वीडियो को डीपफेक बताने के लिए फर्जी रिपोर्ट तैयार कराने के आरोप में मुकदमा दर्ज,दो गिरफ्तार
Jun24,2026
| Rajender Singh Jadon | Chandigarh
राजेंद्र सिंह जादौन
चंडीगढ़,24जून। विवादित वीडियो
की सच्चाई को
लेकर हरियाणा और
पंजाब में सियासी
संग्राम छिड़ा हुआ है।पंजाब में
आम आदमी पार्टी
सरकार का नेतृत्व कर
रहे भगवंत मान
और उनके सहयोगी
मंत्री दावा कर
रहे है कि
तीन लैबों की
जांच में कथित
वीडियो डीपफेक पाया
गया है और
तीनों रिपोर्ट में
कहा गया है
कि वीडियो में
दिखाई देने वाला
व्यक्ति भगवंत मान नहीं
है।
पंजाब सीएम भगवंत
मान ने विवादित वायरल
वीडियो को लेकर
भाजपा और अकाली
दल पर हमला
बोला। उन्होंने प्रेस
कॉन्फ्रेंस कर कहा कि
जिन लैब में
टेस्ट हुए उसके
मालिकों को एफ आई
आर की धमकी
देकर डराया गया
है। भाजपा खुद
फंस गई है।
पंजाब में भाजपा-अकाली और कांग्रेस तीनों
एक साथ आ
गए हैं।सीएम ने
कहा कि जब
किसी और तरफ
इनका बस नहीं
चला तो यह
मुझे धर्म वाली
साइड से बदनाम
करने की कोशिश
कर रहे हैं।
पिछली दिनों जो
वीडियो थी, उसमें
मेरी शारीरिक बनावट
नहीं मिलती। सरेआम
पता चल रहा
है कि वीडियो
नकली है। उसके
बाद हमने भी
फोरेंसिक लैब से जांच
करवाई।
सीएम मान ने कहा
कि जिन फॉरेंसिक लैब्स
में वायरल वीडियो
का टेस्ट हुआ,
उनके मालिकों को
भाजपा ने धमकाया-टॉर्चर किया और
ये कहने को
कहा गया कि
उन्हें रिपोर्ट बदलने
के लिए पैसे
का ऑफर हुआ
था। लैब मालिकों को
केस करने की
धमकी दी गई।
सीएम ने कहा
कि ऐसी राजनीति कभी
सफल नहीं होती,
मेरा फैसला तो
जनता कर ही
देगी।
दूसरी ओर मंगलवार को
हरियाणा के गुरुग्राम के
सेक्टर 29 थाने में
सिरसा के एक
व्यक्ति ने रिपोर्ट दर्ज
करवाई कि पंजाब
पुलिस के दो
अधिकारियों ने दवाब डाल
कर उसके जरिए
लैब से वीडियो
को डीपफेक बताने
वाली रिपोर्ट हासिल
की और बदले
में दस लाख
रुपए दिए।इस रिपोर्ट के
आधार पर पुलिस
ने दो लोगों
को गिरफ़्तार किया
है। ये सिरसा
के अरुण महिंद्रा ओर
जींद के अंकित
है।
गुरुग्राम पुलिस
के अनुसार शहर
के होटल क्राउन
प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज
और वॉट्सएप चैट
में स्थिति सामने आई।
दावा है कि
होटल में पंजाब
के अफसरों के
साथ 16 जून को
एक सीक्रेट मीटिंग
हुई, जिसमें मान
से जुड़े वीडियो
को डीपफेक बताने
वाली रिपोर्ट तैयार
करने पर चर्चा
हुई। सीसीटीवी
फुटेज में लुधियाना के
पुलिस अधिकारी बताए
जा रहे हैं।
ये लोग लैब
में काम करने
वाले दो युवकों
के साथ बैठे
दिख रहे हैं।
इसके अलावा पुलिस
अधीक्षक के नाम से
सेव एक नंबर
की वॉट्सएप चैट
भी सामने आई
है।
शिकायतकर्ता जसप्रीत का दावा है
कि होटल में
उसकी मुलाकात एसपी
और लुधियाना के उनके ही सीनियर पुलिस
अधिकारी के साथ हुई।
यह उसी मुलाकात का
सीसीटीवी है। इसमें वह
ब्रेकफास्ट कर रहे हैं।
, शिकायतकर्ता जस्सी के दावे
के मुताबिक इसमें
लुधियाना पुलिस और वह
खुद दिख रहा
है।
सीसीटीवी फुटेज में दिखाई
दे रहा है
कि 16 जून को
सुबह 10 बजे होटल
क्राउन प्लाजा में
पांच लोग बैठकर
बात कर रहे
हैं। दावा किया
जा रहा है
कि इनमें से
दो व्यक्ति इस
मामले के मुख्य
आरोपी हैं, जबकि
एक व्यक्ति शिकायतकर्ता है।
इसके अलावा मीटिंग
में मौजूद दो
अन्य लोग सीनियर पुलिस अधिकारी बताए
जा रहे हैं।
यह भी दावा
किया जा रहा
है कि यह
मीटिंग वीडियो मामले
की जांच को
प्रभावित करने और उनके
पक्ष में एक
फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार
करवाने के मकसद
से की गई
थी।
: सिरसा के
रहने वाले शिकायतकर्ता जसप्रीत सिंह
ने कहा कि
15 जून
को उसके पास
एक अनॉनिमस (गुमनाम)
नंबर से वॉट्सएप कॉल
आई। फोन करने
वाले व्यक्ति ने
खुद को पुलिस अधीक्षक बताया।
पुलिस अधीक्षक ने
कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत
मान से जुड़ा
जो वीडियो सोशल
मीडिया पर बहुत
ज्यादा वायरल हो
रहा है, उस
पर एक फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार
करनी है। उसने
स्पष्ट मना कर
दिया और कहा
कि वह हैंडराइटिंग और
फोरेंसिक डॉक्यूमेंट्स का एक्सपर्ट है,
डिजिटल ऑडियो-वीडियो
का एक्सपर्ट नहीं
है।जसप्रीत सिंह ने कहा
कि पुलिस अधीक्षक ने
उससे किसी अन्य
वीडियो एक्सपर्ट का
नंबर मांगा और
कहा कि उसे
उनके लिए काम
करना है, इसके
बदले मोटा पैसा
मिलेगा। जसप्रीत ने बताया कि
उसने नंबर शेयर
करने को कहा,
तो पुलिस अधीक्षक ने
दबाव डाला कि
वह ही उस
एक्सपर्ट से बात करे।
चूंकि वे बड़े
पुलिस अफसर थे,
इसलिए वह तैयार
हो गया। पुलिस
अधीक्षक ने उसे तुरंत
सामान पैक कर
गुरुग्राम के होटल क्राउन
प्लाजा पहुंचने का
आदेश दिया। जसप्रीत सिंह
ने बताया कि
वह और पुलिस
अधीक्षक एक साथ होटल
पहुंचे। रूम नंबर 3000 में
बैठकर पुलिस अधीक्षक ने
कहा कि सीएम
के फेवर में
रिपोर्ट बनानी है। पुलिस
अधीक्षक ने दावा किया
कि उनके पास
पहले से एक
रिपोर्ट है कि वीडियो
एआई-जनरेटेड नहीं
है। जसप्रीत ने
बताया कि उसने
फिर दोहराया कि
वह एक्सपर्ट नहीं
है, इसके लिए
पेनड्राइव देकर जांच करानी
होगी। इसके बाद
पुलिस अधीक्षक उसे
दूसरे कमरे (रूम
नंबर 3004) में ले गया,
जहां पंजाब पुलिस
के और बड़े
अधिकारी मौजूद थे। बड़े
साहब ने उससे
कहा कि रिपोर्ट जल्द
से जल्द तैयार
होनी चाहिए। जसप्रीत के
सैंपल मांगने पर
उसने वीडियो वाली
पेनड्राइव उपलब्ध कराई।: जसप्रीत ने
बताया कि उसने
अपनी पहचान वाले
साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स को
सैंपल फॉरवर्ड किए।
वहां से जो
शुरुआती रफ रिपोर्ट और
दो ओपिनियन आए,
उन्हें उसने आगे
बढ़ा दिया। जसप्रीत ने
बताया कि पुलिस
अधीक्षक ने उस रफ
रिपोर्ट को देखा और
उसमें अपने हिसाब
से कुछ बदलाव
किए। इसके बाद
उसे वे बदलाव
करने को कहा।
जसप्रीत ने बताया कि
आगे एक्सपर्ट्स को
बोलकर अधिकारियों के
मुताबिक रिपोर्ट में बदलाव करवा
दिए। जसप्रीत ने
बताया कि अगले
दिन ब्रेकफास्ट के
बाद होटल के
बाहर खड़ी एक
सफेद रंग की
सरकारी इनोवा गाड़ी
के पास एक
व्यक्ति ने उसे 10 लाख
रुपए दिए, जिसमें
उसकी और दूसरे
एक्सपर्ट्स की फीस शामिल
थी। इसके बाद
एक और पेनड्राइव देकर
दूसरे एक्सपर्ट को
भेजी गई। वहां
से जो रिपोर्ट आई,
अधिकारियों ने उसमें भी
बदलाव करवाए। बदलावों के
बाद रिपोर्ट को
फाइनल कर दिया
गया। जसप्रीत ने
बताया कि उसने
अधिकारियों को पहले ही
साफ-साफ बता
दिया था कि
जिन लैब से
रिपोर्ट बनवाई जा रही
है वे सरकार
से अप्रूव्ड फोरेंसिक लैब
नहीं हैं, वे
सिर्फ ओपिनियन देने वाले
साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट हैं।
जसप्रीत सिंह
ने बताया कि
अफसरों ने उसको
भरोसा दिया था
कि इस रिपोर्ट को
कहीं भी सार्वजनिक, पुलिस
या राजनीतिक रूप
से इस्तेमाल नहीं
किया जाएगा, सिर्फ
उन्हें देखना है।
बाद में उसको
पता चला कि
अधिकारियों ने उनका फायदा
उठाकर उस जाली
रिपोर्ट को सार्वजनिक रूप
से पेश कर
दिया है। जसप्रीत सिंह
ने वीडियो के
लास्ट में कहा
कि अब उसे
पंजाब पुलिस और
उन बड़े अधिकारियों से
अपनी और अपने
परिवार की जान
का पूरा खतरा
लग रहा है।
उसे समझ नहीं
आ रहा कि
वह यह बात
किसके सामने रखे,
इसलिए उसे तुरंत
सुरक्षा की मांग की
है।सीसीटीवी फुटेज के अलावा
इस मामले से
जुड़ी कुछ वॉट्सऐप चैट
भी सामने आई
है। इसमें पुलिस
अधीक्षक से रिपोर्ट तैयार
करने और उसमें
बदलाव कराने को
लेकर बातचीत दिखाई
दे रही है।
चैट में पेज-3
से एक पैराग्राफ हटाने,
रिपोर्ट में इस्तेमाल किए
गए टूल्स को
जोड़ने, तकनीकी ऑब्जर्वेशन वाले
हिस्से में बदलने
और कन्क्लूजन को
बेहतर बनाने जैसी
बातें लिखी गई
हैं।इसके अलावा एक मैसेज
में वीडियो के
बारे में पूछी
गई क्वेरी को
"ज्यों
का त्यों" रिपोर्ट में
शामिल करने और
फिर उसे "डिनाय" करने की
बात भी लिखी
दिखाई देती है।
एक मैसेज में
"डिनायल"
को लेकर मजबूत
बयान लिखवाने का
जिक्र भी है।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रवक्ता भाई
गुरचरण सिंह ग्रेवाल ने
कहा कि झूठी
रिपोर्ट तैयार करने और
करवाने वालों पर
सख्त कार्रवाई होनी
चाहिए। चाहे वह
किसी भी पद
पर क्यों न
हो, किसी को
बख्शा नहीं जाना
चाहिए।
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