जाति जनगणना सही न होने से Obc और वंचित वर्गों की हिस्सेदारी होगी प्रभावित: रंधावा
Aug25,2026
| Jagrati Lahar Bureau | Chandigarh
कांग्रेस जाति जनगणना की पक्षधर है, ओपन एंडेड सवालों की बजाय प्रमाणित जाति सूची के आधार पर दिए जाएं विकल्प
राहुल और खड़गे के प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र को रंधावा ने बताया सामाजिक न्याय की लड़ाई में महत्वपूर्ण कदम
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि जाति जनगणना सिर्फ आंकड़ों का सवाल नहीं, बल्कि हक़ और हिस्सेदारी का सवाल है। अगर जातियों की गिनती ही सही नहीं होगी, तो ओबीसी, अति पिछड़े और वंचित समुदायों की वास्तविक हिस्सेदारी भी सही तरीके से तय नहीं हो पाएगी। इसलिए सही आंकड़े ही सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों की उचित भागीदारी सुनिश्चित कर सकते हैं।
रंधावा ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए संयुक्त पत्र में जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया पर उठाई गई चिंताएं पूरी तरह जायज़ हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जाति जनगणना की पक्षधर है, लेकिन यह प्रक्रिया सही, पारदर्शी और प्रमाणित तरीके से होनी चाहिए ताकि हर वर्ग को उसकी वास्तविक आबादी के अनुरूप अधिकार और हिस्सेदारी मिल सके।
उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रक्रिया में Open-ended (खुला जवाब वाला) सवालों के जरिए जातियों का विवरण दर्ज करने का तरीका गंभीर चिंता का विषय है। एक ही जाति अलग-अलग नामों, स्थानीय बोलियों और उपजातियों में दर्ज हुई तो आंकड़े बिखर जाएंगे और इसका सबसे बड़ा नुकसान ओबीसी, अति पिछड़े और वंचित समुदायों को उठाना पड़ेगा।
रंधावा ने कहा कि कांग्रेस की मांग बिल्कुल स्पष्ट है कि मौजूदा प्रश्नावली को रद्द किया जाए और जातियों की प्रमाणित सूची के आधार पर नई प्रश्नावली तैयार की जाए। इसके साथ ही राजनीतिक दलों, सामाजिक विशेषज्ञों, पिछड़ा वर्ग संगठनों और आम जनता से व्यापक परामर्श कर ऐसी प्रक्रिया बनाई जाए, जिस पर सभी को भरोसा हो।
उन्होंने कहा कि जाति जनगणना का उद्देश्य केवल लोगों की गिनती करना नहीं, बल्कि भविष्य में आरक्षण, कल्याणकारी योजनाओं और संसाधनों के न्यायपूर्ण वितरण के लिए एक विश्वसनीय आधार तैयार करना है। इसलिए केंद्र सरकार को जल्दबाजी के बजाय वैज्ञानिक, पारदर्शी और प्रमाणित प्रक्रिया अपनानी चाहिए।
रंधावा ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा दिए गए सुझावों को गंभीरता से स्वीकार करते हुए जाति जनगणना की प्रक्रिया में आवश्यक सुधार किए जाएं, ताकि सामाजिक न्याय का वास्तविक उद्देश्य पूरा हो सके।
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