*ताजपुर डेयरी कॉम्प्लेक्स का गंदा पानी अब भी बिना ट्रीटमेंट बुड्ढा दरिया में डाला जा रहा*
*संत सीचेवाल ने बूढ़े दरिया को प्रदूषण मुक्त करने के अभियान में सहयोग की अपील की*
पिछले एक वर्ष से राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल बुड्ढा दरिया को प्रदूषण मुक्त करने के लिए दिन-रात जुटे हुए हैं। उनके प्रयासों से दरिया के पानी की गुणवत्ता में बड़े स्तर पर सुधार दर्ज किया गया है, जिसकी रिपोर्टें भी सामने आ चुकी हैं। लुधियाना समेत पूरे पंजाब के पर्यावरण प्रेमियों को उम्मीद जगी है कि संत बलबीर सिंह सीचेवाल के नेतृत्व में बुड्ढा दरिया स्वच्छता की ओर बढ़ रहा है। लेकिन कुछ अधिकारियों की लापरवाही इन उम्मीदों को झटका दे रही है, जिससे चल रहे स्वच्छता अभियान में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं।
बुड्ढा दरिया के प्रदूषण की स्थिति का निरीक्षण करते हुए संत सीचेवाल ने ताजपुर डेयरी कॉम्प्लेक्स से बिना ट्रीटमेंट गंदा पानी दरिया में छोड़े जाने पर संस्था के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने अधिकारियों को मौके पर दिखाया कि किस तरह अस्थायी रूप से बनाए गए ‘सीचेवाल मॉडल’ से छेड़छाड़ की जा रही है। ताजपुर डेयरी कॉम्प्लेक्स में गोबर और मूत्रजल के प्रबंधन की जिम्मेदारी संस्था की है, लेकिन वहां बरती जा रही लापरवाही के कारण डेयरियों से निकलने वाला मूत्रजल बिना उपचार के सीधे बुड्ढा दरिया में पहुंच रहा था।
उल्लेखनीय है कि अमृत धर्म कांटा पुली के पास अस्थायी तौर पर बनाए गए सीचेवाल मॉडल के तहत तीन तालाब बनाए गए हैं, जिनसे प्रतिदिन 17 टिपर गोबर उठाया जा रहा है। यहां पानी का अस्थायी उपचार किया जा रहा है, लेकिन संस्था की लापरवाही के चलते दरिया में जा रहे मूत्रजल को लेकर वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
पहले नगर निगम का लगभग 165 एमएलडी सीवरेज बिना उपचार के बुड्ढा दरिया में जा रहा था। अब इस पानी को रोककर 225 एमएलडी ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ा गया है। ग्रामीण क्षेत्रों की 79 डेयरियों का गोबर दरिया में गिरने से रोका गया, जिससे दरिया के पानी की गुणवत्ता में स्पष्ट सुधार देखने को मिला है।
इसके बावजूद, जब बुड्ढा दरिया की सफाई की कारसेवा सकारात्मक परिणाम दे रही है, तब कुछ विभाग और अधिकारी जानबूझकर इस अभियान को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वर्षों बाद जब दरिया के पानी में सुधार नजर आ रहा है, तो लुधियाना वासियों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे ऐसी लापरवाही के खिलाफ आवाज उठाएं और दरिया को प्रदूषित करने वाली ताकतों का खुलकर विरोध करें। बुड्ढा दरिया केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी और आने वाली पीढ़ियों की अमानत है—इसके साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।