डॉ. इंद्रजीत सिंह ने साझा किया 50 वर्षों के अनुभव का निचोड़; कहा- योग, एक्यूपंचर और सही मार्गदर्शन से ही बचेगा पंजाब का भविष्य
सलेम टाबरी स्थित अग्रणी सामाजिक व चिकित्सा संस्था 'डॉ. द्वारका नाथ कोटनीस हेल्थ एंड एजुकेशन सेंटर' (डॉ. कोटनीस एक्यूपंचर अस्पताल) द्वारा 'अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध और अवैध तस्करी विरोधी दिवस' के उपलक्ष्य में जिला सामाजिक सुरक्षा अधिकारी एस. वरिंदर सिंह टिवाना के दिशा-निर्देशों और मार्गदर्शन के तहत 17 जून से 26 जून 2026 तक "नशा मुक्त भारत अभियान - विकसित भारत की पहचान" विषय पर आधारित 10-दिवसीय व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है; जिसके तहत आज भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा प्रायोजित दो प्रमुख परियोजनाओं — 'कम्युनिटी पीयर लेड इंटरवेंशन' (सी.पी.एल.आई.) और 'आउटरीच एंड ड्रॉप-इन सेंटर' (ओ.डी.आई.सी.) के माध्यम से पंजाब की युवा पीढ़ी को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने तथा पीड़ित युवाओं को मुख्यधारा में जोड़ने के लिए 'विश्व योग दिवस' बेहद विशेष रूप से मनाया गया। इस अभियान के पहले दिन जहाँ किशोरों को जीवन में कभी नशा न करने की पवित्र शपथ दिलाई गई थी, वहीं आज योग दिवस पर नशे की समस्या से जूझ रहे नौजवानों ने अपनी पीड़ा साझा की और उन्हें इस दलदल से पूरी तरह बाहर निकल चुके प्रेरणादायक युवाओं — अभिषेक, अमनदीप तथा डेविड से मिलवाया गया, जिन्होंने बताया कि नियमित योग, एक्यूपंचर चिकित्सा और संस्था के सही मार्गदर्शन से ही वे वापस सामान्य जीवन में लौटने में कामयाब रहे हैं। इसके साथ ही सी.पी.एल.आई. प्रोजेक्ट में रजिस्टर्ड बच्चों ने विभिन्न स्थानों पर योगाभ्यास करके आम लोगों में जागरूकता फैलाई। इस अवसर पर संस्था के निदेशक डॉ. इंद्रजीत सिंह ने अपने 50 वर्षों के अनुभव के अनुसार योग और एक्यूपंचर के महत्व पर विशेष प्रकाश डालते हुए गंभीर चिंता व्यक्त की और कहा कि "नशामुक्त समाज ही एक विकसित राष्ट्र की नींव है; योग और एक्यूपंचर के माध्यम से जहाँ मानसिक तनाव कम होता है, वहीं नशा छोड़ने के दौरान शरीर में होने वाले दर्द व अन्य शारीरिक परेशानियाँ (विड्रॉल) भी रुक जाती हैं। इसके साथ ही इससे एकाग्रता और इच्छाशक्ति बढ़ती है, जिससे नशा मुक्ति बहुत आसानी से हो सकती है। आज के समय में पंजाब को नशामुक्त करने के लिए योग और एक्यूपंचर एक बेहतरीन साधन बन सकते हैं; यदि इन्हें सरकारी तंत्र के अनुसार नशा मुक्ति व इलाज केंद्रों से जोड़ा जाए, तो इस बड़ी समस्या से निपटने में बहुत बड़ा योगदान मिल सकता है। युवा पीढ़ी को इन घातक कृत्रिम (सिंथेटिक) नशों के चंगुल से निकालने के लिए पहले हमें इन्हें पारंपरिक नशों की ओर बढ़ाकर फिर पूर्ण नशा मुक्ति की ओर अग्रसर करना होगा, अन्यथा पंजाब का भविष्य अंधकार में डूब जाएगा और जब तक युवा नशामुक्त नहीं होगा तब तक विकसित भारत की परिकल्पना अधूरी है।" सलेम टाबरी और लुधियाना के विभिन्न हिस्सों में नुक्कड़ नाटक, परामर्श सत्र, रैलियों और सेमिनार के जरिए सीधे समुदाय के बीच जाकर जमीनी स्तर पर काम कर रही इस मुहिम को सफल बनाने में क्षेत्र समन्वयक गगनदीप कुमार, केंद्र प्रभारी सुश्री मनीषा, डॉ. रघुवीर सिंह, रीतू, महेश, मीनू और दक्ष सहित संस्था की पूरी टीम सक्रिय रूप से जुटी हुई है।
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Gautam Jalandhari (Editor)