*चंडीगढ़ मेडिकल स्टोर के कैशियर की हत्या की वारदात को मई में रेकी के बाद जून में अंजाम दिया*
Jun26,2026
| Rajender Singh Jadon | Chandigarh
पुलिस नाकामी की भी की जा रही जांच
राजेंद्र सिंह जादौन
चंडीगढ़, 26 जून। चंडीगढ़ में श्री कुमार मेडिकल स्टोर के कैशियर जानकीदास की हत्या के मामले में अब खुलासा हुआ है कि कातिलों ने मई में रेकी करने के बाद जून में हत्या की। कत्ल से पहले 4 दिन वह 2 होटलों में ठहरे लेकिन पुलिस को उनके मंसूबे की भनक नहीं लगी। जांच में यह खुलासा होने के बाद अब अधिकारी अपनी एजेंसियों की जांच में जुट गए हैं।
यह भी पता चला है कि कत्ल के बाद भी चारों कातिल करीब 50 मिनट तक चंडीगढ़ में ही रुके रहे, लेकिन पुलिस उन्हें पकड़ नहीं पाई। जिसके बाद वह फरार हो गए। यही नहीं, कत्ल में इस्तेमाल जिगाना पिस्टल भी पुलिस बरामद नहीं कर पाई। उसे भी इनके साथी उठाकर ले गए। चंडीगढ़ पुलिस के आई जी पुष्पेंद्र कुमार द्वारा मीडिया को बताया गया कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। कत्ल के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी उन्होंने कहा था कि पुलिस चूक समेत हर पहलू की जांच की जा रही है। लापरवाही पाए जाने पर जरूर कार्रवाई की जाएगी।
जांच के मुताबिक श्रीकुमार मेडिकल स्टोर के कैशियर जानकीदास के कत्ल की प्लानिंग मई महीने से ही चल रही थी। इसकी रेकी करने के लिए शूटर पहली बार 9 मई को चंडीगढ़ पहुंचे।वे सुबह करीब 4:55 बजे कजहेड़ी स्थित हिमाचल होटल पहुंचे थे। होटल रिकॉर्ड के अनुसार उस समय राहुल, सनी मेहरा, ईशान और अमन नामक चार युवक वहां रुके थे। अगले दिन 10 मई को सुबह 7:40 बजे वे होटल छोड़कर चले गए। उन्होंने एक दिन का किराया 1000 रुपए अदा किया था। इसके बाद 10 जून को सुबह करीब 4:30 बजे के आसपास आरोपी दोबारा हिमाचल होटल पहुंचे। इस बार होटल रिकॉर्ड में सनी मेहरा, आर्यन शर्मा, अमन सिंह और मानस के नाम दर्ज बताए जा रहे हैं। ये तीन दिन तक होटल में रुके और 12 जून को दोपहर करीब 2 बजे चेकआउट कर गए। उन्होंने होटल का लगभग 3000 रुपए किराया चुकाया।हिमाचल होटल छोड़ने के बाद आरोपी सीधे नजदीक स्थित अमर होटल पहुंचे। वहां उन्होंने दोपहर करीब ढाई बजे कमरा लिया और रात वहीं रुके। अगले दिन 13 जून को दोपहर 12:55 बजे उन्होंने अमर होटल से चेकआउट किया और करीब 800 रुपए का भुगतान किया। अमर होटल से निकलने के कुछ समय बाद ही आरोपियों ने सेक्टर-11 स्थित श्री कुमार मेडिकल स्टोर के कैशियर जानकीदास पर गोलियां बरसाकर उनकी हत्या कर दी। वारदात के बाद भी आरोपी करीब 50 मिनट तक शहर में मौजूद रहे, लेकिन पुलिस उन्हें मौके पर नहीं पकड़ सकी। बाद में वे चंडीगढ़ से फरार हो गए।
जानकारों का कहना है कि यह मामला पुलिस इंटेलिजेंस की बड़ी विफलता को दर्शाता है। उनका कहना है कि यदि शूटर वारदात से पहले कई बार शहर में आकर होटलों में ठहर रहे थे तो स्थानीय पुलिस, बीट स्टाफ और खुफिया तंत्र को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली। उन्होंने कहा कि कजहेड़ी क्षेत्र के कई होटलों में पहले भी आपराधिक मामलों से जुड़े आरोपी ठहरते रहे हैं। ऐसे में पुलिस की जिम्मेदारी बनती है कि वह नियमित रूप से होटल रजिस्टरों की जांच करे और यह पता लगाए कि कौन व्यक्ति कहां से आया है, किस उद्देश्य से ठहरा है और उसकी गतिविधियां क्या हैं।पुलिस को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली। उन्होंने कहा कि इस मामले में किस अधिकारी या पुलिस कर्मचारी से चूक हुई, इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, ऐसी घटनाओं को रोकना मुश्किल रहेगा।
इस हत्या के मामले में लापरवाही को लेकर 5 पुलिसकर्मी निलंबित किए जा चुके हैं। इनमें सेक्टर 11 थाने के के सब इंस्पेक्टर बचित्तर सिंह, लेडी कांस्टेबल सुमन, पुलिस पोस्ट लेक पर तैनात सीनियर कांस्टेबल रॉबिन, थाना-3 की लेडी कांस्टेबल दीक्षा और थाना आईटी पार्क की सीनियर लेडी कांस्टेबल जसपाल कौर शामिल हैं। जांच में सामने आया है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगाए नाकों पर जांच के दौरान ड्यूटी में इन्होंने लापरवाही की, जिससे फायरिंग के आरोपी भागने में कामयाब रहे।
कैशियर जानकी दास की हत्या करने के बाद तीनों हमलावर सेक्टर- 43 बस स्टैंड पहुंचे थे। बस स्टैंड के साथ जंगल वाला इलाका है। वहां उन्होंने हत्या में इस्तेमाल की गई दोनों जिगाना पिस्टल छिपा दीं और उनकी वीडियो बनाकर गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों को भेज दी। वीडियो में वह जगह भी दिखाई गई थी, जहां पिस्टल छिपाई गई थीं। जब तक चंडीगढ़ पुलिस आरोपियों की तलाश में जम्मू पहुंची, तब तक मुख्य आरोपी अमित पुलिस के हाथ नहीं लगा था। चंडीगढ़ पुलिस ने सनी मेहरा और आर्यन को जम्मू से गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसी दिन देर शाम अमित को जम्मू पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।हालांकि, उस समय भी हत्या में इस्तेमाल की गई जिगाना पिस्टल बरामद नहीं हो सकी थीं। सेक्टर-43 के जंगल क्षेत्र में जहां पिस्टल छिपाई गई थीं, वहां से गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों के गुर्गे चंडीगढ़ पुलिस के पहुंचने से पहले ही दोनों पिस्टल उठा ले गए थे।
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