यमुना का पानी राजस्थान को देने का भी विरोध
राजेंद्र सिंह जादौन
चंडीगढ़,24 जून।हरियाणा सरकार की बैंक जमाओ में करोड़ो रुपए के गबन के मामले में आई ए एस पंकज अग्रवाल की पिछले सोमवार की रात सीबीआई द्वारा गिरफ्तारी किए जाने के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर हमलावर रुख अपना लिया है।हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के चुनाव के समय पंकज अग्रवाल निर्वाचन अधिकारी थे और मतगणना के दौरान कांग्रेस ने पांच विधायकों के वोट रद्द किए जाने पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी।इनमें से एक वोट केंद्रीय चुनाव आयोग की जांच के बाद स्वीकार कर लिया गया लेकिन बाकी चार वोट रद्द माने गए थे।इन चार वोटो को भी रद्द किए जाने पर कांग्रेड का विरोध कायम है।
पंकज अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद बुधवार को यहां हरियाणा कांग्रेस मुख्यालय पर पत्रकार वार्ता में वरिष्ठ कांग्रेस विधायक अशोक अरोड़ा और उप नेता प्रतिपक्ष आफताब अहमद ने कहा कि राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए भाजपा सरकार ने पंकज अग्रवाल जैसे भ्रष्ट अधिकारियों का सहारा लिया।अब सीबीआई द्वारा हरियाणा सरकार की धनराशि के गबन मामले में अग्रवाल की गिरफ्तारी से इस आरोप की पुष्टि हो गई है।
उल्लेखनीय है कि पिछले माह मार्च में हरियाणा से राज्यसभा की दो सीटों के चुनाव में विधायकों की संख्या के मद्देनजर भाजपा की एक सीट पर जीत निश्चित थी।दूसरी सीट मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को मिलना तय थी लेकिन दूसरी सीट के भाजपा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष सतीश नांदल ने भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी के बतौर नामांकन दाखिल कर दिया था।मतदान के बाद गणना में कांग्रेस के पांच वोट क्रॉस होना पाया गया और पांच वोट रद्द किए गए।लेकिन कांग्रेस की आपत्ति और केंद्रीय चुनाव आयोग की जांच के बाद एक वोट स्वीकार कर चार वोट रद्द माने गए।लेकिन कांग्रेस बाकी चार वोटो का रद्द किया जाना अवैध मानती है और तत्कालीन निर्वाचन अधिकारी पंकज अग्रवाल को दोषी मानती है।
इस सवाल पर कि क्या कांग्रेस पंकज अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद उनकी राज्यसभा चुनाव में भूमिका को लेकर जांच की मांग करती है अशोक अरोड़ा ने कहा कि अब इस मामले में हाइकोर्ट में याचिका दायर की गई है।हाइकोर्ट ही फैसला करेगा।उनका कहना यह है कि राज्यसभा की दूसरी सीट जीतने के लिए भाजपा सरकार ने पंकज अग्रवाल जैसे भ्रष्ट अधिकारी की मदद ली थी और यह अग्रवाल की गिरफ्तारी से साबित हो गया।
इन कांग्रेस विधायकों ने समझौते के तहत हरियाणा से यमुना का पानी राजस्थान को देने का भी विरोध किया।उन्होंने कहा यमुना का अतिरिक्त वर्षा जल पाइप लाइन के जरिए राजस्थान को दिया जा रहा हैं लेकिन इस पानी पर पहला हक हरियाणा का है और यह पानी हरियाणा के उन हिस्सों को पाइप लाइन के जरिए भेजा जाए जहां पानी की कमी है।उन्होंने कहा कि पेयजल और सिंचाई के लिए हरियाणा को पानी की बहुत जरूरत है।