क्या हो अगर आपके पास अपना घर हो, अपनी जमीन हो लेकिन आप उस घर के मालिक न हो। जरूरत पड़ने पर आपको अपने ही घर या जमीन पर लोन लेना हो तो बैंक वाले साफ इंकार कर दे रहे हो, ऐसा लुधियाना के कई परिवारों को 50 दशकों से भी अधिक समय से झेलना पड़ा। कई सरकारें आई व कई चली गई, प्रभावित लोग हर बार चुनाव में इस उम्मीद से सत्ताधारी व विरोधी दलों के नेताओं उम्मीदवारों के सामने अपना दुखड़ा रोते कि कहीं उनकी सत्ता आने पर यह नेता उनको इस नासुर से मुक्ति दिला दें लेकिन नेताओं के दिलासे रात गई बात गई वाले ही साबित होते रहे और प्रभावित लोग अपने ही घर का मालिकाना हक लेने के सपने को एक सपने की भांति ही समझ कर अपना जीवन काटने लगे।
यह था पूरा मामला
लाल लकीर के अंदर आने वाले जमीन में रहने वाले लोगों के पास अपने घर या जमीन का कोई मालिकाना कानूनी दस्तावेज नहीं होता है जिसके कारण वह अपने घर के मालिक होने के बावजूद भी इसके कानूनी मालिक नहीं बन पाते थे तथा कानूनी दस्तावेज न होने के कारण उन्हें बैंक से लोन व अन्य कानूनी प्रक्रियाओं अपनाने के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ता रहा। यहां तक कि वह कानूनी स्वामित्तव न होने के कारण खुद को असहज महसूस करते रहे।
चुनावी बैठकों में मुद्दा आया सामने
आप के लुधियाना वेस्ट से कैंडिडेट एमपी संजीव अरोड़ा ने जागृति लहर को बताया कि अपने तीन महीने के कैंपेन में वह जब हैबोवाल, हैबोवाल खुर्द, राजपुरा बस्ती, जव्वद्दी कलां, सुनेत, बाड़ेवाल आदि इलाकों में लोगों के बीच उनसे मिलने पहुंचे तो यहां के अधिकतर लोगों ने उन्हें उनके अपने मकानों के मालिकाना हक न होने का दर्द बयां किया तथा यह भी बताया कि वह पिछले तीस साल से अपने ही घर-जमीन के स्वामित्व के लिए सरकारी दरबारों के चक्कर पे चक्कर काट रहे है और गुहार लगा रहे है लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई है। जिसके बाद उन्होंने तुरंत इस पर गंभीरता से काम करते हुए सभी प्रभावितों के लिए मालिकाना हक दिलाने के लिए काम किया।
अब तक करीब 1600 परिवारों को प्रदान किया जा चुका है मालिकाना हक
राज्यसभा सांसद संजीव अरोड़ा ने हैबोवाल खुर्द (40) और डीएमसी अस्पताल के पास राजपुरा बस्ती (21) के 61 परिवारों, जवद्दी कलां के 151 परिवारों, सुनेत और बाड़ेवाल में 990 लाभार्थियों, हैबोवाल खुर्द के 121 लाभार्थियों को पिछले दिनों में “मेरा घर मेरे नाम” योजना के तहत मालिकाना हक प्रदान किया है। जिसमें एक क्षेत्र की पार्षद मनिंदर कौर घुम्मन का परिवार भी लाभार्थियों में शामिल रहा। लाभार्थियों को बधाई देते हुए अरोड़ा ने इसे लाल लकीर में रहने वाले निवासियों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने इस पहल को लंबे समय से चली आ रही संपत्ति के स्वामित्व संबंधी समस्याओं को हल करने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक कदम बताया। इन क्षेत्रों के निवासी करीब 30 वर्षों से अपने घरों के कानूनी स्वामित्व की मांग कर रहे थे। अरोड़ा ने कहा कि यह पहल न केवल दशकों पुरानी चुनौतियों का समाधान करती है, बल्कि निवासियों के लिए सम्मान भी बहाल करती है और नए आर्थिक अवसर खोलती है। कानूनी मान्यता प्रदान करके, यह निवासियों को वित्तीय विकास के लिए अपनी संपत्ति का लाभ उठाने की अनुमति देता है - चाहे ऋण के माध्यम से या परिवारों के लिए भविष्य की योजना के माध्यम से।” उन्होंने कहा कि भविष्य में शेष क्षेत्रों को भी कवर किया जा सकता है। मालूम हो कि संपत्ति प्रमाण पत्रों में यदि कोई सुधार आवश्यक हो तो अगले 90 दिनों के भीतर सभी कार्य दिवसों में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के बीच एमसीएल डी-जोन कार्यालय में किया जा सकता है।
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Gautam Jalandhari (Editor)