चंडीगढ़, 8जून। हरियाणा के पंचकूला में 200 करोड़ बाजार मूल्य की शामलात भूमि प्रकरण को लेकर पोलो होटल्स लि ने भी अपना पक्ष रखा है और कहा है कि सरकार को बदनाम करने की साजिश! की गई है जबकि संबंधित जमीन पर नगर निगम का कभी अधिकार नहीं रहा।
कंपनी की ओर से कहा गया है कि हाल ही में कुछेक समाचार पत्रों में प्रकाशित 'पंचकूला नगर निगम की 200 करोड़ रुपये की शामलात जमीन होटल मालिक के नाम ट्रांसफर' शीर्षक खबर पूरी तरह से सरकार को बदनाम करने की साजिश नजर आ रही है। संबंधित समाचार में प्रस्तुत कई तथ्य वास्तविक राजस्व रिकॉर्ड और कानूनी स्थिति से मेल नहीं खाते तथा इससे आमजन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई है।
राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार यह भूमि कभी नगर निगम पंचकूला की संपत्ति नहीं रही। न तो नगर निगम का इस भूमि पर स्वामित्व रहा, न कब्जा, न नियंत्रण और न ही निगम ने कभी इसका उपयोग किया। होटल पक्ष का कहना है कि गांव चौकी के मूल भूमि धारक वर्ष 1950 से भी पहले से इस भूमि पर अपने हिस्से के अनुसार काबिज और मालिक रहे हैं। यहां तक कि वर्ष 1912 के राजस्व रिकॉर्ड में भी इस भूमि का मालिकाना हक गांव चौकी के मूल भूमिधारकों के नाम दर्ज रहा है।
होटल कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि हरियाणा सरकार ने होटल परियोजना के लिए वर्ष 1992 और 2011 में दो बार भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) की अनुमति प्रदान की थी। इससे पहले वर्ष 1999 में राज्य सरकार ने इस भूमि को अधिग्रहण प्रक्रिया से भी बाहर कर दिया था। उनका कहना है कि यदि भूमि के स्वामित्व को लेकर कोई संदेह होता तो तत्कालीन चौधरी बंसीलाल व चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली सरकारें कभी ऐसी महत्वपूर्ण अनुमतियां जारी नहीं करती। अनुमति जारी करने से पहले संबंधित विभाग स्वामित्व और रिकॉर्ड की पूरी जांच करते हैं। ऐसे में वर्षों बाद दावा करना न्यायोचित नहीं। होटल पक्ष का कहना है कि भूमि के कुछ हिस्से वर्ष 1996 तथा वर्ष 2012 में खरीदे गए थे और इन लेन-देन को कभी चुनौती नहीं दी गई। कई दशकों तक रिकॉर्ड निर्विवाद रहने के बाद अब नगर निगम द्वारा स्वामित्व का दावा करना कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं माना जा सकता।
होटल प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत की गई तथ्यात्मक जानकारी के अनुसार गांव चौकी के मूल मालिकों और उनके उत्तराधिकारियों ने समय-समय पर विधिवत पंजीकृत विक्रय दस्तावेजों (बयनामों)के माध्यम से यह भूमि होटल संचालक ए.के. दहिया को बेची थी। इन सभी दस्तावेजों का सत्यापन उप-पंजीयक कार्यालय पंचकूला द्वारा किया गया और राजस्व विभाग ने उनके आधार पर नामांतरण (म्यूटेशन) भी स्वीकृत किए। संबंधित भूमि का प्रत्येक लेन-देन सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है तथा आज तक किसी सक्षम न्यायालय या राजस्व प्राधिकरण द्वारा इन दस्तावेजों को अवैध घोषित नहीं किया गया है। इसलिए होटल प्रबंधन का स्वामित्व कानूनी रूप से स्थापित और सुरक्षित है।
स्पष्टीकरण में कहा गया है कि यह धारणा भी गलत है कि उपायुक्त या कलेक्टर ने किसी आदेश के माध्यम से यह भूमि होटल मालिक के नाम ट्रांसफर की। वास्तविकता यह है कि भूमि का स्वामित्व बिक्री दस्तावेजों के आधार पर मूल भूमिधारकों से होटल मालिक को प्राप्त हुआ था। वहीं, होटल पक्ष का यह भी कहना है कि यदि भूमि कभी ग्राम पंचायत की संपत्ति ही नहीं थी, तो बाद में नगर निगम क्षेत्र में शामिल होने मात्र से उस पर नगर निगम का अधिकार स्थापित नहीं हो सकता।
होटल प्रबंधन के अनुसार 16 जनवरी 2024 को कलेक्टर पंचकूला द्वारा पारित आदेश में संबंधित सभी दस्तावेजों, राजस्व रिकॉर्ड, बिक्री दस्तावेजों, नामांतरण रिकॉर्ड, चकबंदी अभिलेखों तथा वंशावली रिकॉर्ड का गहन अध्ययन किया गया था। आदेश में यह पाया गया कि विक्रेतागण भूमि के वैध मालिक थे और उन्हें अपने उत्तराधिकार के आधार पर भूमि बेचने का पूरा अधिकार प्राप्त था। होटल पक्ष का कहना है कि नगर निगम ऐसा कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाया, जिससे यह साबित हो सके कि विवादित भूमि कभी ग्राम पंचायत चौकी की संपत्ति थी। होटल पक्ष का यह भी दावा है कि नगर निगम न तो कोई संपत्ति रजिस्टर प्रस्तुत कर सका और न ही ऐसा कोई रिकॉर्ड जिससे यह सिद्ध हो कि उक्त भूमि ग्राम पंचायत की थी। कानूनी रूप से भूमि पर दावा करने के लिए स्वामित्व का प्रमाण प्रस्तुत करना आवश्यक होता है, जो इस मामले में उपलब्ध नहीं कराया गया।
होटल प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण में यह भी उल्लेख सामने आया है कि वर्ष 2006 में पंचकूला के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश द्वारा गांव चौकी की समान प्रकृति की भूमि के अधिग्रहण मामले में मूल भूमिधारकों को मुआवजा दिया गया था। उस निर्णय में भी भूमि को ग्राम पंचायत की बजाय निजी स्वामित्व वाली माना गया था। उस आदेश को भी कभी चुनौती नहीं दी गई।
होटल प्रबंधन का कहना है कि भूमि से जुड़े सभी दस्तावेज, सरकारी रिकॉर्ड, नामांतरण, राजस्व अभिलेख और प्रशासनिक आदेश उनके स्वामित्व की पुष्टि करते हैं। ऐसे में अधूरी या भ्रामक जानकारी के आधार पर किसी भी प्रकार की धारणा बनाना उचित नहीं है।