*बुड्ढे दरिया के पानी की गुणवत्ता में सुधार के बावजूद गोबर उठाने की चुनौती बरकरार*
*दरिया में गंदगी से भरे बोरे फेंकने का रुझान बढ़ा*
*गांव तलवाड़ा में बन रहा सीचेवाल मॉडल*
*टी.डी.एस 3500 से घटकर 675 तक आया*
बुड्ढे दरिया को प्रदूषण-मुक्त बनाने के लिए राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल द्वारा चलाई जा रही मुहिम अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। पानी की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है, लेकिन दरिया में गोबर के जाने की समस्या अभी भी बनी हुई है।
हैबोवाल ईटीपी प्लांट की छह मोटरें बंद होने के कारण गोबर युक्त पानी डेयरी कॉम्प्लेक्स की गलियों में फैल गया, जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। जब संत सीचेवाल की टीम ने इस बारे में रिपोर्ट दी, तो प्रशासन तुरंत हरकत में आया और मोटरों को चालू करवा दिया गया।
संत सीचेवाल ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के ‘रंगला पंजाब’ के सपने को साकार करने के लिए बुड्ढे दरिया का साफ होना बेहद जरूरी है, क्योंकि पंजाब की असली पहचान और अस्तित्व इसके दरियाओं से ही जुड़ा हुआ है।
हैबोवाल डेयरी कॉम्प्लेक्स के पास बनाए गए अस्थायी सीचेवाल मॉडल के तहत तलाबों से 105 टन गोबर निकाला गया, जबकि डोर-टू-डोर केवल 15 टन ही इकट्ठा हो पाया। ताजपुर डेयरी कॉम्प्लेक्स में 88 टन गोबर टालाबों से निकाला गया, जबकि निर्धारित स्थानों से केवल 28 टन ही एकत्र किया गया।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार हैबोवाल और ताजपुर क्षेत्रों से कुल 426 टन गोबर इकट्ठा किया गया, लेकिन इसके बावजूद 224 टन गोबर अभी भी बुड्ढे दरिया और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों में पहुंच रहा है।
संत सीचेवाल ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ लाडोवाल बाईपास के पास जैनपुर, तलवाड़ा गांव और बारनहाड़े क्षेत्र की सीवरेज लाइनों का निरीक्षण किया। बल्लोकी पुल के पास बाड़ेवाला ड्रेन के जरिए डेयरियों का गंदा पानी बुड्ढे दरिया में जाने के मुद्दे को भी गंभीरता से लिया गया।
इसके अलावा शिवपुरी पुल पर दरिया से मशीनों द्वारा निकाली जा रही गाद और ताजपुर डेयरी कॉम्प्लेक्स के पास बनाए गए अस्थायी सीचेवाल मॉडल की भी समीक्षा की गई।