राजेंद्र सिंह जादौन
चंडीगढ़, 8जून। हरियाणा के कईं आईएएस अफसरों पर इन दिनों अधिकारों के दुरुपयोग ओर भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई चल रही हैं।हाल में आई डी एफ सी फर्स्ट और एओ फाइनेंस बैंक के जरिए हरियाणा के सरकारी विभागों के धन के गबन के मामले में तीन आईएएस के ठिकानों पर सीबीआई छापों के बाद पंचकूला में बतौर डीसी तैनात रहे सुशील सारवान द्वारा अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करने औऱ करोड़ों की शामलात जमीन को लेकर एक विवादित फैसला करने के मामले में शहरी निकाय विभाग की ओर से विस्तृत रिपोर्ट तलब कर ली गई है। अहम बात यह है कि आने वाले दिनों में सारवान के विरुद्ध एक्शन की तैयारी है। सारवान एक सियासी परिवार से संबंध रखते हैं।
लगभग 200 करोड़ की पंचकूला जिले की शामलात जमीन के मामले में सरकार ने रिपोर्ट मांगी है। यूएलबी विभाग की ओर से इस पर एक्शन की तैयारी है। पूर्व उपायुक्त सारवान के फैसले की वैधता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। हरियाणा के शहरी स्थानीय निकाय विभाग (यूएलबी)के आला अफसरों ने बहुचर्चित भूमि विवाद में संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन और नगर निगम पंचकूला से विस्तृत और स्पष्ट रिपोर्ट तलब की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2024 में तत्कालीन उपायुक्त डॉ. सुशील सारवान ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर मैसर्स पोलो होटल्स प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में विवादित आदेश जारी किया था।
पंचकूला नगर निगम के कमिश्नर सचिन गुप्ता ने यूएलबी विभाग महानिदेशक को लिखित रूप से अवगत कराया कि तत्कालीन उपायुक्त सुशील सारवान की अदालत ने 16 जनवरी 2024 को शामलात भूमि से जुड़ा अहम फैसला पोलो होटल्स के पक्ष में सुनाया था। नगर निगम प्रशासन का दावा है कि सुनवाई के दौरान उनके द्वारा प्रस्तुत किए महत्वपूर्ण राजस्व दस्तावेजों, पुराने अदालती फैसलों और स्थापित कानूनों की पूरी तरह से अनदेखी की गई। उपायुक्त ने आदेश में मैसर्स पोलो होटल्स लिमिटेड को 72 बीघा की इस कीमती जमीन का मालिक घोषित कर दिया था। नगर निगम ने राजस्व रिकॉर्ड में किसी भी प्रकार के बदलाव को रोकने के लिए तुरंत कानूनी मोर्चा संभाला था।
यह 72 बीघा भूमि पंचकूला के अहम स्थान पर स्थित है, जिसका वर्तमान बाजार मूल्य ₹200 करोड़ से अधिक आंका गया है। पूर्व उपायुक्त ने अपने आदेश में कहा था कि नगर निगम पंचकूला यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा कि इस जमीन का उपयोग कभी किसी सार्वजनिक या साझा उद्देश्य के लिए किया गया था। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि वर्ष 1950 से पहले या बाद में भी यह जमीन कभी ग्राम पंचायत के कब्जे में नहीं रही थी। इसके विपरीत, शिकायतकर्ता और निगम का पक्ष है कि यह शामलात देह श्रेणी की सार्वजनिक संपत्ति है।
पूरे मामले में सरकार और यूएलबी के अतिरिक्त उपायुक्त तक मामला पहुंच जाने के बाद में दोबारा नोटिस जारी किया गा है। एसीएस राजस्व के पासशिकायत जाने के बाद मामले में शिकंजा कसने की तैयारी है। मामले में की गई शिकायत सीधे हरियाणा सरकार के वित्तायुक्त एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग) के पास भेजी थी। विभाग ने पहले भी जिला प्रशासन से इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। लेकिन तय समय सीमा के भीतर रिपोर्ट जमा न होने के कारण विभाग ने दोबारा कड़ा पत्र जारी कर जल्द से जल्द वस्तुस्थिति स्पष्ट करने के आदेश दिए हैं।