राजेंद्र सिंह जादौन
चंडीगढ़,27जून।अखिल भारतीय कांग्रेस की ओर से महाराष्ट्र के नेता संजय दत्त को शुक्रवार को हरियाणा कांग्रेस का प्रभारी नियुक्त किया गया है।हरियाणा के प्रभारी वीके हरिप्रसाद को कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नियुक्त किए जाने के बाद हरियाणा में प्रभारी का पद रिक्त था। हरियाणा में कांग्रेस को एकजुट करना बड़ी चुनौती बनी हुई है। कांग्रेस हाइकमान की ओर से अब तक नियुक्त किए गए प्रभारी प्रदेश के सभी गुटों को एकसूत्र में बांधने में नाकाम रहे है।
वीके हरिप्रसाद ने कर्नाटक जाते जाते किसी भी आंदोलन धरना प्रदर्शन आदि के लिए प्रदेश नेतृत्व से अनुमति लेने की अनिवार्यता का निर्देश जारी किया था लेकिन उनके इस निर्देश का भी कुछ विधायकों और नेताओं ने विरोध कर दिया था।अब यहां हरियाणा कांग्रेस मुख्यालय पर संजय दत्त के आगमन का इंतजार शुरू हो गया है। हरियाणा कांग्रेस में अभी पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा,
राज्यसभा सदस्य और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सुरजेवाला और लोकसभा सदस्य कुमारी शैलजा के तीन बड़े गुट है।कांग्रेस वर्ष 2014से प्रदेश की सत्ता से बाहर है।मुख्य विपक्षी दल के बतौर सत्ता की दावेदार तो बनी रही है लेकिन गुटबाजी उसकी राह में बड़ा रोडा है।
कांग्रेस की ओर से शुक्रवार को जारी सूची के अनुसार, संजय दत्त को हरियाणा का एआईसीसी प्रभारी बनाया गया है। वहीं, लालजी देसाई को ओडिशा और राजेंद्र पाल गौतम को उत्तर प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया गया है। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि नए प्रभारी राज्यों में संगठन को और प्रभावी बनाने का काम करेंगे।
पार्टी लगातार विभिन्न राज्यों में संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की कवायद में जुटी है। इसी क्रम में नए प्रभारियों की नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि मजबूत संगठन के जरिए राज्यों में पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों और जनसंपर्क अभियान को नई गति मिलेगी। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पार्टी अन्य राज्यों और विभिन्न संगठनात्मक पदों पर भी बदलाव या नई नियुक्तियां कर सकती है।कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी। नए प्रभारी जल्द ही अपने-अपने राज्यों में जिम्मेदारी संभालेंगे और संगठन विस्तार, कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों की रणनीति पर काम शुरू करेंगे। कांग्रेस राज्यों में अपने संगठन को मजबूत करने के अलावा केंद्र सरकार पर भी कई मुद्दों को लेकर हमलावर है।