-श्री अमरनाथ बर्फानी लंगर संगठन (सबलो) के प्रधान राजन गुप्ता ने वर्ष 2026 की अमरनाथ यात्रा के लिए लंगर अनुमति की नई प्रक्रिया पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे अपारदर्शी और मनमानी करार दिया है। संगठन का कहना है कि श्राइन बोर्ड ने बिना किसी ठोस कारण के दशकों पुरानी EOI आधारित पारदर्शी प्रणाली को समाप्त कर दिया है।
सबलो के अनुसार नई प्रक्रिया में चयन मानदंड, मूल्यांकन प्रणाली और समय-सीमा का कोई खुलासा नहीं किया गया है। वित्तीय पात्रता जैसी जरूरी शर्तों को हटाने और बिना कारण आवेदन अस्वीकार करने के प्रावधान से निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
संगठन ने यह भी बताया कि वर्ष 2025 की यात्रा के बाद लंगर संगठनों को अनिवार्य एनओसी जारी नहीं किए गए, जबकि यह अगले वर्ष की अनुमति के लिए जरूरी शर्त थी। इससे लंबे समय से सेवा कर रहे संगठनों में अनिश्चितता और चिंता का माहौल है।
सबलो ने आशंका जताई है कि स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव में चयन प्रक्रिया में पक्षपात या “पिक एंड चूज” की स्थिति बन सकती है, जिससे अनुभवी संगठनों की अनदेखी हो सकती है। साथ ही आवेदन की अंतिम तिथि नजदीक होने और प्रक्रिया में स्पष्टता न होने से संगठनों के लिए तैयारी करना भी मुश्किल हो रहा है।
संगठन ने श्राइन बोर्ड से पारदर्शी मानदंड घोषित करने, पूरी प्रक्रिया स्पष्ट करने और पूर्व की स्थापित प्रणाली को बहाल करने की मांग की है। इसके साथ ही सबलो ने इस मुद्दे पर जल्द व्यक्तिगत सुनवाई देने का भी आग्रह किया है, ताकि विवाद और असमंजस की स्थिति को समय रहते दूर किया जा सके।