डॉ. द्वारकानाथ कोटनीस हेल्थ एंड एजुकेशन सेंटर द्वारा संचालित टी.आई. प्रोजेक्ट के अंतर्गत आज एक प्रभावशाली ड्रग डी-एडिक्शन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य नशे की लत से प्रभावित व्यक्तियों की समस्याओं को समझना और समाज में उनके प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना था। कार्यक्रम के दौरान नशे के शिकार लोगों के साथ खुला संवाद स्थापित किया गया, जिसमें उन्होंने अपने अनुभव, संघर्ष तथा सामाजिक उपेक्षा से जुड़ी परेशानियों को साझा किया और बताया कि नशे से बाहर निकलने की प्रक्रिया में उन्हें सामाजिक भेदभाव, पारिवारिक दबाव और प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस अवसर पर सिविल हॉस्पिटल के नशा मुक्ति केंद्र एवं ओट सेंटर से डॉ. ताशीबा बरार तथा काउंसलर मिहिका मल्होत्रा ने मरीजों से रूबरू होकर उनकी मानसिक, सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को समझा और आश्वासन दिया कि उनकी आवाज को प्रशासन तक पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. कोटनीस एक्यूपंक्चर अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. इंद्रजीत सिंह ने कहा कि नशा पीड़ितों के प्रति समाज और प्रशासन की सोच में बदलाव लाना अत्यंत आवश्यक है तथा इनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार करना बंद किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे उनके स्वाभिमान को ठेस पहुंचती है और वे इस समस्या से बाहर नहीं निकल पाते। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन लोगों को सजा नहीं बल्कि सहानुभूति, उचित इलाज और पुनर्वास की आवश्यकता है, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक वापसी कर सकें। उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश भी दिया तथा सरकार से अपील की कि नशा मुक्ति सेवाओं को और अधिक सुलभ बनाया जाए। इस अवसर पर प्रोजेक्ट मैनेजर उपेंद्र सिंह, प्रवेश, मनीषा, डॉ. रघुवीर, तरसेम लाल सहित अन्य सदस्यों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई और कार्यक्रम को सफल बनाया, वहीं अंत में आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों और सहयोगियों का धन्यवाद करते हुए भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रम जारी रखने का संकल्प लिया।