विशेष सत्र पूरी तरह संवैधानिक था_नायब सैनी
Apr27,2026
| Rajender Singh Jadon | Chandigarh
राजेंद्र सिंह जादौन
चंडीगढ़, 27 अप्रैल। हरियाणा विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए गए सवाल पर मुख्यमंत्री नायब सैनी ने सत्रावसान के बाद कहा कि सत्र की कार्यवाही पूरी तरह संवैधानिक एवं जनहित में थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष द्वारा यह आरोप लगाया गया कि विशेष सत्र असंवैधानिक है, जो पूरी तरह निराधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सत्र कैबिनेट की मंजूरी और राज्यपाल की अनुमति से विधिवत रूप से बुलाया गया था। उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि क्या चुनी हुई सरकार, कैबिनेट और राज्यपाल के निर्णय को असंवैधानिक कहा जा सकता है।
आचार संहिता लागू होने के बावजूद विशेष सत्र बुलाए जाने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पूर्णतः विधायी विषय है और इसमें कुछ भी असंवैधानिक नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकसभा का भी विशेष सत्र बुलाया गया था, इसलिए इस पर आपत्ति करना निराधार है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष प्रदेश में फसल खरीद संबंधी समस्याओं पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाया, जिसे हमने स्वीकार किया। लेकिन, विपक्ष सदन में ही नहीं आया। इसके अतिरिक्त, नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर एक सरकारी प्रस्ताव भी लाया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रस्ताव में ‘निंदा’ जैसे शब्द का कोई उल्लेख नहीं था, इसके बावजूद विपक्ष ने हताशा और तिरस्कार का परिचय देते हुए सदन का बहिष्कार किया। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी के विधायक सदन में उपस्थित नहीं हुए और उन्होंने सदन के बाहर डुपलीकेट सेशन चलाया, जो नियमों के विरुद्ध और पूरी तरह असंवैधानिक है।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अनादर का आरोप लगाते हुए कहा कि महिलाओं को उनका अधिकार देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और यह प्रयास निरंतर जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं विकास की मुख्यधारा में बराबरी से भागीदारी निभा रही हैं। बेटियां शिक्षा, खेल, प्रशासन, वकालत और पायलट जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। इसके विपरीत, कांग्रेस का रवैया महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रति सकारात्मक नहीं दिखाई देता। उन्होंने प्रधानमंत्री के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज की आधी आबादी को उनका हक दिलाना सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा बिल की कॉपी उपलब्ध न होने का बहाना बनाकर बहिष्कार किया गया, जबकि वास्तविकता यह है कि यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा बनाने का प्रयास था। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिल से संबंधित जानकारी नेवा पोर्टल पर उपलब्ध थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विषय को समझने के लिए परिसीमन की प्रक्रिया को देखना जरूरी है। उन्होंने बताया कि 1971 में भारत की जनसंख्या लगभग 54 करोड़ थी और 1976 में परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों की संख्या 550 निर्धारित की गई थी। इसके बाद अगला परिसीमन 2026 में होना तय है, जिसमें जनगणना और परिसीमन दोनों प्रक्रियाएं एक साथ होंगी। 2023 में लाए गए नारी शक्ति वंदन विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि महिलाओं को आरक्षण का लाभ वर्ष 2029 से दिया जाएगा। इसी उद्देश्य से यह विधेयक लाया गया, ताकि 2029 से महिलाओं को उनका अधिकार सुनिश्चित किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने जा रही है। मुख्यमंत्री ने आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि आप पार्टी ने झूठे वायदे करके पंजाब में सरकार बनाई। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग सरल और भरोसा करने वाले हैं, और आम आदमी पार्टी ने पंजाब के लोगों को गुमराह किया। पंजाब के लोगों को उम्मीद थी कि यह पार्टी कुछ ठोस काम करेगी, लेकिन वास्तविकता में केवल खोखले दावे और बयान ही सामने आए।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को भी परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति नशे के विरुद्ध शिकायत करता है, उसी के खिलाफ झूठे मामले दर्ज कर दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि जब भी पंजाब में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनेगी, तब नशा बेचने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और इस समस्या को जड़ से समाप्त किया जाएगा।
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