राजेंद्र सिंह जादौन
चंडीगढ़, 30 अगस्त। हरियाणा की जेलों में अब कैदियों को समाज से अलग होने पर भी भिन्न तरीके से सामाजिक वातावरण दिया जा रहा है।कैदियों के सुधार और पुनर्वास पहल के तहत आई टी आई और तकनीकी प्रशिक्षण के कार्यक्रम के जरिए सामाजिक माहौल निर्मित किया जा रहा है।जेलों में आधुनिक तकनीकआधारित सुरक्षा व्यवस्था की गई है।, हाई सिक्योरिटी जेलों का निर्माण ओर ओपन जेलों के जरिए सामान्य जीवन का माहौल बनाया जा रहा है। तकनीकी प्रशिक्षण के जरिए रिहाई के बाद रोजगार से जोड़ने की योजना धरातल पर दिखाई दे रही है।
हरियाणा में अभी तीन केंद्रीय जेल, 17 जिला जेल और दो खुली जेल हैं। इनकी कुल अधिकृत क्षमता 24,280 कैदियों की है, जबकि एक अगस्त 2026 तक 26,860 कैदी जेलों में बंद थे। जेलों की क्षमता से अधिक कैदियों की संख्या को देखते हुए सरकार एक ओर नई जेलों के निर्माण पर काम कर रही है तो दूसरी ओर मौजूदा जेलों को आधुनिक सुविधाओं और तकनीक से जोड़ा जा रहा है।
रोहतक में करीब 90 करोड़ रुपये की लागत से 312 केदियों की क्षमता वाली हाई सिक्योरिटी जेल का निर्माण कार्य तेजी पर है। इसके अलावा फतेहाबाद में 1,200 केदियों की क्षमता वाली नई जिला जेल का निर्माण किया जा रहा है। चरखी-दादरी में 1,200 और पंचकूला में 954 केदियों की क्षमता वाली नई जिला जेलों के निर्माण की दिशा में भी कार्रवाई जारी है।
जेलों की सुरक्षा को तकनीक से मजबूत करने के लिए केंद्रीय जेल अंबाला में अत्याधुनिक कॉल ब्लॉकिंग प्रणाली स्थापित की गई है। केंद्रीय जेल हिसार फरीदाबाद, कुरुक्षेत्र, कैथल और सिरसा की जेलों में भी आधुनिक निगरानी तकनीक जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है, जिसके लिए 9.16 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।
केदियों और अपराधियों का जैविक पहचान रिकॉर्ड तैयार करने के लिए माप संग्रहण इकाइयां भी स्थापित की गई हैं। इनमें उंगलियों के निशान, चेहरे की पहचान, डीएनए नमूने और रेटिना स्कैन जैसी जानकारियां संग्रहित की जा रही हैं। यह व्यवस्था जेल सुरक्षा के साथ अपराध की जांच में भी आधुनिक तकनीक के उपयोग को मजबूती देगी।
हरियाणा जेल प्रशासन की सबसे महत्वपूर्ण पहल केदियों को सामान्य जीवन में लौटने के लिए तैयार करना है। फरीदाबाद और करनाल में खुली जेल स्थापित की गई हैं, जहां बेहतर आचरण वाले केदियों को परिवार के साथ रहने का अवसर मिल रहा है। दोनों जेलों में वर्तमान में 48 केदी परिवारों के साथ रह रहे हैं। पलवल को छोड़कर प्रदेश की सभी जेलों में अर्ध खुली जेल की व्यवस्था की गई है। इनकी कुल क्षमता 487 केदियों की है और 178 केदियों को इनमें रहने की अनुमति दी गई है। इस पहल का उद्देश्य केदियों में जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता की भावना पैदा करना है। केदियों को रिहाई के बाद रोजगार के लिए तैयार करने की दिशा में पांच जेलों में आईटीआई केंद्र स्थापित किए गए हैं। यहां 12 ट्रेडों में औद्योगिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है और 255 बंदी प्रशिक्षण के लिए पंजीकृत हैं। गुरुग्राम जिला जेल में तकनीकी डिप्लोमा प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने का काम भी चल रहा है। प्रशिक्षण के बाद रोजगार की राह आसान बनाने के लिए हरियाणा कौशल रोजगार निगम लिमिटेड के साथ समझौता किया गया है। अब तक 117 प्रशिक्षित केदियों का एचकेआरएनएल पोर्टल पर पंजीकरण किया जा चुका है। जेल विभाग की यह पहल केदियों के पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जेल की कार्यशालाओं में तैयार होने वाले उत्पाद अब बाजार में अपनी पहचान बना रहे हैं। केदियों द्वारा तैयार फर्नीचर, हस्तशिल्प, कपड़े, खाद्य सामग्री और सजावटी वस्तुओं को विभिन्न मेलों और आयोजनों के माध्यम से बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय मेले और गीता जयंती महोत्सव में भी जेल उत्पादों के स्टॉल लगाए गए। पिछले वर्ष जेलों में तैयार उत्पादों की 1.76 करोड़ रुपये की बिक्री हुई थी, जबकि चालू वर्ष में अब तक 1.52 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की जा चुकी है। यह पहल बंदियों को काम के माध्यम से आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की ओर ले जा रही है।, कुरुक्षेत्र जिला जेल में स्थापित पेट्रोल पंप और सीएनजी फिलिंग स्टेशन की सफलता के बाद अंबाला, हिसार, यमुनानगर, करनाल, सोनीपत, फरीदाबाद, नूंह और सिरसा सहित अन्य जेलों में भी पेट्रोल पंप संचालित किए जा रहे हैं। कुरुक्षेत्र जेल के पेट्रोल पंप की पिछले वित्त वर्ष में करीब 54 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की गई है, न्यायिक प्रक्रिया को सरल और सुरक्षित बनाने के लिए प्रदेश की जेलों में 453 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्रणालियां स्थापित की गई हैं। वर्तमान में करीब 85 प्रतिशत केदियों की पेशी वीडियो कॉन्फेंसिंग के माध्यम से कराई जा रही है। इससे सुरक्षा जोखिम कम होने के साथ समय और संसाधनों की भी बचत हो रही है।
केदियों के मानसिक और सामाजिक सुधार के उद्देश्य से प्रदेश की 14 जेलों में जेल रेडियो स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। कैथल, भिवानी, सिरसा, झज्जर, नारनौल और रेवाड़ी की जेलों में भी रेडियो स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है। इन माध्यमों से केदियों को सकारात्मक गतिविधियों और रचनात्मक कार्यक्रमों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
जेल मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि हरियाणा सरकार का उद्देश्य जेलों को केवल सजा देने की व्यवस्था तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि बंदियों को सुधार कर समाज की मुख्यधारा में वापस लाना भी है।
डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा, प्रदेश की सभी जेलों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ केदियों के सुधार, कौशल विकास और पुनर्वास के लिए कई योजनाएं बनाई गई हैं। मुख्यमंत्री नायब सैनी के मार्गदर्शन में सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि बंदी प्रशिक्षण प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनें और रिहाई के बाद सम्मान के साथ समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकें। इसके लिए सरकार आर्थिक और प्रशासनिक स्तर पर हरसंभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि आधुनिक जेल व्यवस्था में सुरक्षा के साथ सुधार और पुनर्वास भी उतना ही जरूरी है। इसी सोच के साथ प्रदेश में नई जेलों का निर्माण, आधुनिक तकनीक का विस्तार और बंदियों को रोजगारपरक प्रशिक्षण देने की योजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है।