पूर्व मुख्य सचिव सर्वेश कौशल समेत KBS सिद्धू और काहन सिंह पन्नू के खिलाफ नहीं मिला ठोस सबूत
चंडीगढ़, 12 अगस्त 2026। पंजाब के बहुचर्चित बहु-करोड़ रुपये के सिंचाई घोटाले में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने तीन सेवानिवृत्त IAS अधिकारियों को बड़ी राहत दी है। विजिलेंस की विस्तृत जांच में पूर्व पंजाब मुख्य सचिव सर्वेश कौशल, पूर्व स्पेशल चीफ सेक्रेटरी KBS सिद्धू और पूर्व सिंचाई सचिव काहन सिंह पन्नू के खिलाफ आरोपों को साबित करने वाला कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला। हालांकि, विजिलेंस की रिपोर्ट अंतिम निर्णय के लिए पंजाब सरकार के सक्षम प्राधिकरण को भेजी जा चुकी है।
हाईकोर्ट में दाखिल हुई विजिलेंस की स्टेटस रिपोर्ट
यह जानकारी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो की ओर से दाखिल स्टेटस रिपोर्ट से सामने आई है। रिपोर्ट 10 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट के समक्ष पेश की गई। इससे पहले हाईकोर्ट ने 15 मई को राज्य सरकार को लंबित जांच पूरी करने के लिए 15 दिन का समय दिया था। कोर्ट ने यह भी नोट किया था कि धारा 17-A, Prevention of Corruption Act के तहत अनुमति मिलने के बाद शुरू हुई जांच तीन साल से अधिक समय से लंबित थी।
करीब ₹1,000-1,200 करोड़ के प्रोजेक्ट से जुड़ा मामला
यह मामला पिछली SAD-BJP सरकार के कार्यकाल 2007 से 2017 के दौरान सिंचाई विभाग में राज्य के जल एवं सिंचाई प्रोजेक्टों के कथित आवंटन से जुड़ा है। विजिलेंस के अनुसार, करीब ₹1,000-1,200 करोड़ के कामों के टेंडर कथित तौर पर एक प्रमुख ठेकेदार गुरिंदर सिंह को लाभ पहुंचाने के लिए तैयार किए गए थे। मामले में विभागीय अधिकारियों और राजनीतिक पदाधिकारियों की कथित मिलीभगत के आरोप भी लगाए गए थे।
तीनों अधिकारियों पर आरोप का आधार क्या था?
विजिलेंस के अनुसार, तीनों अधिकारियों के खिलाफ जांच मुख्य रूप से आरोपी ठेकेदार गुरिंदर सिंह के 21 दिसंबर 2017 के disclosure statement के आधार पर शुरू हुई थी। लेकिन जांच में कथित रिश्वत की रकम की कोई बरामदगी नहीं हुई। विजिलेंस ने यह भी पाया कि उक्त disclosure statement मूल FIR में दाखिल challan का हिस्सा नहीं था।
जांच एजेंसी के मुताबिक, केवल इस बयान के आधार पर तीनों अधिकारियों के खिलाफ आगे कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं बनता था।
किसी गवाह ने रिश्वत के आरोपों की पुष्टि नहीं की
विजिलेंस ने पुलिस फाइल, चालान और गवाहों के बयान भी जांचे। रिपोर्ट के अनुसार, आरोपों को किसी निश्चित समय, स्थान, तारीख, महीने या वर्ष से नहीं जोड़ा जा सका। इसके अलावा किसी गवाह ने तीनों अधिकारियों के खिलाफ रिश्वत लेने के आरोपों की पुष्टि नहीं की। कथित बड़ी रकम के किसी स्पष्ट स्रोत का भी पता नहीं लगाया जा सका।
588 पन्नों की जांच सामग्री खंगाली
विजिलेंस ने जांच के दौरान मामले से संबंधित 588 पन्नों की जांच सामग्री का अध्ययन किया। मूल FIR के आधार पर अदालत में कुल 16 चालान पेश किए गए थे—इनमें 9 मुख्य और 7 सप्लीमेंट्री चालान शामिल थे। कुल 32 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हुई, जिनमें 26 सरकारी कर्मचारी और 6 निजी व्यक्ति शामिल थे।
विजिलेंस ने सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली, वरिष्ठ अधिकारियों और राजनीतिक कार्यपालिका की भूमिका के साथ-साथ टेंडर और भुगतान प्रक्रिया की भी जांच की।
टेंडर से भुगतान तक पूरी प्रक्रिया की जांच
जांच में प्रशासनिक एवं तकनीकी मंजूरी, अनुमान तैयार करने, टेंडर दस्तावेज तैयार करने, चीफ इंजीनियर की मंजूरी, Measurement Book और बिलों के सत्यापन, pre-audit तथा ठेकेदारों को भुगतान जारी करने तक की प्रक्रिया की जांच की गई।
विजिलेंस के मुताबिक, इन रिकॉर्ड और प्रक्रियाओं की जांच के बावजूद ऐसा कोई सामग्रीगत साक्ष्य सामने नहीं आया, जिससे तीनों पूर्व IAS अधिकारियों को कथित अनियमितताओं से जोड़ा जा सके।
अंतिम फैसला अभी बाकी
विजिलेंस की जांच रिपोर्ट Joint Director (Crime) ने तैयार की थी। इसे Chief Director, Vigilance Bureau के माध्यम से पंजाब सरकार के Secretary, Vigilance को 27 मई को अंतिम निर्णय के लिए भेजा गया। इसके बाद इसी रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की गई। इसलिए अभी तकनीकी रूप से अंतिम निर्णय सक्षम सरकारी प्राधिकरण द्वारा लिया जाना बाकी है।
पहले क्या थे आरोप?
इस मामले में पहले आरोप लगाया गया था कि सिंचाई विभाग के बड़े काम एक ठेकेदार को कथित रूप से लाभ पहुंचाने के लिए नियमों और टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर करके दिए गए। 2017 में दर्ज FIR में IPC की विभिन्न धाराओं के साथ Prevention of Corruption Act के प्रावधान लगाए गए थे। बाद में पूर्व IAS अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई।
पूर्व मुख्य सचिव सर्वेश कौशल और KBS सिद्धू से भी विजिलेंस ने पूछताछ की थी। हाईकोर्ट ने 2022 में कौशल के खिलाफ तत्काल coercive action पर रोक लगाते हुए उन्हें जांच में शामिल होने का निर्देश दिया था।
ताजा विजिलेंस स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार सर्वेश कौशल, KBS सिद्धू और काहन सिंह पन्नू के खिलाफ ठोस साक्ष्य नहीं मिला है और उन्हें जांच में क्लीन चिट दी गई है। हालांकि रिपोर्ट अंतिम निर्णय के लिए सरकार को भेजी गई है, इसलिए अंतिम प्रशासनिक फैसला अभी बाकी है।