भूमि अधिग्रहण मुआवजा भुगतान में गबन मामले में महिला एस डी एम गिरफ्तार
May16,2026
| Rajender Singh Jadon | Chandigarh
चंडीगढ़,15मई( राजेंद्र सिंह जादौन )। राजस्थान-जम्मू कश्मीर राष्ट्रीय मार्ग निर्माण के लिए किए गए जमीन अधिग्रहण के मुआवजा भुगतान मामले में गुरदासपुर में तैनात महिला पीसीएस उपमंडल अधिकारी अनुप्रीत कौर रंधावा को शनिवार सुबह उनके सरकारी आवास से गिरफ्तार कर लिया गया।
यह कार्रवाई तरनतारन की पट्टी पुलिस ने लंबे समय से चल रही जांच के आधार पर की। आरोप है कि राष्ट्रीय मार्ग निर्माण के दौरान जमीन अधिग्रहण मुआवजे की एक करोड़ 63 लाख रुपये की राशि ऐसे लोगों के खातों में भेज दी गई, जिनका अधिग्रहीत जमीन से कोई संबंध नहीं था।, अनुप्रीत कौर रंधावा उस समय तरनतारन में उपमंडल अधिकारी के पद पर तैनात थीं। जांच में सामने आया कि वर्ष 2018 से 2019 के बीच राष्ट्रीय मार्ग-54 के लिए जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान पांच अपात्र लोगों के खातों में सरकारी मुआवजे की रकम जारी कर दी गई। आरोप है कि यह भुगतान माल विभाग के अभिलेखों की पुष्टि किए बिना किया गया।
मामले की शुरुआत उस समय हुई जब पट्टी के तत्कालीन उपमंडल अधिकारी नवराज सिंह बराड़ ने तत्कालीन उपायुक्त प्रदीप सभ्रवाल को शिकायत भेजी। शिकायत में कहा गया कि जिन लोगों के नाम पर रकम जारी की गई, उनकी जमीन राष्ट्रीय मार्ग परियोजना के लिए अधिग्रहित ही नहीं की गई थी। जांच के बाद पांच सितंबर 2019 को थाना सिटी पट्टी में धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और साजिश की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
जांच में जिन लोगों के नाम सामने आए उनमें मानांवाला निवासी जसबीर कौर, फताहपुर अलगो महमूदपुरा निवासी राजविंदर कौर, कोट दसौंधी मल्ल निवासी सरताज सिंह, अमृतसर निवासी बिक्रमजीत सिंह तथा गुरजीत कौर शामिल हैं। माल विभाग के अभिलेखों में इन लोगों की जमीन का कोई उल्लेख नहीं मिला। साथ ही केंद्र सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में भी इनके नाम शामिल नहीं थे।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित भुगतान तत्कालीन उपमंडल अधिकारी अनुप्रीत कौर रंधावा के हस्ताक्षरों के बाद जारी किए गए। इसे सरकारी धन के गबन का गंभीर मामला माना गया। बाद में उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति ने भी अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी थी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन मुख्य सचिव करण अवतार सिंह ने अनुप्रीत कौर रंधावा को निलंबित करने के आदेश जारी किए थे।
अब पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर आगे की पूछताछ शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे मामले में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा रकम किस प्रकार जारी की गई। पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है।
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