (मकर) द्वार तक सामान्य लोकतांत्रिक तरीका माना जाता है।
विधानसभा प्रदेश में लोक शक्ति का सर्वोच्च प्रतीक है और यह स्वतंत्र विचार विमर्श,अबाध जनप्रतिनिधित्व और संवैधानिक मूल्यों के प्रतिपादन का सर्वोच्च केंद्र है। संविधान निर्माता ने राज्य की शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत के अनुसार विधानसभा की गरिमा और स्वायत्तता पर विशेष बल दिया है। ऐसा प्रतीत हो रहा है इसका अतिक्रमण कार्यपालिका द्वारा हो रहा है, जो लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा है। विधानसभा की सुरक्षा, अनुशासन इसकी सुचारू कार्यवाही के लिए आवश्यक है, परंतु सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की गरिमा एवं उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन स्वीकार्य नहीं हो सकता। अतः अनुरोध करते हैं कि राज्य का संवैधानिक प्रमुख होने के नाते इस गंभीर विषय पर निष्पक्षता, संवैधानिक मर्यादा तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप तत्काल संज्ञान लेकर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही सुनिश्चित करें। इस प्रकार की अलोकतांत्रिक घटना की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए संस्थागत ढांचा बनाने एवं निर्वाचित विधायकों और इस महान सदन की गरिमा प्रतिष्ठा बनाए रखने के ठोस उपाय किए जाने संबंधी आदेश जारी करें।
मॉनसून सत्र की दूसरी बैठक के दौरान भी कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा मार्च किया। सफाई कर्मियों, कौशल कर्मियों, गेस्ट टीचर्स, बिजली कर्मियों समेत तमाम कर्मचारियों की मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। कांग्रेस विधायक नारेबाजी और मार्च करते हुए विधानसभा पहुंचे। इस बार विधायकों ने कर्मचारियों के तमाम मुद्दों को उठाते हुए प्लेकार्ड लहराए। इसमें सफाई कर्मियों की मांगें मानने, कौशल निगम कर्मियों को पक्का करने, कौशल निगम को बन्द करने के लिए ताकि युवाओ का शोषण बंद हो,समान काम समान वेतन ,गेस्ट टीचर्स को पक्का करने, बिजली कर्मियों की मांगों को मानने, फायर ब्रिगेड कर्मियो की मांग, पुरानी पेंशन स्कीम बहाल करने, एचपीएससी चेयरमैन को हटाने और बाहरीयों को नौकरी में प्राथमिकता बंद करने व नौकरियों में पारदर्शिता की मांग उठाई गई। पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में तमाम विधायक सरकार-विरोधी नारेबाजी करते हुए विधानसभा तक पहुंचे। रास्ते में एकबार फिर पुलिस ने बैरिकेडिंग और भारी बल प्रयोग कर उन्हें रोकने की कोशिश की। सुरक्षाकर्मियों ने विधायकों के साथ धक्कामुक्की करने की भी कोशिश की। सरकार के इस रवैये की भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखना न सिर्फ उनका अधिकार है, बल्कि जनप्रतिनिधि होने के नाते जनता के मुद्दों को उठाना उनकी जिम्मेदारी भी है। लेकिन ऐसा लगता है कि भाजपा सरकार पूरी तरह तानाशाही पर उतर आई है और वह जनहित के मुद्दों को पूरी तरह दबाना चाहती है। हुड्डा ने कहा कि सरकार याद रखे कि ये कांग्रेस के विधायक हैं। कांग्रेस वह संगठन है, जो न किसी से डरता है और न कभी हार मानता है। जनहित के मुद्दों को पार्टी के विधायक, तमाम नेता और कार्यकर्ता सड़क से लेकर सदन तक पुरजोर तरीके से उठाते रहेंगे। कर्मचारियों के साथ कांग्रेस कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है और उनकी तमाम मांगों का समर्थन करती है।