लुधियाना की फर्मों से जुड़े संगठित जीएसटी धोखाधड़ी नेटवर्क का पर्दाफाश
Jun10,2026
| Jagrati Lahar Bureau | Ludhiana
• 29 फर्में जांच के दायरे में, अब तक 20 फर्मों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज।
• फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) दावे, जाली कर दस्तावेजों का उपयोग तथा जीएसटी पंजीकरणों के दुरुपयोग का खुलासा।
• संबंधित फर्मों एवं आईटीसी लाभार्थियों से लगभग 20 करोड़ रुपये की वसूली।
कारोबार सुगमता (Ease of Doing Business) के तहत प्रदान किए गए जीएसटी पंजीकरण, जिनका उद्देश्य वैध व्यापार एवं उद्योग को बढ़ावा देना था, उन्हें फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से प्राप्त किया गया अथवा काल्पनिक आईटीसी श्रृंखलाएं बनाकर राज्य के राजस्व को नुकसान पहुंचाने के लिए दुरुपयोग किया गया।”
• विभाग ने जीएसटी धोखाधड़ी के प्रति शून्य-सहनशीलता (Zero Tolerance) की नीति दोहराई है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत पंजीकरण प्रदान करने की व्यवस्था ईमानदार करदाताओं को सशक्त बनाने के लिए है। जीएसटी पंजीकरण या दस्तावेजों के किसी भी दुरुपयोग, गैर-वास्तविक लेन-देन अथवा फर्जी आईटीसी दावों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी तथा सभी दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा।
स्टेट जीएसटी विभाग ने हाल ही में डेटा-आधारित सत्यापन अभियान के दौरान लुधियाना क्षेत्र में संचालित एक सुव्यवस्थित जीएसटी धोखाधड़ी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। यह खुलासा जीएसटीआर-2ए/2बी में दर्शाई गई खरीद संबंधी जानकारी तथा उससे संबंधित ई-वे बिल रिकॉर्ड्स के विश्लेषणात्मक मिलान के आधार पर हुआ। जांच में फर्जी लेन-देन, जीएसटी पंजीकरण संख्याओं के दुरुपयोग तथा जाली कर दस्तावेजों के प्रसार का मामला सामने आया है।राज्य के फाइनेंसियल कमिश्नर अजीत बाला जोशी व टैक्सेशन कमिश्नर जतिंदर जोरवाल के दिशा निर्देशों पर लुधियाना डिवीज़न की तरफ से हुई जांच में पाया गया कि इन फर्मों ने सरकार की “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” पहल के तहत जीएसटी पंजीकरण प्राप्त किए थे, जिसका उद्देश्य वैध व्यापार और उद्योग को बढ़ावा देना है। हालांकि, कई मामलों में पंजीकरण फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्राप्त किए गए अथवा उनका सुनियोजित तरीके से दुरुपयोग कर काल्पनिक इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) उत्पन्न कर अन्य इकाइयों को हस्तांतरित किया गया, जिससे राज्य के राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा। धोखाधड़ी का तरीका फर्जी कर चालानों (टैक्स इनवॉयस) को जारी करने और प्रसारित करने पर आधारित था, जबकि वास्तव में कोई वस्तु या सेवा की आपूर्ति नहीं की गई थी। इन फर्जी चालानों का उपयोग अवैध रूप से आईटीसी प्राप्त करने और आगे हस्तांतरित करने के लिए किया गया। जांच के दौरान यह पाया गया कि कई संस्थाओं ने जीएसटीआर-2ए/2बी में भारी मात्रा में खरीद दर्शाई थी, लेकिन वस्तुओं की आवाजाही के अनुरूप ई-वे बिल उपलब्ध नहीं थे या अन्य गंभीर विसंगतियां मौजूद थीं। इन तथ्यों ने लेन-देन की वास्तविकता पर संदेह उत्पन्न किया, जिसके बाद विस्तृत जांच की गई।आगे की जांच में यह भी सामने आया कि इन संस्थाओं के जीएसटी रजिस्ट्रेशन फर्जी एवं हेरफेर किए गए दस्तावेजों के आधार पर प्राप्त किए गए थे। कुछ मामलों में जब कथित मूल स्वामी से संपर्क किया गया तो उन्होंने संबंधित फर्म से किसी भी प्रकार का संबंध होने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया तथा कहा कि उन्होंने न तो पंजीकरण के लिए आवेदन किया था और न ही अपने दस्तावेजों के उपयोग की अनुमति दी थी।इसके अतिरिक्त, पंजीकरण से जुड़े मोबाइल नंबर भी फर्जी आधार विवरणों के आधार पर तैयार की गई पहचान से जुड़े पाए गए। पंजीकरण के समय प्रस्तुत किए गए बैंक खातों का सत्यापन भी नियमानुसार नहीं किया गया था और वे निर्धारित प्रमाणीकरण मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए।जांच के निष्कर्षों के आधार पर विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फर्जी तरीके से प्राप्त जीएसटी पंजीकरणों तथा अवैध रूप से आईटीसी प्राप्त करने एवं हस्तांतरित करने के मामलों में संबंधित व्यक्तियों एवं फर्मों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब तक लुधियाना डिवीजन में इस धोखाधड़ी से संबंधित 20 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। सत्यापन के दौरान केंद्रीय जीएसटी से संबंधित फर्मों के पंजीकरण भी संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर निलंबित किए गए हैं। वहीं पता चला है कि बड़ी मात्रा में फर्जी आईटीसी अनेक लाभार्थी फर्मों को हस्तांतरित की गई थी, जिसका उपयोग उन्होंने अपनी टैक्स देनदारियों का भुगतान करने के लिए किया।एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में, विभाग द्वारा अब तक संबंधित फर्मों एवं फर्जी आईटीसी का लाभ लेने वाले लाभार्थियों से 20 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की जा चुकी है। यह राशि धोखाधड़ी के माध्यम से बचाए गए कर दायित्व का प्रतिनिधित्व करती है और राज्य कर विभाग की समन्वित कार्रवाई का प्रत्यक्ष परिणाम है। विभाग के संज्ञान में यह भी आया है कि व्यापार सुगमता के लिए प्रदान किए गए जीएसटी पंजीकरणों का दुरुपयोग कर आवेदन के समय फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए जा रहे हैं अथवा काल्पनिक आईटीसी श्रृंखलाएं बनाई जा रही हैं। संबंधित संस्थाओं के बैंक खातों तथा मोबाइल नंबरों से जुड़े वित्तीय लेन-देन भी विभाग की जांच के दायरे में हैं। बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर धन के पूरे प्रवाह (मनी ट्रेल) का पता लगाया जा रहा है, कर चोरी की कुल राशि का आकलन किया जा रहा है तथा धोखाधड़ी में शामिल सभी लाभार्थियों और सहयोगियों की पहचान की जा रही है।रस्टेट टैक्सेशन विभाग सरकारी राजस्व की सुरक्षा तथा जीएसटी व्यवस्था के अंतर्गत कर चोरी एवं धोखाधड़ी में संलिप्त सभी व्यक्तियों और संस्थाओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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