राजेंद्र सिंह जादौन
चंडीगढ़,14अप्रैल।केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने मंगलवार को पंचकूला में आयोजित डॉ भीमराव अंबेडकर की 135 वी जयंती के राज्य स्तरीय समारोह में ऐतिहासिक उद्धरणों से कांग्रेस को डॉ अम्बेडकर विरोधी करार दिया।उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस राजनीतिक मजबूरी में बाबा साहिब को याद करती है।
मेघवाल समारोह में मुख्य अतिथि थे।उन्होंने कहा कि पंडित जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व के दौरान बाबा साहेब को संविधान सभा से बाहर रखने का प्रयास किया गया। बाबा साहेब को बंगाल के जिस क्षेत्र से संविधान सभा में शामिल किया गया था उस क्षेत्र को मानकों के विपरीत पाकिस्तान में शामिल कर दिया गया।मेघवाल ने कहा कि बाबा साहेब को लोकसभा चुनाव में भी नेहरू ने विरोध कर हरवाया।उन्होंने कहा कि दिल्ली में अंबेडकर को आवास देने का दावा कांग्रेस करती है लेकिन ऐतिहासिक हकीकत यह हैं कि सिरोही के महाराजा ने अंबेडकर को दिल्ली में आवास दिया था।
उन्होंने कहा कि केंद्र में कांग्रेस की सरकार के रहते बाबा साहिब को भारत रत्न सम्मान नहीं दिया गया।वर्ष 1990 में केंद्र की वीपी सिंह सरकार ने भारत रत्न दिया तब इस सरकार को भाजपा भी समर्थन दे रही थी।बाबा साहेब के स्मृति स्थलों को भी स्मारक में बदलने का काम कांग्रेस सरकार ने नहीं किया।केंद्र में जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनी तब पंच स्मृति स्थल विकसित करने के लिए सौ करोड़ रुपए आवंटित किए गए।मेघवाल ने कहा कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने झूठ फैलाया कि भाजपा बड़ा बहुमत हासिल करने पर संविधान को बदल देगी।उन्होंने कहा कि इस तरह की काठ की हांडी अब नहीं चढ़ेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब हाथी पर संविधान को रखकर शोभायात्रा निकाली गई थी।
मेघवाल ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने नारी शक्ति को भी सम्मान दिया है।इसके लिए महिलाओं को विधानसभा और लोकसभा में 33फीसदी आरक्षण देने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित कराया गया है और अब इस अधिनियम को प्रभावी करने के लिए संविधान में जरूरी संशोधन के लिए संसद का विशेष अधिनियम आयोजित किया जाने वाला है।
समारोह में मुख्यमंत्री नायब सैनी ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहिब का विचार था कि व्यक्ति की पहचान जाति या वर्ग से न होकर उसके कार्य से होना चाहिए।वे मानते थे कि कड़े संघर्ष से लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है।उन्होंने हर मनुष्य के एक समान होने का संदेश भी दिया।बाबा साहिब ने शिक्षा को सभी समस्याओं का हल बताया।उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने बाबा साहिब को हृदय से स्वीकार नहीं किया।उनके हिन्दू कोड बिल के प्रस्ताव को नजरअंदाज किया गया और बाबा साहिब ने हालात के चलते नेहरू मंत्रिमंडल के कानून मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया।