चंडीगढ़, 31 अगस्त: पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने ‘बंदी सिंह’ के मुद्दे पर तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि हिंसक गतिविधियों में शामिल रहे लोगों को महिमामंडित करने से पंजाब की नई पीढ़ी को गलत संदेश जा सकता है।
बिट्टू ने यह बयान अपने दादा एवं पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की बरसी के अवसर पर चंडीगढ़ में आयोजित सभा के बाद एक निजी चैनल से बातचीत के दौरान दिया।
उन्होंने गैंगस्टरवाद और नशे के कारण अपने बच्चों को खोने वाले परिवारों के दर्द का जिक्र करते हुए कहा कि जिस मां का बेटा मारा जाता है, उसके भीतर का दर्द और गुस्सा भी समझना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन लोगों ने समाज या देश के लिए कोई अच्छा काम नहीं किया, उनके पीछे चलने और उन्हें नायक के रूप में पेश करने का क्या औचित्य है।
बिट्टू ने आतंकवाद के दौर में हुई हिंसक घटनाओं और बम धमाकों का जिक्र करते हुए कहा कि उन घटनाओं में मारे गए निर्दोष लोगों और उनके परिवारों के दर्द को भी नहीं भुलाया जा सकता। उन्होंने कहा कि अगर हिंसक गतिविधियों में शामिल लोगों को सम्मान या महिमामंडन दिया जाएगा तो भविष्य में उसी तरह की सोच रखने वाले लोगों को प्रोत्साहन मिल सकता है।
सुखबीर बादल पर हमले का जिक्र करते हुए बिट्टू ने कहा कि यदि किसी हिंसक कार्रवाई को अंजाम देने वाले व्यक्ति को ‘बंदी सिंह’ के नाम से पेश किया जाता है, तो फिर राजनीतिक नेताओं पर हमला करने वालों को लेकर भी यही सवाल उठेगा। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की हिंसक कार्रवाई को उचित ठहराने के बजाय सभी मामलों को एक समान नजरिए से देखा जाना चाहिए।
बिट्टू ने कहा कि पंजाब ने लंबे समय तक हिंसा का दर्द झेला है और अब जरूरत है कि नई पीढ़ी को शांति, भाईचारे और सकारात्मक दिशा का संदेश दिया जाए।