सीबीआई की चार्जशीट ने खोला राज बैंक घोटाले के पैसे से कराया जाता था मुजरा
Sep27,2026
| Rajender Singh Jadon | Chandigarh
राजेंद्र सिंह जादौन
चंडीगढ़,27सितंबर। हरियाणा सरकार की करोड़ों की जमाओ में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और ए यू स्मॉल फाइनेंस बैंक के रास्ते किए गए घोटाले के आरोपियों ने मुजरा जैसी अय्याशी पर भी बड़ी राशि खर्च की थी। इस मामले में सीबीआई की चार्जशीट में यह खुलासा किया गया है।
घोटाले का मास्टरमाइंड रिभव ऋषि सरकारी खजाने को प्रशासनिक अधिकारियों की अय्याशी और लग्जरी लाइफस्टाइल पर लुटा रहा था। रिभव आई डी एफ सी फर्स्ट बैंक का तत्कालीन ब्रांच मैनेजर है।
सीबीआई की चार्जशीट में मोहाली के जीरकपुर स्थित एक विला में चलने वाले इस पूरे ‘मुजरा नेटवर्क’ और इसमें शामिल आई ए एस अधिकारी पंकज अग्रवाल के रोल का खुलासा हुआ है। हालांकि अभी अग्रवाल की तरफ से इस चार्जशीट पर बहस होना बाकी है।
चार्जशीट के मुताबिक, ‘जेड मनोर’ नाम के इस विला में रिभव ऋषि मुजरा और डांस पार्टी आयोजित करता था। इन पार्टियों में दिल्ली से वरुण नाम के बिचौलिए के जरिए 7-8 महिला नर्तक बुलाई जाती थीं।
जांच में यह भी सामने आया कि आई ए एस पंकज अग्रवाल द्वारा खुद ऐसी पार्टियों की मांग की जाती थी। कई बार यह भी पूछा गया कि अगली पार्टी कब होगी? पार्टी में नर्तकियों पर 15-20 लाख रुपए तक उड़ाए जाते थे। नोटों का इंतजाम एक आरबीआई कर्मचारी करता था। वहीं, ये पूरा सिंडिकेट उनकी पत्नी की पार्टियों पर भी खर्चा करता था।सीबीआई ने हरियाणा कैडर के आईएएस पंकज अग्रवाल को पिछले 22 जून को गिरफ्तार किया था। चार्जशीट के अनुसार, पार्टी में नर्तकियों के ऊपर 20, 50 और 100 रुपए के नोट उड़ाए जाते थे। ये 15 से 20 लाख रुपए तक होते थे। नोटों की गड्डियों का इंतजाम रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारी हरभजन के जरिए किया जाता था। वहीं, चंडीगढ़ के सेक्टर-17 स्थित साहिल नाम के व्यक्ति से महंगी शराब मंगवाई जाती थी। जांच में सामने आया है कि आई ए एस पंकज अग्रवाल इन मुजरा पार्टियों के नियमित शौकीन थे। पार्टी खत्म होते ही पंकज अग्रवाल पूछते थे कि "अगली पार्टी कब होगी?"
एस्कार्ट्स डब्ल्यू 1 (एक कोड वर्ड) के बयानों के अनुसार, रिभव ऋषि जब उससे वॉट्सएप कॉल पर बात करता था, तो वह कॉल में पंकज अग्रवाल को भी जोड़ लेता था। कॉल के दौरान पंकज अग्रवाल खुद जेड मनोर विला में मुजरा पार्टियों की मांग करते थे। वह डांस ग्रुप्स, नोटों की गड्डियों और फॉरेनर आर्टिस्ट्स की रूम सर्विस के बारे में भी पूछताछ करते थे।पंकज अग्रवाल की डिमांड पर जेड मनोर में 1 नवंबर 2025, 9 नवंबर 2025, 13 दिसंबर 2025 और 16 जनवरी 2026 को 4 पार्टियों का आयोजन हुआ। फोन के लोकेशन डेटा से पुष्टि हुई है कि 1 नवंबर 2025 की रात 10:30 बजे से सुबह 4 बजे तक पंकज अग्रवाल जेड मनोर में ही मौजूद थे।
: जांच रिपोर्ट के अनुसार, रिभव ऋषि का यह नेटवर्क सिर्फ जीरकपुर तक सीमित नहीं था, बल्कि एस्कॉर्ट्स के ठहरने और भुगतान के लिए पूरा सिंडिकेट काम कर रहा था। एस्कॉर्ट डब्ल्यू-3 ने सीबीआई को दिए बयान में बताया कि वह नवंबर और दिसंबर 2025 में जेड मनोर की पार्टियों में शामिल हुई थी। दोनों बार जब वह ग्राउंड फ्लोर के कमरे में थी, तब पंकज अग्रवाल कमरे के अंदर आए और कुछ समय वहां बिताया। डब्ल्यू3 को इसके बदले 10 से 12 हजार रुपए नकद दिए गए थे। 10 जनवरी 2026 की रात पंकज अग्रवाल के लिए मोहाली के होटल विन्धम में एस्कॉर्ट डब्ल्यू2 का इंतजाम किया गया। नरेश कुमार नाम के कर्मचारी ने डब्ल्यू-2 को दिल्ली से चंडीगढ़ बुलवाया और होटल में कमरा बुक करवाया। 10 जनवरी की रात 10:51 बजे नरेश कुमार ने वॉट्सएप पर मैसेज भेजा, जिसमें लिखा था- ‘वरूण को ओके करना, डब्ल्यू-2 आई हुई है, पंकज सर साथ है।’ पंकज अग्रवाल रात 8:30 बजे से 11 बजे तक डब्ल्यू-2 के साथ मौजूद रहे और रात 10:56 बजे कैब से अपने सेक्टर-19 स्थित घर के लिए निकले।
जांच रिपोर्ट से सामने आया है कि आई ए एस पंकज अग्रवाल के निजी दौरों और परिवार के कार्यक्रमों का पूरा बिल भी बैंक घोटाले के पैसों से ही चुकाया जाता था। 1 अक्टूबर 2025 को पंकज अग्रवाल की पत्नी ऋतु जैन के लिए ट्रिब्यून चौक स्थित नोवोटेल होटल में पार्टी रखी गई। इसका 19,399 रुपए का पूरा बिल रिभव ऋषि ने कैश में चुकाया।रिभव अपनी निजी गाड़ी को आई डी एफ सी बैंक सेक्टर-32 पर ही छोड़ देता था और विक्रम वाधवा नाम के व्यक्ति की गाड़ी में बैठकर आईएएस अफसरों के घर जाता था। जिससे कोई सीसीटीवी या गाड़ी का नंबर ट्रैस न हो सके।
डीलर से बात करने के लिए सामान्य फोन कॉल की जगह वॉट्सएप ऑडियो कॉल का इस्तेमाल किया जाता था। रिश्वत और कमीशन के पैसों की बात सीधे न करके कोड वर्ड में की जाती थी। बिना चेक के पैसे निकालने के लिए डेबिट नोट्स जैसे बैंकिंग तरीकों के साथ फर्जी डॉक्यूमेंट का इस्तेमाल किया जाता था।
सीनियर आई ए एस अफसरों से बात करते समय रिभव शाइन सर या भैया कोड का इस्तेमाल करता था।
हरियाणा सरकार की जमाओ का यह बैंक घोटाला फरवरी 2026 में सामने आया था। आरोप है कि आई डी एफसी फर्स्ट बैंक और ए यू स्मॉल फाइनेंस बैंक के कुछ अधिकारियों ने हरियाणा सरकार के 8 विभागों की रकम फर्जी एफ डी आर और डेबिट नोट्स के जरिए निकालकर शेल कंपनियों में ट्रांसफर कर दी।
हरियाणा सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने जांच राज्य विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो से अपने हाथ में ली। अब तक 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। इनमें दोनों बैंकों के 6 अधिकारी, हरियाणा सरकार के 3 कर्मचारी, 2 कंपनियां और 6 निजी व्यक्ति शामिल हैं। घोटाले का मास्टरमाइंड आई डीएफसी फर्स्ट बैंक का तत्कालीन मैनेजर रिभव ऋषि बताया गया है, जो गिरफ्तार हो चुका है।सीबीआई का दावा है कि स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव रहते पंकज अग्रवाल ने आई डी एफ सी फर्स्ट बैंक में खाता खोलने के दौरान नियमों का पालन नहीं किया। विभाग के एक जूनियर अधिकारी ने एफ डी आर से जुड़े नियमों का हवाला देकर आपत्ति जताई, लेकिन अग्रवाल ने कथित तौर पर दबाव बनाकर खाता खुलवाया।सीबीआई के मुताबिक, खाते में अधिकतम 50 करोड़ रुपए जमा किए जा सकते थे। इसके बावजूद पंकज अग्रवाल की कथित मंजूरी से कोटक महिंद्रा बैंक से सीधे 100 करोड़ रुपए नए खाते में ट्रांसफर कराए गए। जांच एजेंसी का आरोप है कि इसमें वित्तीय नियमों और प्रक्रियाओं की अनदेखी की गई।
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