लोकसभा में तिवारी द्वारा चंडीगढ़ के लिए कम रिसर्च फंडिंग को लेकर जोरदार आलोचना
Apr2,2026
| Jagrati Lahar Bureau | New Delhi/chandigarh
सीमित रिसर्च फंडिंग और चौथी औद्योगिक क्रांति की तकनीकों की अनदेखी पर भी उठाए सवाल
नई दिल्ली/चंडीगढ़, 2 अप्रैल: चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में चंडीगढ़ में वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार के ढांचे को मजबूत करने का मुद्दा उठाया है। उन्होंने संसद में अपने अनस्टार्ड प्रश्न संख्या 6047 के माध्यम से विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री से पूछा कि क्या सरकार ने चंडीगढ़ में वैज्ञानिक शोध, इनोवेशन हब और टेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन केंद्रों को बढ़ावा देने के लिए कोई पहल की है।
तिवारी ने यह भी जानना चाहा कि चंडीगढ़ की संस्थाओं, जैसे विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और टेक्नोलॉजी केंद्रों को स्टार्टअप इंडिया, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड या नैशनल रिसर्च फाउंडेशन जैसी योजनाओं के तहत फंडिंग मिल रही है या फिर नहीं, और यदि मिल रही है तो उसका विस्तृत विवरण दिया जाए।
सांसद ने पिछले पांच वर्षों के दौरान सरकार द्वारा चंडीगढ़ में दिए गए रिसर्च ग्रांट्स, इनोवेशन क्लस्टर्स, स्टार्टअप इन्क्यूबेशन सेंटरों, टेक्नोलॉजी बिजनेस इन्क्यूबेटर्स और रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का वार्षिक विवरण भी मांगा।
उन्होंने यह भी पूछा कि क्या सरकार चंडीगढ़ में नए रिसर्च सेंटर, साइंस और टेक्नोलॉजी पार्क, इनोवेशन हब या टेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित करने की योजना बना रही है, ताकि क्षेत्र के रिसर्च इकोसिस्टम को मजबूत किया जा सके। इसके अलावा, उद्योग-अकादमिक सहयोग, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और रिसर्च के परिणामों के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
तिवारी ने कहा कि भले ही मंत्री द्वारा विस्तृत जवाब दिया गया है, लेकिन वह इस बात से निराश हैं कि चंडीगढ़ में खर्च बहुत कम रहा है। उनके अनुसार, डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी ने पांच वर्षों में लगभग 32 करोड़ रुपये और डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने करीब 52 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जो मिलाकर लगभग 17–18 करोड़ रुपये प्रति वर्ष बनता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर के रिसर्च हब में सरकारी निवेश अरबों डॉलर में होता है, जिसके मुकाबले यह राशि बेहद कम है।
तिवाड़ी ने आगे चिंता जताते हुए, कहा कि चौथी औद्योगिक क्रांति से जुड़ी तकनीकों, जैसे रोबोटिक्स, जीनोमिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर रिसर्च और इंटरनेट ऑफ थिंग्स, पर लगभग कोई खर्च नहीं किया गया है।
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