दिल्ली में बच्चों की तस्करी करने वाले गिरोह के पकड़े जाने पर हरियाणा पुलिस की नींद उड़ी
Jun18,2026
| Rajender Singh Jadon | Chandigarh
राजेंद्र सिंह जादौन
चंडीगढ़,18जून। देश की राजधानी दिल्ली में बच्चों की खरीद-फरोख्त और तस्करी से जुड़े अंतरराज्यीय गिरोह के भंडाफोड़ के साथ ही हरियाणा पुलिस की नींद उड़ गई है। हरियाणा में पहले ही बच्चों के विरुद्ध अपराधों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से सटे होने के कारण हरियाणा लंबे समय से बच्चों की गुमशुदगी, बाल श्रम, भीख मंगवाने वाले गिरोहों और मानव तस्करी जैसे अपराधों से जूझ रहा है। हालांकि, हरियाणा पुलिस ने पिछले कुछ वर्षों में ऑपरेशन मुस्कान के तहत हजारों बच्चों को खोजकर उनके परिवारों से मिलाने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।
हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने हाल ही में एनसीआरबी के आंकड़ों पर चिंता जताते हुए कहा था कि राज्य में बच्चों के खिलाफ अपराधों में वृद्धि दर्ज की गई है। आयोग के अनुसार, वर्ष 2024 में हरियाणा में बच्चों के खिलाफ अपराधों के 7,547 मामले दर्ज हुए, जो 2023 की तुलना में करीब 18 प्रतिशत अधिक थे। इनमें अपहरण, यौन अपराध, तस्करी और अन्य गंभीर अपराध शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि हर गुमशुदा बच्चा तस्करी का शिकार नहीं होता, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे मानव तस्करी, बाल श्रम, जबरन भीख मंगवाने, अवैध गोद लेने और यौन शोषण के नेटवर्क में फंस जाते हैं। हरियाणा की सीमाएं दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब से जुड़ी होने के कारण तस्करों के लिए आवाजाही अपेक्षाकृत आसान रहती है।दिल्ली पुलिस द्वारा हाल के वर्षों में कई बाल तस्कर गिरोहों का पर्दाफाश किया गया है, जिनमें नवजात बच्चों को लाखों रुपये में बेचने और फर्जी दस्तावेजों के जरिए अवैध गोद दिलाने के मामले सामने आए हैं। इन गिरोहों के तार कई राज्यों से जुड़े पाए गए।
बच्चों की गुमशुदगी और तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए हरियाणा पुलिस ने "ऑपरेशन मुस्कान" और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के जरिए लगातार अभियान चलाए हैं। वर्ष 2020 में हरियाणा पुलिस ने 1,716 गुमशुदा बच्चों को खोजकर उनके परिवारों से मिलाया। इनमें से 283 बच्चों को विशेष एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग इकाइयों ने बरामद किया था। इसी दौरान 1,189 बाल भिखारियों और 1,941 बाल श्रमिकों को भी बचाया गया। इससे पहले ऑपरेशन मुस्कान के तहत राज्यभर में हजारों बच्चों को खोजा गया था। वर्ष 2015 में अभियान के दौरान 4,824 बच्चों को ट्रेस किया गया, जबकि गुरुग्राम पुलिस ने अकेले 1,094 बच्चों को बरामद कर परिवारों तक पहुंचाया था।गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, नूंह, पानीपत, सोनीपत और बहादुरगढ़ जैसे एनसीआर से जुड़े जिले लंबे समय से संवेदनशील माने जाते हैं। औद्योगिक क्षेत्रों, निर्माण स्थलों और शहरी झुग्गियों में बाल श्रम तथा बाल तस्करी के मामलों की आशंका अधिक रहती है। पुलिस और बाल संरक्षण इकाइयां ऐसे क्षेत्रों में नियमित अभियान चलाती हैं।
हरियाणा पुलिस ने बच्चों की सुरक्षा के लिएबहुस्तरीय व्यवस्था बनाई है।एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट का गठन किया है। ऑपरेशन मुस्कान और ऑपरेशन स्माइल जैसे विशेष अभियान चलाए हैं।"खोया-पाया" और "मिसिंग चाइल्ड" पोर्टल पर डेटा अपलोड किया है।रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई है।बाल कल्याण समितियों और गैर सरकारी संगठनों के साथ समन्वय से कार्रवाई की जाती है।बाल श्रम और भीख मंगवाने वाले गिरोहों के खिलाफ विशेष कार्रवाई की गई।
दिल्ली में बच्चों की खरीद-फरोख्त और तस्करी से जुड़े गिरोह के पकड़े जाने के बाद हरियाणा पुलिस और खुफिया एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इस नेटवर्क के तार हरियाणा के किसी जिले से भी जुड़े हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि एनसीआर राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, त्वरित सूचना साझा करने की व्यवस्था और गुमशुदा बच्चों की तत्काल खोज ही इस अपराध पर प्रभावी रोक लगा सकती है।
Child-Abduction-Gang-Delhi-Haryana-Police-