आरोपियों से करोड़ों रुपये, 98 लैपटॉप, 229 मोबाइल फोन व 19 लग्जरी गाड़ियां बरामद
300 से अधिक बैंक खाते किए गए फ्रीज, आगे की कार्रवाई जारी- कई खाते फ्रीज किए जा रहे
यूरोप और उत्तरी अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से जुड़ा अब तक का सबसे बड़ा साइबर धोखाधड़ी का मामला - सीपी
लुधियाना 15 मई (पारस दानिया)। महानगर के पुलिस कमिश्नर आईपीएस स्वपन शर्मा के निर्देशों तले अपराधिक गतिविधियों और साबर ठगों पर शिकंजा कसने के लिए चल रही मुहिम में थाना साइबर सेल पुलिस सहित कमिश्नरेट की समर्पित टीमों ने एक अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश किया है। लुधियाना पुलिस की यह अब तक की साइबर क्राइम में सबसे बड़ी कामयाबी है। लुधियाना पुलिस द्वारा 132 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया गया है।जिनके कब्जे से करोड़ों रुपये, 98 लैपटॉप, 229 मोबाइल फोन व 19 लग्जरी गाड़ियां बरामद की गई हैं। आरोपियों के 300 से अधिक बैंक खाते भी फ्रीज किए जा चुके हैं आगे की कार्रवाई जारी- कई खाते फ्रीज किए जा रहे हैं।
पुलिस कमिश्नर आईपीएस स्वपन शर्मा की मामले के संबंध में जानकारी
सीपी ने बताया कि महानगर पुलिस को साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ बड़ी कामयाबी मिली है। डीसीपी सिटी आईपीएस रूपिंदर सिंह और डीसीपी इन्वेस्टिगेशन हरपाल सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीमों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय साबर गिरोह का भंडाफोड़ किया गया है। काल सेंटरों की आड़ में साइबर फ्राड करने वाले गिरोह के खिलाफ पुलिस स्टेशन साइबर क्राइम में 13 मई को एक मुकदमा नंबर 37, जोकि अंडर सेक्शन धारा 318(4)/319(2)/336(3)/61(2) बीएनएस और 66-सी/66-डी/75 आईटी एक्ट के तहत दर्ज किया गया था। उक्त मामले में विदेशी नागरिकों को ऑनलाइन धोखाधड़ी और वित्तीय घोटालों के माध्यम से निशाना बनाकर साइबर धोखाधड़ी करने वाले इस गिरोह के बारे में विश्वसनीय खुफिया जानकारी के आधार पर, संधू टावर और सिल्वर आर्क के पास स्थित व्यावसायिक परिसरों सहित कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई थी। इस अभियान के दौरान, विभिन्न अवैध कॉल सेंटरों से कुल 132 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
छापेमारी और उसके बाद की जांच के दौरान कई वस्तुएं बरामद की गईं:
जिनमें 1 करोड़ 7 लाख रुपये के करीब भारतीय करेंसी, विभिन्न मार्का के 98 लैपटॉप,
विभिन्न मार्का के 229 मोबाइल फोन और कई मॉडलों की 19 लग्जरी गाड़ियां बरामद की गई।
सीपी ने अहम जानकारी सांझा करते बताया कि आरोपी व्यक्ति आधुनिक साइबर धोखाधड़ी तकनीकों का उपयोग करके विदेशी नागरिकों को निशाना बनाते हुए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर एप्लिकेशन चला रहे थे। पीड़ित के कंप्यूटर स्क्रीन पर माइक्रोसॉफ्ट कंपनी की ओर से कथित तौर पर वायरस हमले या सुरक्षा खतरे की चेतावनी वाला एक फर्जी पॉप-अप दिखाई देता था। पॉप-अप में पीड़ित से संपर्क करने के लिए एक ग्राहक सेवा नंबर भी दिया जाता था। साथ ही, पॉप-अप के कारण पीड़ित के कंप्यूटर की स्क्रीन काम करना बंद कर देती थी या हैंग हो जाती थी।जब पीड़ित ने प्रदर्शित नंबर पर संपर्क किया, तो कॉल को एक्स-लाइट सॉफ्टवेयर के माध्यम से धोखेबाजों के पास भेज दिया गया, जो कि आने वाली कॉलों को रूट करने के लिए उपयोग किया जाने वाला एक इंटरनेट-आधारित डायलर एप्लिकेशन है।प्रत्येक स्थान पर लगभग 8-10 टीमें थीं, जिनमें से प्रत्येक टीम में लगभग 6-7 सदस्य थे। प्रत्येक टीम में एक नामित "ओपनर" और एक "क्लोजर" थे। "ओपनर" आने वाली कॉल को रिसीव करता था और पीड़ित को अल्ट्रा-व्यूअर जैसे रिमोट एक्सेस सॉफ़्टवेयर डाउनलोड करने के लिए मनाता था, जिससे पीड़ित के कंप्यूटर सिस्टम तक रिमोट एक्सेस संभव हो जाता था। इसके बाद, पीड़ित को सिस्टम पर नकली या फर्जी स्कैन चलाने के लिए मजबूर किया गया। इस प्रक्रिया के दौरान, पीड़ित की स्क्रीन पर ईमेल खातों के साथ छेड़छाड़, बैंक खातों की हैकिंग, बाल पोर्नोग्राफी संबंधी चेतावनियाँ और अन्य झूठे सुरक्षा खतरों जैसी समस्याओं को दर्शाने वाले मनगढ़ंत चेतावनी पॉप-अप दिखाई देते थे।इसके बाद पीड़ितों को उनके ईमेल खाते, बैंकिंग एप्लिकेशन और सिस्टम पर मौजूद अन्य गोपनीय जानकारी खोलने के लिए प्रेरित किया गया। स्क्रीन शेयरिंग और रिमोट एक्सेस के माध्यम से, गोपनीय डेटा धोखेबाजों के लिए सुलभ हो गया।इसके बाद, पीड़ित को झूठी सूचना दी गई कि उसके बैंक खाते में सुरक्षा संबंधी गंभीर समस्याएं हैं और कॉल संबंधित बैंक प्रतिनिधि को ट्रांसफर कर दी जाएगी। कॉल को "क्लोजर" ने संभाला, जिसने बैंक अधिकारी होने का नाटक किया और पीड़ित को झूठी सलाह दी कि खाते में जमा पैसा असुरक्षित है। फिर पीड़ित को निम्नलिखित में से एक या अधिक तरीकों से पैसे ट्रांसफर करने या देने के लिए प्रेरित किया जाता था।
इसके अलावा गिरोह अमेज़न/एप्पल गिफ्ट कार्ड जैसे गिफ्ट कार्ड खरीदना और साझा करना, फर्जी विदेशी खातों में पैसे ट्रांसफर,इसके बाद धोखाधड़ी से प्राप्त राशि को कई हवाला चैनलों, क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन और अन्य अवैध वित्तीय तंत्रों के माध्यम से भारत भेजा जाता था। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि प्रत्येक ऑपरेटर प्रतिदिन औसतन लगभग 8-10 कॉल संभालता था। कार्यरत कर्मचारियों को निश्चित वेतन के साथ-साथ प्रदर्शन-आधारित इंसेंटिव भी दिया जाता था। डिजिटल साक्ष्य, धन के लेन-देन का विश्लेषण, धोखे से प्राप्त आय, हवाला लेनदेन, क्रिप्टोकरेंसी के संबंध, कॉल सेंटरों के संचालन के लिए उपयोग किए जाने वाले परिसरों के स्वामित्व और किरायेदारी का सत्यापन, और इस रैकेट से जुड़े अन्य आरोपी व्यक्तियों और सहायकों की पहचान के संबंध में आगे की जांच जारी है।वहीं इस मामले में लुधियाना पुलिस आयुक्त कार्यालय राज्य के भीतर सक्रिय साइबर अपराधियों, संगठित धोखाधड़ी गिरोहों और अवैध वित्तीय नेटवर्क के खिलाफ सख्त और निरंतर कार्रवाई के लिए कार्रवाई कर रही है।