यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए एचएसपीसीबी सख्त, यमुनानगर के उद्योगों को दिए कड़े निर्देश
May28,2026
| Rajender Singh Jadon | Chandigarh
यमुना नदी में बढ़ते प्रदूषण को रोकने और नदी के पर्यावरण तंत्र को सुरक्षित करने के लिए हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) ने पूरी तैयारी कर ली है। यमुना एक्शन प्लान (वाईएपी) के तहत जिला स्तर पर निगरानी प्रणाली को बेहद मजबूत और कड़ा कर दिया गया है।
एचएसपीसीबी के अध्यक्ष विनय प्रताप सिंह के आदेशानुसार और सदस्य सचिव योगेश कुमार के कुशल क्रियान्वयन के तहत सभी संबंधित जिलों में वाईएपी की गतिविधियों को समय पर पूरा करने के लिए एसईई और सीईई रैंक के वरिष्ठ अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
इसी कड़ी में गुरुवार को यमुनानगर के एचएसपीसीबी के एसईई-सह-नोडल अधिकारी नवीन गुलिया की अध्यक्षता में स्थानीय औद्योगिक संगठनों के साथ जिला स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मेटल इंडस्ट्रीज एसोसिएशंस, बल्लारपुर पेपर मिल, सरस्वती शुगर मिल और ब्लू क्राफ्ट स्टार्च मिल सहित कई प्रमुख औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक के दौरान नोडल अधिकारी श्री नवीन गुलिया ने पूर्ण पर्यावरणीय अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सभी उद्योगों के लिए चार बड़े और अनिवार्य निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि जिन उद्योगों का अपशिष्ट जल डिस्चार्ज 10 केएलडी से कम है, उन्हें भी अब अनिवार्य रूप से ऑनलाइन फ्लो मीटर और पीटीजेड कैमरों से लैस रियल-टाइम ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाना होगा।
उन्होंने कहा कि यमुना नदी में मिलने वाले स्थानीय नालों में कोई भी उद्योग बिना उपचारित या आधा उपचारित केमिकल या गंदा पानी नहीं बहा सकेगा। इस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।
उन्होंने कहा कि सभी औद्योगिक इकाइयों को अपने एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) को लगातार और पूरी क्षमता व कुशलता के साथ चलाना अनिवार्य होगा।उन्होंने कहा कि उद्योगों को 'हजार्डस एंड अदर वेस्ट्स रूल्स' को सख्ती से लागू करते हुए खतरनाक कचरे का वैज्ञानिक भंडारण और सुरक्षित निपटान सुनिश्चित करना होगा।
उन्होंने बताया कि बोर्ड के इन कड़े निर्देशों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए बैठक में उपस्थित औद्योगिक प्रतिनिधियों और एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने नदी की सुरक्षा के लिए पूरा सहयोग देने का वादा किया है। बैठक में एपीएस भट्टी, हंसराज बारटा, श्रीकांत गर्ग, पारस सेठी, प्रदीप गुप्ता, दीक्षांत आहूजा व कई गणमान्य उद्योगपति शामिल रहे।
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