नई पीढ़ी डॉ मुखर्जी के विचारों से प्रेरणा ले_नायब सैनी अम्बाला का विज्ञान केंद्र होगा डा श्यामा प्रसाद मुखर्जी केंद्र

Jul6,2026 | Jagrati Lahar Bureau | Chandigarh


शहीद स्मारक के निकट डॉ मुखर्जी की प्रतिमा स्थापित की जाएगी
        राजेंद्र सिंह जादौन
चंडीगढ़, 6 जुलाई। हरियाणा के मुख्यमंत्री  नायब सिंह सैनी ने कहा कि महान स्वतंत्रता सेनानी और भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्र सेवा, त्याग और सिद्धांतों का प्रतीक है। उनकी जयंती केवल उन्हें स्मरण करने का अवसर नहीं, बल्कि उनके बताए मार्ग पर चलने तथा नई पीढ़ी को उनके जीवन मूल्यों, आदर्शों और सिद्धांतों से प्रेरणा लेने का अवसर है।
मुख्यमंत्री अंबाला में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के 125 वे जयंती कार्यक्रम के दौरान संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री  जगत प्रकाश नड्डा ने भी शिरकत की। इस दौरान मुख्यमंत्री  ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि अंबाला में 85 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले साइंस सेंटर का नाम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रखा जाएगा, साथ ही निर्माणाधीन शहीद स्मारक के नजदीक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी। इससे पहले मुख्यमंत्री  नायब सिंह सैनी, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री  जगत प्रकाश नड्डा, प्रदेशाध्यक्ष डॉ अर्चना गुप्ता  संसदीय बोर्ड की सदस्य श्रीमती सुधा यादव ने डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
मुख्यमंत्री  ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले वर्ष से जुलाई 2027 तक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का दो वर्षीय जयंती समारोह मनाया जा रहा है। यह आयोजन उनके विचारों को देश के जन-जन और घर-घर तक पहुंचाने का महायज्ञ है तथा राष्ट्र की ओर से उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी के व्यक्तित्व में ज्ञान, कर्म और राष्ट्रभक्ति की त्रिवेणी का अद्भुत संगम दिखाई देता है।उन्होंने कहा कि 6 जुलाई 1901 को कोलकाता में जन्मे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को विद्वता और राष्ट्र सेवा की भावना विरासत में मिली थी। उनके पिता सर आशुतोष मुखर्जी बंगाल के प्रसिद्ध शिक्षाविद थे। मात्र 33 वर्ष की आयु में डॉ. मुखर्जी कोलकाता विश्वविद्यालय के सबसे कम उम्र के कुलपति बने। बाद में वे संविधान सभा के प्रभावशाली सदस्यों में शामिल रहे तथा स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री का दायित्व भी संभाला।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का राजनीतिक जीवन सत्ता की इच्छा से नहीं, बल्कि सेवा और सिद्धांतों के प्रति समर्पित था। जब देशहित और सिद्धांतों का प्रश्न आया तो उन्होंने 19 अप्रैल 1950 को केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने तत्कालीन सरसंघचालक  गुरु गोलवलकर से मुलाकात की और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के साथ मिलकर भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जो आज भारतीय जनता पार्टी का आधार है।
उन्होंने कहा कि अंबाला की धरती का डॉ. मुखर्जी के जीवन से ऐतिहासिक संबंध है। 8 मई 1953 को जब वे जम्मू-कश्मीर के लिए रवाना हुए तो अंबाला स्टेशन पहुंचकर उन्होंने तत्कालीन जम्मू-कश्मीर के प्रधानमंत्री शेख अब्दुल्ला को संदेश भेजा कि वे बिना परमिट जम्मू आ रहे हैं और वहां के हालात का अवलोकन कर शांति स्थापित करना चाहते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रावी नदी के पुल पर उन्हें जम्मू-कश्मीर में प्रवेश से रोकने का सरकारी आदेश दिया गया, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे राज्य में प्रवेश करने के लिए कटिबद्ध हैं। इसके बाद उन्होंने बिना परमिट जम्मू-कश्मीर में प्रवेश किया, जहां उन्हें गिरफ्तार कर श्रीनगर के निकट नजरबंद कर दिया गया। नजरबंदी के दौरान उनका निधन हो गया। उन्होंने कहा कि यह बलिदान भारत की एकता और अखंडता के लिए दिया गया सर्वोच्च बलिदान था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने "एक राष्ट्र में दो निशान, दो विधान और दो प्रधान नहीं चलेंगे" का आह्वान किया था। उन्होंने कहा कि आज यह गर्व का विषय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डॉ. मुखर्जी के उस संकल्प को पूरा किया गया। उन्होंने कहा कि उनकी जयंती हमें राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए उनके आदर्शों पर चलने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि हम मिलकर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के दिखाए मार्ग पर चलते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत को 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में काम कर रहे है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री  जगत प्रकाश नड्डा ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि "एक भारत, श्रेष्ठ भारत" के प्रणेता थे। उन्होंने अपने संपूर्ण जीवन को राष्ट्र की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के लिए समर्पित किया। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उनकी विचारधारा को धरातल पर उतारा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 21 अक्टूबर 1951 को भारतीय जनसंघ की स्थापना कर देश को एक मजबूत वैचारिक विकल्प दिया। आज उसी विचारधारा के आधार पर भारतीय जनता पार्टी विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन चुकी है और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) देश के अधिकांश हिस्से में जनसेवा कर रहा है। श्री नड्डा ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने "एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे" का नारा दिया था। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पूर्ण एकीकरण के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाकर उनके संकल्प को पूरा किया गया।
उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने पूर्वी पाकिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए शरणार्थियों को नागरिकता देने की बात कही थी। प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकता संशोधन अधिनियम  लागू कर उनकी इस सोच को भी साकार किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि "मेक इन इंडिया", रक्षा विनिर्माण, सेमीकंडक्टर निर्माण, नई शिक्षा नीति और आत्मनिर्भर भारत जैसे अनेक निर्णय डॉ. मुखर्जी के राष्ट्रवादी विजन को आगे बढ़ाने वाले कदम हैं। नई शिक्षा नीति शिक्षा को सुलभ, किफायती, लचीला और मातृभाषा आधारित बनाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है। जगत प्रकाश नड्डा ने प्रदेश की डबल इंजन सरकार और प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की तारीफ करते हुए विकास कार्यो को भी गिनवाया। उन्होंने हरियाणा में केंद्र सरकार की विकास परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यमुनानगर में दीनबंधु छोटू राम तापीय विद्युत संयंत्र, द्वारका एक्सप्रेसवे, रेवाड़ी बाईपास, राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार, रेल परियोजनाएं तथा खरखौदा में मारुति सुजुकी का विशाल संयंत्र प्रदेश के विकास को नई गति दे रहे हैं।
  नड्डा ने कहा कि हरियाणा में पारदर्शी भर्ती व्यवस्था लागू की गई है और बिना पर्ची-बिना खर्ची के हजारों युवाओं को सरकारी नौकरियां मिली हैं। महिलाओं के कल्याण, स्वास्थ्य सेवाओं और आधारभूत ढांचे के विकास में भी राज्य सरकार उल्लेखनीय कार्य कर रही है। उन्होंने लाडो लक्ष्मी योजना, जरूरतमंदों को 500 रुपये में मिलने वाले गैस सिलेंडर के साथ—साथ किसानों की एमएसपी पर खरीदी जा रही फसलों का भी किया। श्री नड्डा ने कहा कि प्रदेश में एम्स और कैंसर उपचार सुविधाओं का विस्तार स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा बदलाव लेकर आया है। जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने पश्चिम बंगाल को भारत का हिस्सा बनाए रखने के लिए ऐतिहासिक संघर्ष किया था। यदि उन्होंने उस समय आंदोलन नहीं किया होता तो आज पश्चिम बंगाल का अस्तित्व वर्तमान स्वरूप में संभव नहीं होता। उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि प्रत्येक नागरिक विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के संकल्प को पूरा करने में अपना योगदान दे तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखकर कार्य करे। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी द्वारा अंबाला स्थित साइंस सेंटर का नाम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर रखने तथा उनकी भव्य प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा का स्वागत किया और इसके लिए मुख्यमंत्री को बधाई दी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष डॉ अर्चना गुप्ता ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देश की एकता के लिए त्याग दिया, देश को आत्मनिर्भरता का विचार उन्होंने ही दिया। उन्होंने कहा कि महान विभूति डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्वतंत्र भारत में उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री बने थे। विपक्ष में होते हुए भी वे कर्तव्य और निष्ठा तथा ईमानदारी के परिपेक्ष के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने 4 प्रमुख बिंदुओं पर काम किया, जिनमें रेल का जाल, एयरपोर्ट, रक्षा उपकरण और परमाणु ऊर्जा शामिल थे। आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी भी उसी विजन के साथ काम कर रहे है।
इस मौके पर बीजेपी केंद्रीय संसदीय बोर्ड की सदस्य श्रीमती सुधा यादव, वरिष्ठ नेता श्रीमती बन्तो कटारिया, प्रदेश संयोजक  संदीप जोशी, जिलाध्यक्ष  मनदीप राणा, पूर्व मंत्री  असीम गोयल, मेयर अक्षीता सैनी, पूर्व विधायक  पवन सैनी, श्रीमती संतोष सारवान सहित कई गणमान्य मौजूद थे।

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