राजेंद्र सिंह जादौन
चंडीगढ़,26जून। आम आदमी पार्टी छोड़ भाजपा में आए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा केंद्र में मंत्री बन सकते हैं। उनके साथ जालंधर स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के चांसलर अशोक मित्तल भी दावेदार हैं। पंजाब से अभी रवनीत बिट्टू केंद्रीय राज्य मंत्री हैं। बिट्टू का राज्यसभा का कार्यकाल 21 जून को खत्म हो चुका है। अब सांसद न होने पर बिट्टू को 6 महीने बाद 21 दिसंबर तक मंत्री पद छोड़ना होगा। इसलिए पंजाब से किसी एक चेहरे को केंद्रीय कैबिनेट में शामिल करना तय माना जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री पद की दौड़ में अमृतसर निवासी व हाल ही में बिट्टू की जगह राज्यसभा भेजे गए तरूण चुघ भी शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक रविवार या सोमवार को केंद्रीय कैबिनेट में फेरबदल हो सकता है। चर्चा है कि इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरूवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिले, जिसमें उन्हें इसके बारे में सुझाव दिया गया है।
राघव चड्ढा 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। उन्होंने पार्टी की जीत के लिए धरातल पर काम किया । चुनाव में आप ने 117 में से 92 सीटें जीती। सरकार बनी और भगवंत मान मुख्यमंत्री बन गए। शुरुआती 2 साल तक राघव चड्ढा को पंजाब में सुपर सीएम की तरह माना गया। इसके बाद उनके पार्टी से रिश्ते बिगड़ने लगे। जब आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल को शराब घोटाला मामले में जेल हुई चड्ढा तब यूके में थे। इसके बाद वह वापस लौटे तो बगावत कर दी और स्वयं के समेत आप के 7 सांसद तोड़कर भाजपा में शामिल हो गए।
राघव चड्ढा को मंत्री बनाने से भाजपा को पंजाब में मीडिया नैरेटिव के लिए एक बड़ा चेहरा मिल जाएगा। राघव चड्ढा आप की कोर टीम में रह चुके हैं। ऐसे में भाजपा से मंत्रीपद मिलने के बाद चड्ढा 2027 के चुनाव में हमलावर ढंग से काम करेंगे। ऐसे में आप के खिलाफ वह नैरेटिव खड़ा कर सकते हैं। इसके अलावा चड्ढा शहरी क्षेत्र में अपना असर दिखा सकते हैं,। खास तौर पर लुधियाना और जालंधर जैसे इंडस्ट्रियल शहरों में, जहां वे कारोबारियों और केंद्र के बीच पुल का काम कर सकते हैं।
राघव चड्ढा केंद्र में मंत्री बने तो सत्तारूढ़ आप को मनोवैज्ञानिक के साथ संगठनात्मक झटका लग सकता है। 2022 में आप के लिए चड्ढा ने वोट मांगे। अब वही आप को कठघरे में खड़ा करेंगे तो वोटर के मन में सत्ताधारी पार्टी आप के प्रति सवाल खड़े होंगे। वहीं राघव चड्ढा भाजपा में बड़ी भूमिका में आए तो आप में उनसे जुड़े नेता भी उनके साथ जा सकते हैं। खास तौर पर अगर आप किसी विधायक या हारे उम्मीदवार का टिकट काटे या किसी दावेदार को टिकट न दे तो ऐसी सूरत में वह चड्ढा के साथ जा सकते हैं।